
देश को मिला पहला NMSC, 26/11 हमले के बाद ही उठी थी मांग, नौसेना के पूर्व वाइस चीफ वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार पहले समन्वयक नियुक्त

सरकार ने वाइस एडमिरल (अवकाश प्राप्त) जी. अशोक कुमार को देश का पहला राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (First National Maritime Security Coordinator -NMSC) बनाया है. जी. अशोक कुमार (G. Ashok Kumar) की नियुक्ति को 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने के लगातार कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि करीब 14 साल पहले समुद्र के रास्ते आए आतंगवादियों ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर कहर बरपाया था. इस हमले के बाद सराकर ने लगातार समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने पर काम कर रही है.
अजीत डोभाल के अंदर करेंगे काम
वाइस एडमिरल जी. अशोक कुमार पिछले साल जुलाई में नौसेना के वाइस चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उन्होंने नौसेना में 39 से अधिक समय तक सेवा की है. वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल सचिवालय के समन्वय में काम करेंगे. 2021 के अंत में सरकार ने सुरक्षा मामले से संबंधित कैबिनेट समिति ने इस पद के सृजन संबंधी प्रस्ताव पारित किया था.
विभिन्न एजेंसियों के बीच बढ़ेगा समन्व्य
टीओआई (TOI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएमएससी (NMSC) समुद्री क्षेत्र में एकजुट नीतियों और योजनाओं को भी सुनिशिचत करेगा, जिसमें प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी शामिल है. साथ ही यह सेना और सीविल एजेंसियों के बीच इंटरफेस के तौर पर भी काम करेगा.
आपसी तालमेल की है कमी
लंबे समय से देश में यह महसूस किया जाता रहा है कि समुद्री गतिविधियों में शामिल असंख्य अधिकारी, विदेशी मामले, रक्षा, गृह और शिपिंग मंत्रालयों से लेकर नौसेना, तटरक्षक बल, सीमा शुल्क, खुफिया एजेंसियों, बंदरगाह अधिकारियों, राज्य सरकारों और समुद्री पुलिस बलों तक को आपसी तालमेल के साथ काम करने की आवश्यकता है.
पहले भी हुई है कोशिश
देश में 7,516 किलोमीटर लंबी तट रेखा है, जिसमें कई समुद्री और विशेष आर्थिक क्षेत्र शामिल है. इसके अलावा 90 फीसदी व्यापार समुद्र के रास्ते ही होता है. 26/11 के हमले के बाद एक समुद्री सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का का गठन किया गया था. इस बोर्ड ने खुफिया एजेंसियों सहित विभिन्न अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी को उजागर किया था. मगर राजनीतिक इच्छा-शक्ति और नौकरशाही की उदासीनता की वजह से यह कभी आगे नहीं बढ़ पाया. साल 2001 में भी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार की बात कही गई थी.




