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रोजगार अगर मुद्दा बन पाया तो शिवकुमार मिश्र की वजह है,जानिए एक साल पूर्ण होने पर लोगों की क्या रही प्रतिक्रियाएं

रोजगार अगर मुद्दा बन पाया तो शिवकुमार मिश्र की वजह है,जानिए एक साल पूर्ण होने पर लोगों की क्या रही प्रतिक्रियाएं
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अनुदेशक हों या शिक्षामित्र या फिर कोई भी संविदाकर्मी हो या बेरोजगार सबकी आवाज बनकर आएं शिव कुमार मिश्र

कहते हैं कि अगर कुछ करने की ठान लिया जाए तो कितनी भी झंझावातें आएं,परेशानियां आएं वह काम रुकना नहीं चाहिए और जब तक वह कार्य पूरा न हो जाए हार नहीं मानना चाहिए। कुछ इसी तरह के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं "स्पेशल कवरेज न्यूज़ के संपादक शिवकुमार मिश्र" देश के अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले शिवकुमार मिश्र आज के ही दिन 25 अक्टूबर 2021...

कहते हैं कि अगर कुछ करने की ठान लिया जाए तो कितनी भी झंझावातें आएं,परेशानियां आएं वह काम रुकना नहीं चाहिए और जब तक वह कार्य पूरा न हो जाए हार नहीं मानना चाहिए। कुछ इसी तरह के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं "स्पेशल कवरेज न्यूज़ के संपादक शिवकुमार मिश्र" देश के अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले शिवकुमार मिश्र आज के ही दिन 25 अक्टूबर 2021 को अपने यूट्यूब चैनल Special Covrage News पर शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाने को ठानी और एक साल होने पर भी उन मुद्दों से कभी किनारा नहीं किया,चाहे कोई त्यौहार पड़े या कोई व्यक्तिगत कार्यक्रम या फिर वे बीमार ही क्यों न हों। कभी भी अपने कर्त्तव्य मार्ग को छोड़े नहीं और लगातार पूरी निष्ठा और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते रहें। उत्तर प्रदेश के जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाने वाले अनुदेशकों के मुद्दे हों या शिक्षामित्र के मुद्दे या फिर ग्राम प्रहरी,आंगनबाड़ी, एंबुलेंसकर्मी, आशाबहू, असिस्टेंट प्रोफेसर, रोजगार सेवक, 69 हजार शिक्षक भर्ती, बीपीएड, विशिष्ट बीटीसी, पुरानी पेंशन के मुद्दे हो या कोई भी जनहित से जुड़ा मुद्दा रहा हो, उन मुद्दों को उठाने में शिवकुमार मिश्र कभी भी संकोच नहीं किए। इस लड़ाई में उनका हमेशा साथ दिए वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दूबे, सुनील कौशिक, अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, बीपीएड के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र पांडेय, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह,अरविंद सिंह, राजाराम त्रिपाठी और समय-समय पर डिबेट में उपस्थित हुए और भी कई पत्रकार और नेतागण।आज जहां देश की ज्यादातर मीडिया रोजगार के मुद्दों पर कोई भी बात करने से कतराती है , ऐसे समय में शिवकुमार मिश्र ने रोजगार को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाकर, सरकार को शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर ध्यान देने पर मजबूर कर दिया।

शिवकुमार मिश्र के प्रयासों से ही सपा ने अनुदेशकों,शिक्षामित्रों को स्थायीकरण की बात कही थी

शिवकुमार मिश्र की डिबेट की ही देन थी की 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में रोजगार एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना और प्रदेश की एक बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी ने अनुदेशकों और शिक्षामित्रों को नियमित करने की बात अपने घोषणापत्र में कही थी।

जानिए वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दूबे क्या कहते हैं

सुरेंद्र दूबे कहते हैं कि, अनुदेशक हों या शिक्षामित्र या कोई भी संविदाकर्मी या बेरोजगार हो जब तक हम उनको नियमित या रोजगार नहीं दिलवा देंगे इस लड़ाई को जारी रखेंगे और शिव कुमार मिश्र का इसी तरह से पूरी तन्मयता के साथ हमेशा साथ देते रहेंगे।

जानिए इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार सुनील कौशिक ने क्या कहा

सुनील कौशिक बधाई देते हुए कहते हैं कि, शिवकुमार मिश्र ने एक साल जो ये लड़ाई छेड़ी है उसमें उन्हें सफलता भी मिली है चाहे पंजाब में पेंशन बहाली का मामला हो या केंद्र सरकार द्वारा 75 हजार नौकरियां की बात हो। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि शिवकुमार मिश्र स्वस्थ्य रहें और इसी तरह बेरोजगारों , शोषित , पीड़ितों की आवाज हमेशा उठाते रहें।

जानिए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ एपी सिंह क्या कहते हैं

डॉ. एपी सिंह रोजगार के इस मुद्दे को एक वर्ष पूरा होने पर शिव कुमार मिश्र को बधाई देते हैं और कहते हैं कि आप जैसे निडर पत्रकार के वजह से ही यह अत्यंत गंभीर मुद्दा आज राजनीतिक मुद्दा बन पाया। आप हमेशा इसी निडर भाव से रोजगार के मुद्दों को उठाते रहें ईश्वर से मेरे यही प्रार्थना है।

जानिए प्रदेश अध्यक्ष अनुदेशक संघ विक्रम सिंह ने क्या कहा

अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि, जिस तरह से हम शोषितों की आवाज बनकर शिव कुमार मिश्र जी आए हैं वह हमारे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। आज आपकी ही देन है कि हमारा मानदेय 2 हजार रुपए बढ़कर हुआ है। हमको पूरा विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन में हम नियमित होंगे और हमको भी सभी सरकारी सुविधाएं मिलेंगी। ईश्वर आपको दीर्घायु बनाएं।

Satyapal Singh Kaushik
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