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INS Vagir: भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ आईएनएस वागीर, जानें कलवरी-क्लास पनडुब्बी की खास बातें

भारतीय नौसेना की शक्ति में और इजाफा हो गया है। भारतीय नौसेना में आज पांचवीं कलवारी श्रेणी की पनडुब्बी 'वागीर' शामिल हो गई है। इस मौके पर एक समारोह आयोजित किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर एडमिरल आर हरि कुमार शामिल हुए।

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INS Vagir: भारतीय नौसेना में आज पांचवीं कलवारी श्रेणी की पनडुब्बी 'वागीर' शामिल होने जा रही है। इस मौके पर एक समारोह आयोजित किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर एडमिरल आर हरि कुमार को बुलाया गया। यह पनडुब्बी पूरी तरह से स्वदेशी रूप से निर्मित किया गया है। इसका निर्माण मुबंई के मंझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है। कलवारी श्रेणी की चार पनडुब्बी को पहले ही नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा चुका है।

क्या है पनडुब्बी 'वागीर' की खासियत

स्वदेशी निर्मित आइएनएस वागीर 67 मीटर लंबी है और 21 मीटर ऊंची है। पनडुब्बी पानी के ऊपर 20 किलोमीटर प्रति घंटे और पानी के अंदर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। आईएनएस वागीर को समंदर के अंदर 350 मीटर की गहराई में तैनात किया जा सकता है। सबमरीन में 50 से ज्यादा सेलर और नौसेना के अधिकरी ऑपरेशन कर सकते हैं। साथ ही इसमें 16 टोरपेडोस, माइंस, मिसाइल लैस है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि दुश्मन की रडार को भी चकमा देने में माहिर है। ये नौसेना और देश की सभी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखती है। ये आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी पहल है।

अधिकारियों के मुताबिक, पुरानी वागीर पनडुब्बी ने नौसेना में अपनी सेवा तीन दशकों तक दी। जिसको 7 जनवरी 2001 को सेवा से मुक्ति प्रदान की गई। पुरानी वागीर से भी कई मिशन संचालित किए गए। जैसे कि गश्त और अलग तरीके के मिशनों को इससे संचालित किया जाता रहा है।

भारत में निर्मित स्वदेशी पनडुब्बी

भारत आत्मनिर्भर पहल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसका एक अच्छा उदाहरण आइएनएस वागीर है। मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने इसका निर्माण किया है। फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप ने इसमें भारतीय नौसेना की मदद की है। यह आइएनएस पनडुब्बी अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने में सक्षम है।

Special Coverage Desk Editor
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