Top
Begin typing your search...

किसान महासंघ के सयोजंक राजाराम त्रिपाठी ने नहीं मनाया आज अपना जन्मदिन, बोले ये बड़ी बात

छत्तीसगढ़ साग सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत के औषधि तथा सुगंधी पौधों के उत्पादक संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं भारतीय कृषक महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक है।

किसान महासंघ के सयोजंक राजाराम त्रिपाठी ने नहीं मनाया आज अपना जन्मदिन, बोले ये बड़ी बात
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

भारतीय किसान महासंघ के संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी का आज जन्मदिन है. उन्होंने आज अपना जन्मदिन नहीं मनाने के ऐलान किया. उन्होंने कहा कि जहां हमारे किसान आन्दोलन में शहीद हुए शहीदों की चिता अभी ठंडी भी नहीं हो पा रही है तो में अपना जन्मदिन कैसे मना लूँ. में अपने जन्मदिन के दिन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर आप सबकी शुभ कामनाओं को स्वीकार करता हूँ.

डॉ राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि आपकी अनमोल शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. आज मेरा जन्मदिन है,किंतु इस किसान आंदोलन में जान गंवा चुके अपने साठ से अधिक किसान भाइयों के शोक में मैं शामिल हूं, इसलिए अपना यह जन्मदिन समारोह हमने स्थगित कर दिया. पुनश्च, आपकी शुभकामनाओं के लिए दिल से धन्यवाद देता हूँ.

कौन है डॉ राजाराम त्रिपाठी

डॉ राजाराम त्रिपाठी के पिता का नाम श्री जगदीश प्रसाद त्रिपाठी घनघोर पिछड़े क्षेत्र आदिवासी गांव का हकदार में पैदा हुए पले बढ़े तथा वही कर अपना कर्म क्षेत्र बनाया। अर्थशास्त्र /हिंदी/ अंग्रेजी तथा इतिहास, सहित चार विषय में एम ए.एलएलबी एवं दो विषय पर डाक्टरेटकी उपाधि प्रदान की है। छत्तीसगढ़ साग सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत के औषधि तथा सुगंधी पौधों के उत्पादक संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं भारतीय कृषक महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक है।

संक्षिप्त परिचय: - डॉ राजाराम त्रिपाठी को हरित योद्धा , किसानों का मसीहा, हर्बल किंग आफ इंडिया, मूसली किंग,मूसली राजा, फादर ऑफ सफेद मूसली, कृषि रत्न, कृषि गौरव ,वृक्ष मित्र, देशरत्न , विद्वत भूषण, आदि कई उपाधियों से नवाजा जाता है ,मगर इनकी सबसे मजबूत छवि है यूथ आइकन की , दरअसल आज देश का उच्च शिक्षित युवा किसान इन्हें अपने 'रोल मॉडल' के रूप में देखता है। कितनी नौजवानों ने इनके पगचिह्नों पर चलते हुए उच्च पदों वाली नौकरियों को छोड़कर उच्च लाभदायक जैविक खेती-किसानी को अपनाया है, इन्हें अपना गुरु मानते हैं। इनकी "मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर"पर किसानो के लिए जैविक शेती औषधीय पौधों की खेती तथा उच्च लाभदायक बहु स्तरीय खेती के आए दिन प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, यहां यह भी उल्लेखनीय है कि, आज तक जितने भी प्रशिक्षण दिए हैं, वह सारे प्रशिक्षण निशुल्क हैैं, हां प्रशिक्षार्थियों को अपने आने जाने रुकने खाने का व्यय स्वंय उठाना होता है।

डॉ राजाराम त्रिपाठी छत्तीसगढ़ के अति पिछड़े बस्तर जिले के दरभा विकास खण्ड ( झीरम घाटी ) के आदिवासी गांव गलनार में पैदा हुए, तथा पले बढ़े । चार विषयों में स्नातकोत्तर तथा डॉक्टरेट जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की, विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर तथा बैंक के अधिकारी जैसे पदों से त्यागपत्र देकर बस्तर की आदिवासी महिलाओं, पुरुषों को अपने साथ जोड़ कर विलुप्त हो रही प्रजाति की वनौषधियों की जैविक खेती कोंडागांव बस्तर में प्रारंभ की तथा उसमें उत्कृष्ट गुणवत्ता के दम पर देश और विदेशों में बस्तर तथा छत्तीसगढ़ का एवं भारत का नाम ऊंचा किया। अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रतिष्ठित स्कॉटलैंड के 'अर्थ हीरो अवार्ड' सहित देश-विदेश के कई अवार्ड तथा सम्मान इन्हें मिल चुके हैं।

कार्य विवरण ( संक्षिप्त):-

'विगत 25 वर्षों से छत्तीसगढ़ बस्तर' के विभिन्न जिलों में 'आदिवासी महिलाओं व किशोरी बालिकाओं' को जैविक खेती का प्रशिक्षण, दुर्लभ वनौषधियों कीखेती का प्रशिक्षण ,हर्बल प्रसंस्करण , जैविक खाद तथा जैविक कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण, तथा,,"उलाबखे" यानि कि,' उच्च लाभदायक बहुस्तरीय खेती' पद्धति से खेती के जरिए आर्थिक व सामाजिक स्वावलंबन व सशक्तिकरण, आज तक 3.40 लाख पेड़ों का वृक्षारोपण व 70 से अधिक गांवों में निर्धूम चूल्हा तथा गोबर गैस स्थापना के द्वारा जैव विविधता तथा पर्यावरण संरक्षण , आदिवासी महिलाओं तथा बालिकाओं की कुपोषण से मुक्ति हेतु संतुलित आहार तथा उच्च पोषण हेतु स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक अनाज फल तथा सब्जियां के उपयोग हेतु जन जागरण, व्यवहारिक प्रशिक्षण।

लगातार तीन दशकों तक शोध करके,सफेद मूसली MDB13'14, स्टीविया MDS 13,14 ,16, काली मिर्च MDBP 13'14,16 ऑस्ट्रेलियन टीक MDAT 16 आदि की ऐसी नई प्रजातियां तैयार की जो कि, अति विषम जलवायु वाले क्षेत्रों को छोड़कर लगभग पूरे भारत में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं ‌। रोग प्रतिरोधी, तथा अधिक उत्पादन देने वाली इन प्रजातियों ने इन फसलों तथा इनके किसानों की तस्वीर बदल दी है।

विगत 25 पच्चीस सालों से बहुविध अहर्निश सेवारत,

1996 में मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा 'संपदा समाज सेवी संस्थान' की स्थापना की। संपदा पूरी तरह से आदिवासी महिलाओं की संस्था है तथा आदिवासी महिलाओं के द्वारा ही संचालित है, इसका 2002 में पंजीयन कराया गया। बूढ़े गाय बैलों के लिए यह संस्था एक सावित्री गौशाला भी चलाती है तथा यह गौशाला शत प्रतिशत महिलाओं के द्वारा ही संचालित है।

यह भी उल्लेखनीय है कि,"संपदा समाज सेवी संस्थान" तथा 'संपदा -गौशाला' के द्वारा आज तक किसी भी राज्य सरकार ,केंद्र सरकार व्यक्ति अथवा संस्था, देश अथवा विदेश से कोई भी दान अथवा अनुदान नहीं लिया गया है ।यह संस्था पूरी तरह से अपने सामूहिक प्रयासों व उपलब्ध सीमित संसाधनों के द्वारा ही संचालित की जा रही है।

website mdhherbals.com

देश के हर्बल पौधों की खेती तथा जैविक खेती करने वाले किसानों को देश तथा विदेशों में उचित बाजार दिलाने के लिए सेंट्रल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया चैम्फ ( www.chamf.otg ) संस्था का गठन किया। इसे 2005 में कृषि मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा जैविक किसानों के राष्ट्रीय संगठन की मान्यता दी गई है।

*वर्जन-BOLD

राजाराम त्रिपाठी जैविक खेती करके काफी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। मैं जनजातियों के विकास के लिए काम करने का इच्छुक हूं। मैंने उनसे कहा कि कि वह क्षेत्र के आदिवासियों को इससे जोड़कर इसकी ट्रेनिंग दें। रिटायरमेंट के बाद मैं भी उनके साथ जुड़कर इस खेती को करूंगा और आदिवासियों को ट्रेंड करने का काम करूंगा।

- केसी घुमरिया, प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशासनिक एवं करदाता सेवाएं) भारत सरकार

Shiv Kumar Mishra
Next Story
Share it