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अब तक छह बार बदला जा चुका है राष्ट्रीय ध्वज,आइए जानते हैं आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद तक का सफर

Satyapal Singh Kaushik
14 Aug 2022 5:00 PM IST
अब तक छह बार बदला जा चुका है राष्ट्रीय ध्वज,आइए जानते हैं आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद तक का सफर
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1906 से लेकर 1947 तक कुल छह बार बदला जा चुका है राष्ट्रीय ध्वज।

15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर बीते एक साल यानी 15 अगस्त, 2021 से ही पूरे हिंदुस्तान में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के तहत हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव, शहर-शहर लोगों से अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने की अपील की गई है। लेकिन इस तिरंगे के पीछे की कहानी बहुत लंबी है। बीते 116 साल में छह बार देश का झंडा बदला गया है। हालांकि, ये बदलाव आजादी मिलने तक ही हुए। इसलिए, आजादी की वर्षगांठ पर देशवासियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज की इस यात्रा में क्या-क्या अहम पड़ाव रहे और कब-कब, क्या-क्या बदलाव हुए। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में आखिरी बदलाव 1947 में हुआ था, उस वक्त इसे तिरंगे का नाम भी दिया गया। आइए जानते हैं तिरंगे तक का सफर ।

1906 में पहला ध्वज

सबसे पहले तिरंगे को 7 अगस्त, 1906 को कलकत्ता पारसी बागान स्क्वेयर में फहराया गया था. इस झंडे में तीन रंग की पट्टियां थी. जिनमें बीच की पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था. इस बीच में सफेद की बजाए पीली पट्टी थी. वहीं नीचे की पट्टी लाल थी जिस पर अर्ध चंद्र और सूरज बना था. इसके अलावा सबसे ऊपरी हरी पट्टी पर कमल का फूल अंकित था।

1907 मे दूसरा ध्वज

यह भी पहले झंडे से काफी कुछ मिलता जुलता था। इसमें बीच की पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था. इसमें ऊपरी पट्टी पर कमल के फूल की बजाए सात तारे छपे थे, जो कि सप्तर्षि का तारामंडल का प्रतीक थे. इसे 1907 में मैडम कामा ने फहराया था. साथ ही इसे बर्लिन में आयोजित एक सभा में भी भारत के झंडे के रूप में फहराया गया।

1917 का तीसरा ध्वज

इसके बाद तीसरी बार भारत का झंडा सामने आया नए रूप में होम रूल आंदोलन के दौरान. 1917 में इस झंडे को होम एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था. इस झंडे में पांच लाल और चार हरी पट्टियां थीं. इन पर सात तारे अंकित थे इसके बाएं कोने में ऊपरी ओर ब्रिटेन का आधिकारिक झंडा भी छपा था।

1921 का चौथा ध्वज

1921 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की एक बैठक में आयोजित एक युवा ने गांधी जी को यह झंडा दिया. यह तीन रंग की पट्टियों से बना था और इस पर नीले रंग में चरखा अंकित था. इसके तीन रंगों सफेद रंग सबसे ऊपर, उसके नीचे हरा रंग और सबसे नीचे लाल रंग था।

1931 का पांचवा ध्वज

साल 1931 तिरंगे की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस दौरान एक रेज्योल्यूशन पास कर तिरंगे को आधिकारिक तौर पर भारत के ध्वज के रूप में अपनाया गया. इस ध्वज में सफेद पट्टी बीच में थी और इस पर गांधी जी का चरखा अंकित था।

1947 का वर्तमान ध्वज

भारत के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज की कल्पना पिंगली वेंकैयानंद ने की थी. तिरंगे को इस रूप में पहली बार भारतीय संविधान सभा की 22 जुलाई को आयोजित बैठक में अपनाया गया था. जिसके बाद 26 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रध्वज के रूप में अपनाया गया।

जानिए वर्तमान ध्वज का इतिहास

भारत का राष्ट्रीय ध्वज जिसे आज 'तिरंगा' भी कहा जाता है कि कहानी भी बड़ी रोचक है. तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है. इसकी कल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी. इसे 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था. इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है. ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 3:2 है. सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है जिसमें 24 आरे होते हैं. इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है व रूप सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह होता है. भारतीय राष्ट्रध्वज अपने आप में ही भारत की नीति को दर्शाता हुआ दिखाई देता है. आत्मरक्षा, शांति, समृद्धि और सदैव विकास की ओर अग्रसर।

Satyapal Singh Kaushik

Satyapal Singh Kaushik

न्यूज लेखन, कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट और आर्टिकल लेखन में लंबा अनुभव है। दैनिक जागरण, अवधनामा, तरुणमित्र जैसे देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित होते रहते हैं। वर्तमान में Special Coverage News में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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