
जब सात फेरे लेने सात समंदर पार से रांची आई US की क्लोडिया, पढ़ें कैसे चढ़ा दोनों का प्यार परवान

रांची. रिश्ता जब दिल का हो और आंखों में प्यार को पाने के लिए हर हद से गुजरने जुनून तैरता हो तो परदेश के सरहद की दीवारें बौनी हो जाती हैं. इश्क और प्यार के जुनून का ऐसा ही किस्सा है रांची के तुषार और यू.एस की क्लोडिया का. इन दोनों का इश्क़ इस कदर परवान चढ़ा कि क्लोडिया सात फेरे लेने सात समंदर पार कर झारखंड के रांची आ गई. रांची में हिन्दू रीति रिवाज के साथ ब्याह कर अपने प्रेमी तुषार की हो गई. इस प्यार को न भाषा की दीवार रोक पाई न सरहदों की बंदिशें. क्लेडिया बामुश्किल हिंदी बोल या समझ पाती हैं पर उसने शादी के हर विधान को पूरे उत्साह के साथ पूरा किया. दरअसल रांची का रहने वाला तुषार अपनी पढ़ाई करने यू एस गए थे. जहां उसकी मुलाक़ात क्लोडिया से हुई. पढ़ाई के दौरान तुषार की नजदीकियां क्लेडिया से हुई.
क्लेडिया ने तुषार से भारत की संस्कृति और तीज-त्योहार के बारे में जाना. उसे यहां कि संस्कृति काफी लुभाती है. दोनों घंटों भारतीय संस्कृति पर बातें करते. इन्हीं बातों के बीच इनका प्रेम भी गहराता गया. इसी दौरान तुषार कलोडिया के परिवार के भी नजदीक आया. तुषार अक्सर छठ और अन्य पर्व त्योहारों मे अपनी माँ से वीडियो कॉलिंग के जरिये बाते करता था. इसी दौरान छठ और अन्य पर्व त्योहारो को भी कलोडिया और उसके परिवार ने नजदीक से देखा. वे यूएस में रहकर भी भारतीय संस्कृति में रचने बसने लगे. मौका देखकर क्लोडिया ने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया.
दोनों ने अपने प्यार को मुक्कमल बनाने के लिए शादी करना चाहते थे. तुषार को लगता कि पता नहीं उसके घर वाले विदेशी युवती को बहू बनाना पसंद करेंगे या नहीं. जब उसने अपने घर में इस प्यार की बात बताई तो उसके माता-पिता ने इसका समर्थन किया पर शर्त यह रखी की शादी भारतीय रीति के साथ रांची में ही होगी. उधर क्लोडिया और उसके माता-पिता भी इस बात के लिए तैयार हो गए. फिर आपने माता -पिता और परिजनों के साथ क्लोडिया यूएस से रांची आई। 25 जनवरी को यहां हिंदू विधान के साथ धूम -धाम से दोनों की शादी हुई. इस शादी में क्लोडिया के माता-पिता ने भारतीय पोशाक पहना.
पिता ने जहां कुर्ता पहना वहीं मां ने साड़ी पहन कर अपनी बेटी की शादी की रस्में निभाई. संगीत और मेहंदी जैसे कार्यक्रम में भी दोनों खुब उत्साहित नजर आए. तुषार के पिता विनोद ओझा जो रांची के वरिष्ठ पत्रकार है और माँ प्रतिभा कुमारी एक सरकारी स्कूल मे शिक्षिका हैं. विदेशी बहु से परिवार के लोग काफी खुश हैंं. तुषार के पिता विनोद ओझा कहते हैं कि हमारी खुशी बच्चों की खुशी में हैं. बदलते दौर में शादी को जबरन बच्चों पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उनकी मर्जी का ख्याल जरूरी है. आखिर साथ जिंदगी तो उन्हें ही जीनी है। तुषार की मां भी अपनी बहू से काफी खुश हैं.




