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लाइफ स्टाइल
जन्मदिन विशेष: बॉलीवुड के दिग्गज गायक मुकेश की दिलचस्प बातें
Special Coverage News
22 July 2016 5:14 PM IST

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सुरीली आवाज़ और खूबसूरत नगमों के सरताज मुकेश की आवाज़ की दीवानगी आज भी कम नही हुई है। मुकेश का जन्म 22 जुलाई, 1923 को दिल्ली में हुआ था। पाश्र्व गायक मुकेश की 93वीं जयंती पर उनके सम्मान में सर्च इंजन गूगल ने विशेष डूडल बनाकर उन्हें याद किया है।
मुकेश के पिता जोरावर चंद्र माथुर इंजिनियर थे। मुकेश उनके 10 बच्चों में छठे नंबर पर थे। उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई कर के बाद पीडब्लूडी में नौकरी शुरू की थी। कुछ ही साल बाद किस्मत उन्हें मायानगरी मुंबई ले गई। मुकेश को कुंदन लाल सहगल के गीत पसंद थे जो वो अपने सहपाठियों के बीच सुनाया करते थे और उन्हें अपने स्वरों से सराबोर किया करते थे, लेकिन वह मधुर स्वर के रूप में एक अनूठा तोहफा लेकर पैदा हुए थे। उनका स्वर महज सहपाठियों या नुक्कड़ सभाओं के बीच गाने भर के लिए नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों लोगों के दिल और होंठों पर बस जाने के लिए था।
मुकेश के एक दूर के रिश्तेदार मोतीलाल ने उनकी की आवाज की खूबी को तब पहचाना, जब उन्होंने उन्हें अपनी बहन की शादी में गाते हुए सुना। मोतीलाल उन्हें मुंबई ले गए और अपने घर में साथ रखा। मुकेश ने अपना सफर 1941 में शुरू हुआ। फिल्म 'निर्दोष' में मुकेश ने अदाकारी करने के साथ-साथ गाने भी खुद गाए। इसके अलावा, उन्होंने 'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' में भी बतौर ऐक्टर काम किया। उन्होंने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था। इसमें कोई शक नहीं कि मुकेश सुरीली आवाज के मालिक थे और यही वजह है कि उनके चाहने वाले सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के संगीत प्रेमी थे। फिल्म-उद्योग में उनका शुरुआती दौर मुश्किलों भरा था। लेकिन एक दिन उनकी आवाज का जादू के.एल. सहगल पर चल गया। मुकेश का गाना सुनकर सहगल भी अचंभे में पड़ गए थे।
मुकेश को एक गुजराती लड़की सरल भा गई थी। वह उसी से शादी करना चाहते थे, लेकिन दोनों परिवार में इसका विरोध हुआ। उन्होंने दोनों परिवारों के तमाम बंधनों की परवाह न करते हुए ठीक अपने जन्मदिन के दिन 22 जुलाई 1946 को सरल के साथ शादी के अटूट बंधन में बंध गए। मुकेश के एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटे का नाम नितिन और बेटियां रीटा व नलिनी हैं। बड़ा होने पर नितिन अपने नाम में पिता का नाम जोड़कर नितिन मुकेश हो गए। उन्होंने पिता की तरह कई फिल्मों के लिए गाया भी। उनके बेटे यानी मुकेश के पोते नील के नाम में पिता और दादा, दानों के नाम जुड़े हैं, लेकिन नील नितिन मुकेश गाना नहीं गाते, वह आज बॉलिवुड के चर्चित ऐक्टर हैं।
मुकेश का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय वह गा रहे थे, 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल'। सचमुच, दुनिया से ओझल हो चुके मुकेश के गाए बोल जग में आज भी गूंज रहे हैं और हमेशा गूंजते रहेंगे।
40 के दशक में मुकेश के पार्श्व गायन का अपना अनोखा तरीका था। उस दौर में मुकेश की आवाज में सबसे ज्यादा गीत दिलीप कुमार पर फिल्माए गए। वहीं 50 के दशक में मुकेश को शोमैन 'राज कपूर की आवाज' कहा जाने लगा। मुकेश ने 200 से ज्यादा फिल्मों को अपनी आवाज दी। उन्होंने हर तरीके के गाने गाए, लेकिन उन्हें दर्द भरे गीतों से अधिक पहचान मिली, क्योंकि दिल से गाए हुए गीत लोगों के जेहन में ऐसे उतरे कि लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। 'दर्द का बादशाह' कहे जाने वाले मुकेश ने 'अगर जिंदा हूं मैं इस तरह से', 'ये मेरा दीवानापन है', 'ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना', 'दोस्त दोस्त न रहा' जैसे कई गीतों को अपनी आवाज दी। मुकेश फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले पहले पुरुष गायक थे। उन्हें फिल्म 'अनाड़ी' से 'सब कुछ सीखा हमने', 1970 में फिल्म 'पहचान' से 'सबसे बड़ा नादान वही है', 1972 में 'बेइमान' से 'जय बोलो बेइमान की जय बोलो' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। फिल्म 1974 में 'रजनीगंधा' से 'कई बार यूं भी देखा है' के लिए नैशनल पुरस्कार, 1976 में 'कभी कभी' से 'कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया है।
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