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अगर ये ब्राह्मण डीएम यहां से भागा नहीं तो कुलदीप उज्ज्वल नाम बदल देना

Special Coverage News
7 Jun 2016 12:26 PM IST
अगर ये ब्राह्मण डीएम यहां से भागा नहीं तो कुलदीप उज्ज्वल नाम बदल देना
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उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मध निषेद परिषद के चेयरमैन कुलदीप उज्जवल द्वारा बागपत जिले के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को फोन पर धमकाने का मामला सामने आया है. कुलदीप ने डीपीआरओ से कहा कि तुमने 'मेरा असली रूप नहीं देखा है मैं तांडव मचा दूंगा. उन्होंने इस दौरान अपना आपा खोते हुए यह भी कहा कि मैं 'डीपीआरओ, सीडीओ व डीएम को नौकरी करना सिखा दूंगा'.

बताया जा रहा है कि कुलदीप एक सपा नेता है और उन्हें एक राज्य मंत्री का दर्जा भी प्राप्त है. इस वार उन्हें बागपत से सपा प्रत्याशी भी बनाया गया है. वो अपने अनुसार सचिव के नियुक्त नहीं होने से नाराज हो गए थे. इसलिए उन्होंने डीपीआरओ को फ़ोन पर काफी सारे अपशब्द कहा दिया.

इस बात का खुलासा डीपीआरओ द्वारा सौंपी गई कॉल रिकार्डिग की सीडी से हुई है. जिसमे सपा नेता ने जो भी बातें बोली है वह सबके सामने आ गई है. इनके फ़ोन के कॉल की रेकॉर्डिंग इस प्रकार है. सबसे पहले राज्य मंत्री कुलदीप उज्जवल द्वारा डीपीआरओ को फोन किया गया.

कुलदीप उज्जवल : हेलो

डीपीआरओ : जी मंत्री जी

कुलदीप उज्जवल : क्या बात? फोन क्यों काट दिया?

डीपीआरओ : काटा नहीं था। आपने काट दिया था.

कुलदीप उज्ज्वल : ऐसा है डीपीआरओ साहब. मेरा असली रूप नहीं देखा अब तक. ये जो आपका डीएम है न ये सारी जिंदगी नौकरी करके अब उमर के लास्ट पड़ाव पर डीएम बना है. मैं सोमवार को आ रहा हूं कलक्ट्रेट में. मैं स्टूडेंट लीडर रहा हूं. प्रेसीडेंट रहा हूं. मैं, तुम्हारी, सीडीओ व डीएम तीनों की असलियत बताऊंगा कि तुम कर क्या रहे हो? मेरे पास तुम लोगों का कच्चा चिट्ठा है. मैं समाजवादी पार्टी का कैंडिडेट हूं. मैंने दो लोगों के लिए कहा है केवल. एक मेरे गांव का है और एक के लिए न्याय पंचायत के छह के छह प्रधानों ने मांग की है.


डीपीआरओ : सर मेरे बस का होता तो कब का कर देते….

कुलदीप उज्ज्वल : अब देखना, ये जो तिवारी है ना डीएम, बता देना कि ये कैसे यमुना का रेत उठवाता है. मेरे पास सबका कच्चा चिट्ठा है. मेरे पास रजिस्टर है. एक आदमी नहीं बच रहा है, जिसका नाम न हो… देखना क्या तांडव मचाता हूं. कुलदीप उज्ज्वल एक ईमानदारी, एक सच्चाई का नाम है। जो दलाली नहीं करता जो पैसे नहीं लेता. अगर ये ब्राह्मण यहां से भाग नहीं गया तो कुलदीप उज्ज्वल नाम बदल देना. काफी देर बात के बाद.. शर्म नहीं आई. इसको बताता हूं ये क्या करेगा? इसकी औकात बताता हूं.


कुलदीप उज्ज्वल ने दी सफाई
जबकि मीडिया में इस ख़बर के उजागर होने के बाद कुलदीप ने यह सफाई दी है कि 'मेरी डीपीआरओ से जो बात हुई वह जनता का गुस्सा था. मैं व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जनहित के लिए यानी गांवों की कार्ययोजना बनाने के संबंध में पंचायत सचिव नियुक्त करने की बात कह रहा था और छह माह से कोई काम नहीं हो रहा है, इसमें पंचायत सचिव, डीपीआरओ लापरवाही कर रहे हैं. मैंने कोई गाली नहीं दी और न ही कोई धमकी दी.'
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