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एक साथ जलीं 24 चिताएं, गांव में पसरा मातमी माहौल

Kamlesh Kapar
8 Jun 2017 4:23 PM IST
एक साथ जलीं 24 चिताएं, गांव में पसरा मातमी माहौल
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first time 24 bodies burns together
बालाघाट: दो दिन पहले तक बालाघाट के जिस खैरी गांव में रौनक और चहल-पहल थी, गुरुवार को वहां मातम पसरा हुआ था। बुधवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद गुरुवार को एक साथ 24 लोगों की शव यात्रा निकाली गई। जिसमें गांव की महिलाओं सहित हर शख्स शामिल हुआ। इस दौरान गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। यह मंजर देखकर गांव का हर शख्स रो पड़ा।

उधर, श्रमिकों की शव यात्रा में मप्र के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, सांसद बोध सिंह भगत, कलेक्टर भरत यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। मंत्री बिसेन ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। बुधवार को बालाघाट से 8 किमी दूर गांव खैरी में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके से 22 लोग जिंदा जल गए। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को नागपुर, जबकि आठ अन्य को बालाघाट के अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। घायलों में से तीन ने गुरुवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वालों की संख्या 25 हो गई हैं।

गुरुवार को हीरापुर में एक साथ 24 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। हादसे के वक्त फैक्ट्री में 47 मजदूर काम कर रहे थे। प्रशासन ने शाम तक 22 मौतों की पुष्टि की है। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि मृतक संख्या और बढ़ सकती है। उधर, जिला प्रशासन ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रु. की राहत राशि देने की घोषणा की है।

पुलिस के अनुसार, लाइसेंस लेकर एक झोपड़ीनुमा परिसर में चल रही फैक्ट्री में बुधवार दोपहर करीब तीन बजे धमाका हुआ। यह इतना जोरदार था कि दो किमी दूर तक आवाज सुनाई दी। सूचना पर कलेक्टर भरत यादव और एसपी अमित सांघी भी मौके पर पहुंचे। इससे पहले वर्ष 2015 में भी जिले के किरनापुर में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी।

ग्रामीणों ने बताया कि धमाके के बाद शव आसपास के 500 मीटर के क्षेत्र में बिखर गए। हालात इतने भयावह थे कि शवों की पहचान भी मुश्किल हो रही थी। फैक्ट्री में अधिकतर महिलाएं ही काम कर रही थीं। मौके के हालात देखकर ग्रामीण बदहवास से हो गए। दमकल वाहन और पुलिस बल के साथ ग्रामीणों ने मिलकर आग को काबू किया इसके बाद शवों को निकाला। शव के अंग भंग हो जाने से मृतकों की सही संख्या का पता देर रात तक नहीं चल सका है। वहीं प्रशासन फैक्ट्री में काम करने वालों के नाम पता करने में जुटा रहा।

झोपड़ी में चलाई जा रही इस फैक्ट्री में हादसे के वक्त 47 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। हादसे से फैक्ट्री के परखच्चे उड़ गए। फैक्ट्री के संचालक को केवल 100 क्विंटल बारूद रखने और पटाखा बनाने की अनुमति थी। लेकिन बिना पुख्ता इंतजाम के संचालित हो रही यह फैक्ट्री इतने बड़े हादसे का कारण बन गई। फैक्ट्री का मालिक रज्जू वारिस फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।
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