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पत्रकारों की हत्या नही होती लोकतंत्र की हत्या होती है!
शिव कुमार मिश्र
1 Jun 2017 12:15 PM IST

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पत्रकारों की हत्या और मारपीट आम बात
आज एक पत्रकार भाई की हत्या नीमच जिले में हो गयी है वे नई दुनिया में कार्यरत थे , उनकी हत्या के पीछे कारण क्या थे ये तो अभी तक पता नही चला है परंतु ये तय है कि इसके पीछे कोई न कोई ऐसा शख्स होगा जो कि उनकी खबरों से आहत होगा या उनका लिखना उसे रास नही आ रहा होगा , ये आजकल बहुत आम हो गया है पत्रकार ने कोई भी खबर लिखी तुरंत धमकी आ जाती है , मुझे भी शहर के नामचीन नेता ने धमकी दी हुई है परंतु में परवाह नही करता और भी ज्यादा मुखर होकर लिखता हूं
आजकल ये फैशन हो गया है कि पत्रकार को धमकी दे दो न माने तो हाथ पैर तोड़ दो या फिर हत्या ही कर दो ,एक पत्रकार क्या जो खुलासे करता है क्या वो उसके अपने हित के होते है क्या वो जनता की आवाज नही होती फिर एक पत्रकार के खिलाफ जुल्म पर जनता की छोड़ो सारे पत्रकारों की ही आवाज नही आती क्योंकि आजकल निष्पक्ष पत्रकारिता रह ही नही गयी है कोई न कोई आका किसी का होता ही है और स्वार्थवश पत्रकार ही पत्रकार का दुश्मन हो जाता है ये अच्छी बात नही है जो पत्रकार दूसरे के घर मे आग लगी देख कर अपनी रोटी सेंकते है उनके घरों में जल्दी ही आग लगती है
ऐसा नही है कि सारे पत्रकार या संगठन ऐसे ही है जयपुर पिंक सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष लल्लू लाल शर्मा जैसे लोग भी है जो पत्रकारों के लिए लड़ते है और अभी हाल ही में जो जयपुर में पत्रकारों के साथ बदसलूकी हुई थी उसमें इनके नेतृत्व में काफी अच्छा कार्य हुआ और आरोपियो ने बाकायदा अखबारों में विज्ञापन देकर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की , ऐसा पत्रकार नेता सभी जगह हो तो शायद किसी पत्रकार की हत्या तो बहुत दूर की बात धमकी भी देने की हिम्मत किसी की न हो
एक पत्रकार को धमकी नही मिलती बल्कि वो एक लोकतंत्र को धमकी मिलती है , एक पत्रकार की हत्या नही होती बल्कि ये पूरे लोकतंत्र की हत्या होती है सरकार को इस पर बहुत सख्त कदम उठाने चाहिए और पत्रकार सुरक्षा कानून को शीघ्र ही पारित करना चाहिए ताकि कोई भी किसी भी पत्रकार को कुछ कहने से पहले सौ बार नही हजार बार सोचे
विनीत जैन
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