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Will there ever be a "bread day" in the country?
योग करना सेहत के लिए अच्छा है, इससे कोई इनकार कर ही नही सकता। लेकिन केवल एक दिन योग के नाम पर पांखण्ड और महिमामंडन करना उचित है ? जब सेहत का ध्यान ही रखना है तो केवल एक दिन ही क्यो ? क्या एक दिन योग दिवस के नाम पर पूरे देश मे तमाशा करने से सेहत सुधर जाएगी ? क्या एक दिन के लिए मदर्स डे मनाने से माँ का कर्ज चुक जाएगा ?
मुझे योग से ना तो कोई उज्र है और ना ही मैं इसकी मुखालफत करना चाहता हूँ। मुझे गुरेज है तो केवल योग के नाम पर नौटंकी करने से।
योग की नौटकी के नाम पर अरबो रुपये व्यय करना व्यवहारिक है? शायद कदापि नही। योग, आस्था, आचरण, आदत आदि स्व स्फूर्त है। इसे किसी पर थोपना कदापि उचित नही है। योग के नाम पर अफसर, मंत्रियों, सांसदों, विधयकों, स्कूली बच्चों की भीड़ जुटाना, पांखण्ड के अतिरिक्त कुछ नही है। जिस तरह व्यक्ति को पेट भरने के लिए रोज सुबह-शाम रोटी की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह सेहत के लिए योग रोज करना आवश्यक है। मैं यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हूँ कि एक दिन "रोटी दिवस" मनाने से साल भर की भूख का खात्मा हो जाएगा ? मैं देश के तमाम बुद्धिजीवियों से यह जानने को बेताब हूँ कि क्या बगैर सिलेंडर के चूल्हा जल जाएगा ? या यूं कहूँ कि बगैर गैस सिलेंडर के चूल्हे की कोई उपयोगिता है ? देश मे 50 फीसदी लोगो का पेट रोटी के अभाव में खाली है। उनके लिए योग की कोई उपादेयता है ?
अगर सरकार वास्तव में ही लोगों की सेहत के लिए फिक्रमंद है तो उसे सबसे पहले सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाली शराब, तम्बाकू, सिगरेट आदि पर पाबंदी लगानी चाहिए । सरकार जब पॉलीथिन आदि पर पाबंदी लगा सकती है तो तम्बाकू, गुटखा, सिगरेट, शराब आदि से गुरेज क्यो ? जब बिहार और गुजरात मे शराब पर पाबंदी लगाई जा सकती है तो समूचे देश मे क्यो नही ? क्या गुजरात और बिहार देश से परे है ? या सरकार केवल इन दो प्रदेशो की सेहत के लिए ही फिक्रमंद है ।
इसका तर्क यह दिया जा सकता है कि सरकार को चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है। मैं इस तर्क से पूर्णतया सहमत हूँ। अगर यह तर्क है तो इसका जवाब यह भी है कि सरकार फिर चकले, हेरोइन, जुआ, सट्टा, लाटरी आदि का लाइसेंस क्यो नही जारी करती ? बहुत हो चुका तमाशा। अब इस खेल को बंद कर देश के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।
बाबा रामदेव ने तीन लाख लोगों को एक साथ योग का प्रशिक्षण देकर अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करवा लिया। पूरे देश मे करीब एक करोड़ से ज्यादा लोगो द्वारा योग दिवस पर योग करने की खबर है। लोग वास्तव में ही योग के प्रति इतने ही समर्पित है तो प्रत्येक व्यक्ति 100 रुपये प्रधानमंत्री कोष में जमा करवाता तो सौ करोड़ रुपये तो एकत्रित हो ही जाते। इन रुपयों से घिसिया, धन्ना, रामेशर, बिरजू जैसे अनेक किसानों को आत्महत्या करने के लिए विवश नही होना पड़ता। बाबा रामदेव का मुनाफा प्रतिवर्ष 400 करोड़ से ज्यादा है। यदि उनको लोगो की इतनी ही चिंता है तो वे एक साल का मुनाफा सरकारी खजाने में जमा करवाके देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते थे। लेकिन जो व्यक्ति योग के नाम पर देश के लोगो का दोहन कर रहा हो, वह एक दमड़ी भी देने को राजी नही है । बल्कि उसेऔर ज्यादा माल सकेरने की भूख है।

लेखक महेश झालानी पत्रकार
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