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कोर्ट के निर्णय से हुई कट्टरपंथियों की हार, तीन तलाक में देश की समस्याओं का हल खोज रही मोदी सरकार !
Arun Mishra
27 Aug 2017 5:27 PM IST

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हमारे देश की राजनीती में एक समय ऐसा था जब बहुत शालीनता हुआ करती थी। परस्पर वैचारिक असमानता वाले नेताओं को भी सत्ता पक्ष द्वारा भरपूर सम्मान दिया जाता था..
हमारे देश की राजनीती में एक समय ऐसा था जब बहुत शालीनता हुआ करती थी। परस्पर वैचारिक असमानता वाले नेताओ को भी सत्ता पक्ष द्वारा भरपूर सम्मान दिया जाता था। इस प्रकार की शालीनता की राजनीती का समय नेहरु, इंदिरा गाँधी से शुरू होकर अटल बिहारी वाजपेयी के समय तक जारी रहा। संसद और संसद के बाहर सभी नेताओ में शालीनता पाई जाती थी। अटल बिहारी वाजपेयी के समय तक राजनीती के सभी नेता स्वस्थ मूल्यों की राजनीती करने के लिए जाने जाते थे।
देश की वर्तमान राजनीती के सियासी पटल पर अब ऐसे नेता शासन कर रहे है, जो देश की समस्याओं का समाधान करके देश की जनता को राहत देने के बजाय देश की जनता को प्रतीकात्मक मुद्दों में उलझाकर उसका ध्यान वास्तविक समस्याओं से भटका रहे है। वर्तमान केंद्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार अपने शासन के चार वर्ष पूर्ण करने जा रही है लेकिन देश की जनता की समस्याओं के निदान के बजाय यह सरकार जनता की समस्याओं से भाग रही है। केंद्र की मोदी सरकार का रुख जनता की समस्याओं के समाधान करने वाला नही है।
यह सरकार देश की जनता को भावनात्मक रूप से देश, धर्म, गाय भक्ति, कश्मीरी आतंक व मुस्लिम विरोध के नाम पर उलझाकर, महंगाई, बेरोजगारी, बाढ़ के विकराल रूप से देश की जनता का ध्यान हटा रही है। केंद्र की सरकार देश की मीडिया के माध्यम से तीन तलाक की बहस में जनता को उलझाकर जनता के मूल मुद्दों से भाग रही है। देश में आज जिस प्रकार से भाजपा की केंद्र सरकार में बैठे मंत्री व राज्यो के भाजपाई मुख्यमंत्रीयों की सरकार चलाने में अक्षमता उजागर हो रही है शायद देश में ऐसा पहले कम ही होता रहा है।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेल व उसमे बैठकर सफ़र करने वाले देश वासियों को प्रभु कृपा के हवाले कर दिया है। एक ही समप्ताह में दो दो बड़ी रेल दुर्घटनाए घटित हो जाती है, जिनमे तकनीकी कर्मचारियों की घोर लापरवाही सामने आती है। देश के विभिन्न राज्यों में बाढ़ की त्रासदी विकराल रूप धारण कर चूकी है। अकेले बिहार राज्य में बाढ़ से मरने वालो की संख्या चार शतक पूर्ण कर चूकी है। हरियाणा राज्य की खट्टर सरकार खटारा बस की भाँती बिना गंतव्य के हिचकोले खा रही है। राज्य की कानून व्यवस्था खटारा बस की भाँती जैसे तैसे चल रही है। बडबोले प्रधानमंत्री और नितीश कुमार सुशासन बाबु का बाढ़ प्रबंध बिहार राज्य में पूर्ण रूप से फेल हो गया है। बाढ़ से बेघर हुए लोगो की संख्या आसाम, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान राज्यों में बढती जा रही है। उसके अनुपात में बाढ़ राहत राशि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
राज्य सभा के चुनाव में गुजरात राज्य के कांग्रेसी विधायको को खरीदने के लिए भाजपा के पास हजार करोड़ रूपये है, परन्तु उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के अस्पताल में भर्ती बच्चो की जिन्दगी को बचाने के लिए जीवनदायी ऑक्सिजन खरीदने को पेसे नही है। भाजपा सरकार के प्रधानमंत्री का सरकार चलाने का एक ही उद्देश्य है कैसे भी सरकारी तोते सी. बी. आई, आयकर विभाग, ई.डी. सभी को देश के विपक्षी दलों के नेताओ के पीछे लगा दो। विपक्ष को डराओ, मीडिया को धमकाओ फिर टुकड़े डालकर उन्हें पालतू बनाओ। देश प्रदेश की जनता ऑक्सिजन के अभाव् में मरे बाढ़ की विभीषिका से मरे, जिसे आना है उसे जाना ही है यही प्रभु इच्छा है। इस कारण धर्म, देश भक्त, प्रभु के अनुयायी कलियुगी राम भक्त कब और क्यों अकाल मोत मरने वाले देशवासियों के जीवन को बचाकर क्यों प्रभु की इच्छा में दखल दे।
उत्तर प्रदेश में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन देश की अभागी माताओ के लाडले कन्हैया अपनी माताओ की गोद में भले ही दम तोड़ दे परन्तु निकम्मे मंत्री साधू के नाम पर सत्ता सुख का आनंद लूटने वाले भोगी, योगी के सत्ता सुख में कोई कमी नही आने वाली है। यदि ज्यादा देश की जनता हल्ला मचाए तो फिर तीन तलाक से देश की जनता को बहलाओ, सर्जिकल स्ट्राईक के साथ देश की सबसे बड़ी अदालत के निर्णय को भी मक्कारी से भाजपा की जीत बताकर अपने पालतू गोदी मिडिया से अपनी विजय के ढोल बजवाओ। ऐसा लगता है कि अब तीन तलाक के अधूरे फेसले के आने के बाद देश की जनता समस्या मुक्त होने वाली है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय को मोदी की इच्छा शक्ति बताकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। देश के हिन्दू-मुस्लिम मूर्खो में आनंद का उल्लाहास छा रहा है। सत्ता के पकवान खाकर पलने वाले पालतू सरकारी मुस्लिम तीतर मोदी को भारतीय मुस्लिम महिलाओ का शुभ चिन्तक बताने में सम्पूर्ण हदे पार कर रहे है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पवित्र कुरआन शरीफ मुस्लिमो की धार्मिक पुस्तक के आदेशो पर आधारित है।
कुरान में कहा गया है कि जब पति, पत्नी में अलगाव होने लगे तो पति पत्नी को दण्ड स्वरुप एक तलाक दे। एक माह तक पति और पत्नी के पारिवारिक जन मुस्लिम महिला पुरुष के शादी शुदा जीवन को बचाने के लिए विचार विमर्श करें। एक माह पश्चात पति फिर पत्नी को दूसरी तलाक दे और फिर से पति और पत्नी पक्ष के मध्यस्थ दो माह तक शादी शुदा मर्द औरत की शादी को बचाने के लिए आपस में समझायस करके पति पत्नी दोनों को साथ रहने के लिए राजी करें। कुल मिलाकर तीन माह की अवधी में पति व पत्नी पक्ष के पंच जब अपने पूर्ण प्रयास करके पुन: साथ रहने के लिए पति व पत्नी को राजी नही कर सके। जब अंतिम विकल्प के रूप में तलाक ही दोनों के जीवन को शांति से चलाने के लिए उचित हो तब अंतिम विकल्प के रूप में तलाक देना ही ठीक है। इस दशा में मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को तलाक दे सकते है।
इस्लाम धर्म में पत्नी को तलाक देना धरती पर मनुष्यों द्वारा किये गये बुरे कर्मो में सबसे बड़ा बुरा कर्म माना जाता है। हर व्यक्ति को ईश्वर, अल्लाह का आदेश है कि वह तलाक देने जैसे सबसे बुरे कर्म करने से बचे। ईस्लाम धर्म में पति, पत्नी के शादी शुदा जीवन को बचाने केलिए आखरी दम तक प्रयाश करने का हुक्म देता है। इसी प्रकार ईस्लाम धर्म को मानने वाले कठमुल्लों ने भी धर्म और पवित्र कुरआन के अनुसार जीवन नही जीने की कसम खाली है।
पैगम्बर साहब और उनके महान अनुयायी खुलफा ए राशीदा के शासन में एक बार में तीन तलाक बोलकर तलाक देने वाले मुस्लिमो को कोड़े मारकर सरेआम सजा दी जाती थी। एक बार में तीन तलाक बोलकर तलाक देने को तलाक के बिदअत यानी हराम माना जाता है। दुर्भाग्य से देश में अखलाक, नजीब, पहलु खान के साथ भीड़ के न्याय में मारे गये बेगुनाह की माँ की आँखों में बेबसी लाचारी के आंसू देने वाले और उन्हें अपनों के गम मे खून के आंसू रुलाने वाले आज बेशर्मी से मुस्लिम महिलाओ की चिंता में डूबे जा रहे है। देश में एक जसोदा बेन भी है जो उसके अपने पति की ठुकराई हुई है, उसकी चिंता देश के भांड मीडिया व् भाजपा वालो को नही है।
गरीब मुसलमान की पत्नी को उसका हक़ दिलाना न्याय है तो फिर जसोदा बेन की आँखों में बसे घर परिवार बसाने के सपने तोड़ने वाले की बात करने में क्यों देश की मीडिया को शर्म आती है। देश में वैचारिक हिंसा की राजनीती करने वालो में आज मुस्लिम कठमुल्ले, फर्जी धर्म रक्षक, मर्यादा विहीन जीवन जीने वाले कलियुगी राम भक्तो के साथ देश का वैशाली की नगर वधु बना बिकाऊ मीडिया भी जुड़ गया है।
देश की धर्म नगरी वृन्दावन, मथुरा, बनारस में बने आश्रमों में अपने वृद्ध माता पिता को हाथ पकड़कर ले जाकर छोड़ने वाले कलियुगी पुत्रो के आचरण से उनके बूढ़े माँ बाप पर क्या बितती होगी ? बेसहारा बना दिए बूढ़े माँ बाप की बात करने के लिए क्यों हमारे पास समय नही है। वृन्दावन, मथुरा, बनारस में बने आश्रमों में रहने वाली कितनी महिलाओ का योन शोषण होता है। इस प्रकार की महिलाओ के बारे में उनके दर्द से भरे जीवन को जानने के लिए देश के प्रधानमंत्री व भाजपा समर्थक मीडिया के पास भी समय नही होता है।
देश के ढोंगी संत आसाराम, राम पाल, राम रहीम की भाँती मुस्लिम परसनल्ला बोर्ड के कठमुल्लों ने भी कसम खा रखी है कि हम हमारे धर्म के लोगो को मूर्ख बनाकर, उनका शोषण करके हराम का माल खाकर सिर्फ और सिर्फ सियासत करने के लिए ही जिन्दा रहेंगे। इन कठमुल्लों शरीर से ईमान के साथ उनके जिस्मो से रहम, ईन्साफ, दया, परोपकार सभी वह नैतिक मूल्य जिनके कारण मानव दानव से मानव बंटा है वे सभी निकल चुके है। अब उनके पास सिर्फ कठमुल्ला होने की जिद और शोषण करने की शैतानी मानसिकता बची है, जो आज उन्हें दिल से ईमान धारण करने वाले मुस्लिम के बजाय रूप-लिबास धारण करने वाले बहरूपिया समान दिखावे का मुस्लिम बना रही है।
याद रखे जब मनुष्य की आँखों पर लालच और शासन करने का जूनून छा जाता है तो उसकी आँखों पर एक काली पट्टी चढ़ जाती है फिर उसका बुद्धि, विवेक सब नष्ट हो जाता है। इस प्रकार के व्यक्तियों को फिर अपनी सियासी दूकान चलाने के लिए अच्छे कर्मो के बजाय समाज के अन्य व्यक्तियों का बुरा करने व उन्हें कष्टों में धकेलकर आनंदित होने वाले मूर्खो और धूर्तो की फोज चाहिए होती है। देश की जनता को आज भाजपा की राजनीती के राम और जनजन की आत्मा में बसने वाले भगवान राम के बारे में चिंतन करना चाहिए। वासुदेव कुटुंब यानी सारा संसार और इसमें रहने वाले सभी मनुष्य ईश्वर के बनाए हुए वे सभी हमारा परिवार है। इस विचारधारा को मानने वाले सनातन हिन्दू धर्म और भाजपा के हिंदुत्व में काफी फर्क है।
सनातन हिन्दू धर्म दया, परोपकार, सत्य पर आधारित है वही भाजपा का हिंदुत्व संघ के विवादित राजनैतिक हितो को पूर्ति के लिए बना तत्कालीन अंधश्रद्धा का विचार है। भाजपा के हिंदुत्व का यह विचार राजनीती करने व जनता को भ्रमित करके जनता के मत लूटने के लिए गढ़ा गया है। यही कारण है कि गोरखपुर में मरने वाले लगभग सो बच्चो की मोत पर उत्तर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री की आत्मा में हलकी सी टीस भी नही लगती। योगी सरकार के चिकित्सा मंत्री बेशर्मी से बयान देते है कि अगस्त माह में तो ज्यादा मोते होती है। यही स्थिति मुस्लिम कठमुल्लों की है वे भी ईस्लाम धर्म का राजनैतिक दोहन करके धर्म की आड़ में अपनी शोषण वादी धार्मिक सत्ता चलाने के लिए आज भी तीन तलाक पर आये कोर्ट के निर्णय का विरोध धर्म के नाम पर ही कर रहे है।
देश में महात्मा गांधी का सनातन हिन्दू धर्म बिहार के चंपारण जिले में अधनंगी महिलाओ बच्चो को देखने के बाद अपने शरीर के कपड़ो को कम कर देता है।
वही देश में बाढ़ से मरने वाली हिन्दू मुस्लिम जनता के दुखो देखने पर भाजपा संघ द्वारा उपजाए हिंदुत्व पर कोई फर्क नही पड़ता है। यह राजनैतिक रूप से सता का दोहन करने वाला हिदुत्व देश की जनता की समस्याओ से ज्यादा अपने आप को वर्ष 2019 के चुनावो में फिर से शासन करने की चिंता में लगा है। इस हिंदुत्व को सिर्फ और सिर्फ अपने सत्ता के प्रतिष्ठानों को बचाए रखकर सिर्फ अपने घर भरने की चिंता हर समय लगी रहती है। देश की जनता को भाजपा के हिंदुत्व और कठमुल्लों के ईस्लाम दोनों से सतर्क रहने की आवश्यकता है इसी में हमारे देश और देश की जनता की भलाई है।
लेखक : मो. हफीज, व्यूरो चीफ, राजस्थान
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