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विवादों में घिरा राजस्थान वक्फ बोर्ड, पाकिस्तानी का पुत्र है सईद अहमद सी.ओ. ! अध्यक्ष नकवी के गाँव में लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे !

Arun Mishra
20 Aug 2017 12:39 PM IST
विवादों में घिरा राजस्थान वक्फ बोर्ड, पाकिस्तानी का पुत्र है सईद अहमद सी.ओ. ! अध्यक्ष नकवी के गाँव में लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे !
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विवादों में घिरा राजस्थान वक्फ बोर्ड, पाकिस्तानी का पुत्र है सईद अहमद सी.ओ. ! अध्यक्ष नकवी के गाँव में लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे !

जयपुर : इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद साहब ने अपने अनुयायी अपने मानने वालो से कहा था कि पांच काम करने वाले को उसके सद्कर्मो का पुण्य मरने के बाद भी मिलता है। पैगम्बर अनुसार ये पांच अच्छे काम निम्न प्रकार है। पहला काम कोई धार्मिक पुस्तक या ज्ञान देने वाली कोई अच्छी किताब लिख दे, दूसरा कोई व्यक्ति कोई भवन, मस्जिद, धर्मशाला बना दे, तीसरा कोई व्यक्ति एक पेड़ लगा दे, चोथा कोई आदमी कुआं, तालाब खुदवा दे, पांचवा और अंतिम काम इन चारो कामो की भांति मानवता वादी और इंसानियत को बढ़ावा देने वाला है, कोई व्यक्ति नेक और शरीफ पुत्र छोड़कर मर जाए। ये पांचो काम इस्लाम धर्म के मानवीय द्रष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं।

बाप के मरने के बाद समाज में उसका नेक शरीफ पुत्र यदि पुण्य के काम करता है तो उसका लाभ उसके मर चुके पिता को भी मिलेगा। पैगम्बर साहब ने कहा कि जिसका पड़ोसी उसकी शरारतो से बेचेन परेशान रहता है वह मुसलमान नही है। यहाँ पर पैगम्बर साहब ने पड़ोसी धर्म निभाने का सन्देश देते हुए पड़ोसी का धर्म नही बताया, पड़ोसी किसी भी धर्म का मानने वाला हो सकता है। अब कोई वहाबी जाकिर नायक या सऊदी अरब का कठमुल्ला हमे बताए की हमारे देश के साथ सदैवे दुश्मनी रखकर पीठ पीछे वार करने वाला पकिस्तान और उसके वहाबी मुल्ले हाफिज सईद व उसके कश्मीरी आतंकी समर्थक क्या वास्तव में मुसलमान कहलाने के हकदार है ? क्या जो बाप अपने पुत्रो को आतंकी वहाबी विचारधारा का हत्यारा बनाकर उसे विश्व में बेगुनाहो के खून की होली खेलने के लिए दरिंदा बना कर खुला छोड़ देता है तो क्या वह पैगम्बर साहब के अनुसार अपने पुत्र के पाप का भागीदार नही होगा ?

मगर अफ़सोस आज मुस्लिम जगत में सऊदी पेट्रो डालर पर पलने वाले पाखण्डी मुल्लो की बड़ी जमात वहाबी आतंकी विचारधारा की समर्थक बन गयी है। मुस्लिम धर्म के लोगो द्वारा वहाबी आतंकी विचारधारा का विरोध जिस स्तर पर करना चाहिए उस पर नही किये जाने के कारण यह विचारधारा इस्लामी जगत को अपने खुनी पंजो में जकड रही है। विश्व में आतंक का निर्यात करने वाले पकिस्तान में इस प्रकार के हराम खोर मुल्लो की बड़ी तादाद है, जो वहा की सरकार के समर्थन के बल पर उदारवादी सूफी मत के लोगो का कत्लेआम कर रही है।

हाल ही में पाकिस्तान मे सूफी संगीत कव्वाली गाने वाले साबरी ब्रादर्स के विश्व प्रसिद्ध गायक कलाकार पुत्र को गोलियों से भून डाला गया। दुनिया में आतंकी बन्दुक, बारूद, बमों की खेती करके बेगुनाहो के खून की फसल काटने वाले नापाक पकिस्तान के खेबर पख्तुन्वा प्रांत से 1970 के दशक में राजस्थान राज्य के वक्फ बोर्ड सी.ओ. सईद अहमद का पिता बिना पासपोर्ट, वीजा के भारत में आकर बस गया था। भारत में सईद अहमद आर.ए.एस. अधिकारी का पिता जयपुर के जालूपुरा तोफखाना का रास्ता में छुपकर रहा था जिसका नाम अब्दुल्ला शाह था। उसने फिर जयपुर शहर में शादी करके घर बसा लिया जिसका पुत्र सईद अहमद है। अपने पाक मूल के पिता का चरित्र छिपाने के लिए ही फिर सईद अहमद ने विवादित चरित्र की लड़की से दबाव में शादी की जिसका पिता राज्य में आर.ए.एस अधिकारी था। उसके प्रभाव के कारण ही सईद अहमद का विवादित अतीत फिर छिप गया।

ईस्लाम धर्म में विश्व को प्यार, प्रेम, मानवता का सन्देश देने वाली सूफी संतो की विचारधारा भी है जिसे वहाबी आतंकी विचार धारा के लोग मूर्ति पूजक और धर्म से पथभृष्ट ना जाने क्या क्या कहते है। विश्व में वहाबी कट्टर पंथी समान रूप से अन्य धर्मावलम्बी लोगो के साथ सूफी मत को मानने वाले लोगो को भी अपना दुश्मन समझकर उन्हें भी मारते रहते है। सूफी मत के संत विश्व में जहाँ भी गये उन्होंने वहाँ की स्थानीय संस्कृति से अपने आप को जोड़ा है। भारत में मंदिरों में होने वाले भजनों की भाँती सूफियों ने कव्वाली सुनने का प्रचलन शुरू किया।

सूफी मत में चिश्तियां, नक्शबंदी घराने में गेरुवे वस्त्र धारण करने की परम्परा है और यह परम्परा हिन्दू साधू ऋषियों से प्रभावित परम्परा है। दरगाहो पर इस पंथ में बसंत पंचमी पर बसंत के फूल दरगाहो पर चढ़ाकर बसंत उत्सव मनाने की परम्परा भी है। यहाँ गोरतलब होगा कि ईराक के बग़दाद शहर में विश्व के सूफीमत में सर्वोच्च स्थान रखने वाले गोस पाक की समाधी है। हमारे देश के उत्तर प्रदेश राज्य के बदायूँ जिले के गोस पाक के पंथ कादरी सिलसिले के मानने वाले सूफी डॉक्टर सालिम साहब को बग़दाद में ISIS के वहाबी आतंकियों ने मार डाला था। उनका कुसूर सिर्फ इतना था कि सालिम साहब ने मना करने के बाद भी गोस पाक की समाधि के दर्शन किये थे। मात्र इसी कारण उन्हें ISIS के कट्टर पंथीयों ने मार डाला था।

विश्व में आतंक के रूप में पहचाने जाने वाले संगठनों में ISIS, अलकायदा, तहरीके तालिबान, अलनुसरा, जमातुद दावा, लश्करे तेयबा, के साथ कश्मीर राज्य में सक्रिय सभी आतंकियों की विचारधारा वहाबी ईस्लाम की सलफी विचारधारा है। इस आतंकी विचारधारा के प्रबल समर्थक धर्म प्रचारक जाकिर नायक जैसे व्यक्ति है। आतंकी समर्थक कट्टर वहाबी विचारधारा के लोगो का राजस्थान वक्फ बोर्ड पर कब्जा हो चूका है, जो चुन चुनकर सूफीमत की दरगाहो और वहां पर रहने वाले प्यार, प्रेम के सन्देश को देने में लगे लोगो पर हमले कर के उन्हें बाहर निकाल रहे है।

राजधानी जयपुर में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अबुबकर नकवी, बोर्ड सदस्य शोकत कुरैशी, युसूफ कलाल, अब्दुल लतीफ़, ईस्लाम कोयले वाला आदि की विचारधारा वहाबी आतंक की विचारधारा है। अबुबकर नकवी का परिवार पूर्णरूप से वहाबी और जाकिर नायक का समर्थक है। इसके पेतृक गाँव टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में गत कई वर्षो से धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है। इसी का परिणाम है कि टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में दिनांक 12 दिसंबर 2014 को उन्मादी भीड़ ने ISIS जिंदाबाद और पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये।

टोंक जिले के मालपुरा कस्बे के मूल निवासी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अबुबकर नकवी और इनका भाई टोंक में जिला कांग्रेस का पदाधिकारी है। पकिस्तान व ISIS के जिंदाबाद के नारे लगाने वाली उन्मादी भीड़ का नेतृत्व करने वाले मालपुरा नगरपालिका वार्ड नं 6 के पार्षद गयूर अहमद था। यह वक्फ बोर्ड अध्यक्ष नकवी का रिश्ते में भतीजा लगता है। इस राष्ट्र विरोधी कृत्य में कांग्रेसी पार्षद गयूर अहमद के साथ 25 अन्य व्यक्तियों पर राष्ट्र द्रोह का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अभी हाल ही में भाजपा के मंत्री युनुस खान की विधान सभा क्षेत्र डीडवाना में भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग चुके है। यहाँ गोरतलब होगा कि राज्य में शिवचरण माथुर की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अश्क अली टांक के क्षेत्र फतेहपुर में पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगने पर मंत्री अश्क अली को मंत्री पद गवाना पड़ा था।

अब यहाँ सवाल यह है कि कलियुगी राम भक्तो और छदम देश भक्तो की भाजपा सरकार में जाकिर नायक से सऊदी अरब में उमरा की धार्मिक यात्रा पर मिलने वाले नकवी को किसका संरक्षण मिला हुआ है ? क्या उसके गाँव मालपुरा में लगे पाकिस्तान व ISIS जिंदाबाद के नारों को लगाने के लिए ही पुरूस्कार स्वरुप नकवी को राज्य वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है ? राजधानी में अब्दुल लतीफ़ आरको और शोकत कुरैशी की व्यापारिक साझेदारी, जाकिर नायक जैसे आतंक के प्रबल समर्थको से है। इन सभी आतंक के समर्थको के काले कारनामे का पता सम्पूर्ण शहर के लोगो को है तो फिर क्यों राज्य सरकार इन्हें जेल भेजकर इनकी सम्पती जब्त नही करती ?

वक्फ बोर्ड सदस्य शोकत कुरैशी व अब्दुल लतीफ़ आरको लव जेहाद में भी लिप्त रहकर धर्म परिवर्तन के कारनामे भी कर चुके हैं। इनके विरुद्ध राज्य पुलिस ने चालान पेश किये है, इसकी जानकारी जब हमे है तो क्या जयपुर पुलिस को नही होगी ? सूत्रों के अनुसार जाकिर नायक के पेसो से शोकत कुरैशी व लतीफ़ आरको ने काफी संपत्तियां खरीद रखी है। वैसे ये पेसो के लालच में ही जाकिर नायक जैसे राष्ट्र विरोधी के साझेदार बने थे और पेसो के लिए ही इन बेईमानो ने जयपुर में वक्फ करबला की 40 बीघा भूमि से 22 बीघा भूमि बेच खाई है। इस भूमि को बेचने में लतीफ़ आरको, शोकत कुरैशी ने खूब जालसाजी की है जिसका मुकदमा भी इन पर दर्ज होने वाला है।

जयपुर शहर में वक्फ बोर्ड में बैठे पाकिस्तानी पिता की संतान सईद अहमद, अबुबकर नकवी, शोकत कुरैशी, लतीफ़ आरको व इनके वहाबी साथियों के आतंकी राष्ट्र विरोधी संबंधो की जांच कर इन्हें भाजपा के रामराज देशभक्त शासन में कब जेल भेजा जाएगा ? इस पर पर हम सबकी नजरे लगी है देखना यह है कि राज्य सरकार एवं केंद्र की भाजपा सरकार कब जागती है ?

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लेखक : मो. हफीज, व्यूरो चीफ, राजस्थान

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