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मथुरा प्रकरण: BJP नेता अशवनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई 16 को, फंसा प्रसाशन

मथुरा प्रकरण: BJP नेता अशवनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई 16 को, फंसा प्रसाशन
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मथुरा दानिश खान

मथुरा हिंसा की सीबीआई जाँच के लिये मथुरा के अधिवक्ता विजय पाल सिंह तोमर और चित्रकूट के अधिवक्ता मनीष कुमार की जनहित याचिका को सुनने के बाद नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश भोषले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं को भी मेरी याचिका के साथ जोड़ने का आदेश दिया.


इस प्रकार अब तक 6 जनहित याचिकायें दाखिल हो चुकी हैं. अशवनी उपाध्याय की याचिका और अन्य तीन याचिकाओं को जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस रविन्द्र नाथ कक्कर के कोर्ट से मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में ट्रांसफर किया गया. अशवनी उपाध्याय ने कोर्ट से निवेदन किया कि इस मामले में डे-टू-डे हियरिंग की जरुरत है क्योंकि प्रशासन प्रदेश के एक मंत्री और समाजवादी पार्टी के एक सांसद को बचाने के लिये जवाहर बाग़ के एविडेंस को समाप्त कर रहा है.

एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह ने जबाब देने के लिये 2 सप्ताह का और समय माँगा. कोर्ट ने 18 जुलाई को राज्य सरकार से राम वृक्ष का वह एप्लीकेशन माँगा था, जिस पर मथुरा प्रशासन ने बाग़ को 2 दिन के लिये धरना देने के लिये दिया था. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी पूंछा था कि प्रशासन ने किन-2 शर्तों पर बाग़ में धरने की अनुमति दी थी.


आज मथुरा जिला प्रशासन हाईकोर्ट में मौजूद था लेकिन रामवृक्ष यादव का एप्लीकेशन और जिला प्रशासन का अलॉटमेंट लेटर अबतक कोर्ट को नहीं दिया गया. ऐसा लगता है कि राम वृक्ष को जवाहर बाग़ मौखक रूप से ही दे दिया गया था. इसीलिये महाधिवक्ता ने एक बार फिर 2 सप्ताह का टाइम माँगा जिसे कोर्ट ने मजूर करते हुये फाइनल हियरिंग के लिये 16 अगस्त फिक्स किया है.

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