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मेरठ साइकिल ट्रेक निर्माण में बड़ा घोटाला, बिना काम कैसे जारी हो गए डेढ़ करोड़
शिव कुमार मिश्र
12 Aug 2017 1:00 PM IST

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मंगलपांडे नगर आवासीय समिति सचिव की शिकायत पर हुई जांच, एफआईआर की तैयारी
मेरठ साइकिल ट्रेक निर्माण में बड़ा घोटाला हुआ है, इसकी परते खुलने लगी है, जिसमे शिकायत मिलते ही कमिश्नर प्रभात कुमार ने बड़ी कार्यवहाई करते हुए एमडीए के तीन अधिकरियो को गिरफ्तार करवा दिया है, बताया जाता है साइकिल ट्रेक के निर्माण के दौरान करोडो रूपये का वायर घोटाले हुआ था, जिसमे कमिश्नर प्रभात कुमार ने बड़ी कार्याही की है। फ़िलहाल सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक जे ई रविंद्र कुमार, एक्शन एपी सिंह और ऐ ई ऐस एन मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है,
दरअसल ग्राउंड पर एक इंच भी वायर न लगा और न ही कोई खंभा शिफ्ट हुआ, ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इंजीनियरों की मिलीभगत के बिना भुगतान कैसे हो गया। फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या आंखे मूंदे हुए था। इससे भी बड़ा सवाल यह कि दो साल में किसी को इतनी फुर्सत नहीं मिली कि तमाम शिकायतों के बावजूद न कोई जांच हुई और ना ही खंभे शिफ्ट हुए।
एमडीए में वायर घोटाले के खुलासे के बाद हड़कंप है। साइकिल ट्रैक के सहारे बीच सड़क बिजली के खंभे मौत बनकर मंडरा रहे हैं और एमडीए से इनकी शि¨फ्टग के नाम पर डेढ़ करोड़ का भुगतान भी हो गया। मंगलपांडे नगर आवासीय समिति के सचिव देवेन्द्र सिंह की शिकायत पर कमिश्नर ने इस मामले की जांच कराई तो बड़े घोटाले की परतें खुल आई हैं। वहीं, सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने भी कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। करीब दो साल पहले डीएम कंपाउंड की सड़क और साइकिल ट्रैक बनाने का काम शुरू हुआ। तब यहां बीच सड़क खड़े खंभे और बिजली के तार हटाकर अंडरग्राउंड केबिल बिछाने का फैसला हुआ। साइकिल ट्रैक और डीएम कंपाउंड की सड़क की डीपीआर में यह शामिल भी हुआ। इसके टेंडर भी हो गए पर काम नहीं हुआ। एमडीए ने इसके लिए 1.5 करोड़ का भुगतान भी कर दिया पर आज तक भी यह तार और खंभे बदले नहीं गए हैं। मंगलपांडे नगर आवासीय समिति के सचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह तोमर ने कमिश्नर से इस मामले की शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि जब टेंडर हो गया और 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया तो फिर काम क्यों नहीं हुआ। बीच सड़क बिजली के खंभों की वजह से हर वक्त दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
तोमर ने कहा कि 20 महीने पहले इसका टेंडर हो गया और बिना काम बड़ी धनराशि का भुगतान भी हो गया। दो महीने पहले भी तोमर, कमिश्नर से मिले और पूरे मामले की शिकायत की। कमिश्नर ने इस पर एमडीए अफसरों से रिपोर्ट तलब कर ली। फाइलें खंगाली गईं तो पता चला कि बिना काम के ही डेढ़ करोड़ से ज्यादा का भुगतान हो गया। इस भुगतान से जो केबिल खरीदकर लगाया जाना था वह अंडरग्राउंड लगना था, लेकिन मौके पर साइकिल ट्रैक बन गया। ऐसे में अब अगर यह वायर लगाया भी जाएगा तो सड़क उखाड़नी पड़ेगी।
उधर इस मामले में कमिश्नर ने संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एमडीए वीसी को निर्देश दिए हैं। एमडीए वीसी सीताराम का कहना है कि यह उनके कार्यकाल के पहले का मामला है। इसकी गहन जांच पड़ताल चल रही है। इस मामले में तथ्यों के आधार पर आगे की ठोस कार्रवाई की जाएगी।
अभय शर्मा
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