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ईंधन कीमतों में वृद्धि के खिलाफ 8 जुलाई को देशव्यापी विरोध

संयुक्त किसान मोर्चा 22 जुलाई 2021 से संसद में विरोध प्रदर्शन के लिए विस्तृत योजना बना रही है

ईंधन कीमतों में वृद्धि के खिलाफ 8 जुलाई को देशव्यापी विरोध
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संयुक्त किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि 19 जुलाई 2021 से प्रारंभ होने वाले आगामी संसद सत्र के दौरान वह संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा। 22 जुलाई 2021 से हर दिन एसकेएम से जुड़े प्रत्येक संगठन के पांच प्रदर्शनकारी भारतीय संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। एसकेएम विपक्षी दलों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी पत्र लिखेगा कि वे सक्रिय रूप से किसानों की मांगों को उठाएं। इस बावत एसकेएमम ने कहा - "हम चाहते हैं कि विपक्षी दल यह सुनिश्चित करें कि किसानों का आंदोलन और उसकी मांगें मुख्य मुद्दा बनें और हमारी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव डाला जाए। हम नहीं चाहते कि विपक्ष हंगामा करे या कार्यवाही से बाहर जाए। लेकिन संसद के अंदर रचनात्मक रूप से शामिल हों, जबकि किसान बाहर विरोध करते हैं"।

8 जुलाई को, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ एसकेएम के आह्वान पर पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। चिह्नित सार्वजनिक स्थानों पर, प्रदर्शनकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे खाली रसोई गैस सिलेन्डर और अपने वाहनों के साथ आएं और सड़क के किनारे पार्क करें। यहां, वे पोस्टर, तख्तियां और बैनर के साथ विरोध करेंगे, जिसमें "डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों को आधा करें", " तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करें" और "सभी वस्तुओं के लिए एक एमएसपी गारंटी कानून लागू करें" आदि जैसे संदेश लिखे रहेंगे। यह सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच किया जाएगा। भारत में आज डीजल और पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर है। ज्ञात हो कि आम नागरिकों द्वारा भुगतान किए जा रहे ईंधन की कीमतों का 65% कर के रूप में सरकार को जाता है। भारत में ईंधन की कीमतें अभी श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे हमारे पड़ोसी देशों सहित अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक हैं। सच्चाई यह है कि विमानन ईंधन उस ईंधन से सस्ता है जिसका उपयोग किसानों जैसे आम उपभोक्ता करता है। नागरिक इस बोझ को सहन करना जारी नहीं रख सकते हैं और इस संदर्भ में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

ऐसी खबर है कि पंजाब में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर, पार्टी नेताओं के खिलाफ हर जगह हो रहे विरोध पर चर्चा के लिए समय मांगा है । यह आवश्यक है कि भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के नेता किसानों के गुस्से और हताशा की अभिव्यक्ति के बारे में शिकायत करने के बजाय, किसानों के गुस्से के मूल कारण को समझें। इन नेताओं को यह समझना चाहिए कि किसानों के लिए यह वर्तमान संघर्ष जीवन-मरण का मामला है। हरियाणा में पानीपत में किसानों के काले झंडे के विरोध के कारण विधायक महिपाल टांडा ने एक सड़क उद्घाटन कार्यक्रम को रद्द कर दिया, जिसमें उनके भाग लेने की उम्मीद थी। बताया जाता है कि विधायक ने अपने भाई को अपने स्थान पर उद्घाटन के लिए भेजा था!

उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भाजपा उत्साहित है। खबर है कि मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी उन जिलों में जीती है जहां किसान आंदोलन की जड़ें हैं । पार्टी और सीएम यह भूल रहे हैं कि अभी कुछ समय पहले जब राज्य में पंचायत चुनाव हुए थे तो 3050 में से करीब 765 सीटें ही बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को मिली थीं । भाजपा सहित किसी भी अन्य पार्टी की तुलना में सबसे ज्यादा सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं। यह प्रत्यक्ष चुनाव के मामले में था जहां किसानों और अन्य लोगों ने पहले ही अपना स्पष्ट जनादेश दे दिया था। किसानों के जनादेश के रूप में पार्टी और मुख्यमंत्री की नवीनतम परिणामों की व्याख्या हास्यास्पद है, यह देखते हुए कि किसानों ने पहले ही अपना जनादेश दिया है और यह स्पष्ट रूप से भाजपा के खिलाफ था। नवीनतम परिणाम दबाव, धमकी और धोखाधड़ी द्वारा अर्जित था।

Shiv Kumar Mishra
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