

A S Rathore
N H Khan
जयपुर शहर से मात्र आधा घंटे की दूरी पर बसा चौमूं कस्बा में इन दिनों चौमूं पुलिस व भाजपा के हारे हुए विधानसभा चुनाव प्रत्याशी की साजिश का शिकार बना मुस्लिम समाज और पुलिस के टकराव से समाचारों की सुर्खियों में है इस सब के पीछे छिपी है दंगों की आग में राजनीतिक रोटियां सेंक चुनाव जीतने की राजनीति की कला जिसमें भाजपाके नेता चेम्पियन है पूर्ण समाचार अनुसार राजधानी जयपुर के समीप चौमूं कस्बे में बस स्टैंड पर एक सो साल पुरानी कलंदरी मस्जिद है इस मस्जिद को वर्ष 1981मे दंगाईयो ने शहीद कर दिया था पूर्व में वर्ष 1954 मे भी इस मस्जिद को आग लगा कर नष्ट करने का प्रयास किया था जिसकी सूचना मिलने पर चौमूं पुलिस के तत्कालीन थानाध्यक्ष ने सूचना मिलने पर आग बुझाई जिसकी रपट थाने में दर्ज हैं.
वर्ष 1981मे यह मस्जिद शहीद हुई थी तत्पश्चात मस्जिद की जमीन के स्वामित्व को लेकर विभिन्न कोर्टो में मुकदमे चलें जिसमें जमीन मस्जिद की मुस्लिम पक्ष की मानी गई और वर्तमान में इस विवादित मस्जिद जमीन पर राजस्थान उच्च न्यायालय का यथास्थिति स्थगन आदेश प्रभावी है मोके पर मस्जिद की सड़क की ओर पत्थरों की सुरक्षा की कच्ची दो फीट की दीवार बनी जो विवाद की वजह बनी है!
राज्य की गत कांग्रेस सरकार के शासन में चौमूं से भाजपा के विधायक रामलाल शर्मा ने राज्य की विधानसभा में इस मस्जिद को अतिक्रमण बता कर अतिक्रमण हटाने का सवाल उठाया था उस समय राज्य विधानसभा का चुनाव नजदीक था अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की विधानसभा चुनाव प्रत्याशी शिखा मील बराला से भाजपा के विधायक प्रत्याशी रामलाल शर्मा चुनाव हार गए
देश में भाजपा आमजन की समस्याओं जैसे महंगाई विकास चिकित्सा शिक्षा की मूल भूत आवश्यकता के समाधान के बजाय साम्प्रदायिक हिन्दू मुस्लिम नफरत की राजनीति करती है यह राजनीति सस्ती व सरल भी है इसलिए भाजपा नेता ओ को यह खूब पसंद भी है राज्य का चौमूं कस्बा भी इसी राजनीति का शिकार बना जहां कुछ भाजपा से जुड़े मुस्लिम और चौमूं पुलिस ने मिलकर यह खेल खेला है और यह खेल किसको फायदा पहुंचाने के लिए किसके इशारे पर खेला गया जाहिर है कि इसका फायदा सिर्फ भाजपा और उसके नेताओं को ही होता है यहां आश्चर्यजनक यह कि उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद सड़क छाप टटपुंजिय मुस्लिम समाज के लोग और चौमूं पुलिस की ऐसी क्या मजबूरी थी जो बिना किसी कानूनी सलाह के आनन फानन में उच्च न्यायालय के आदेश की समीक्षा किए बिना उसके विपरीत जाकर मस्जिद जेसी धार्मिक संवेदनशील संरचना में छेड़छाड़ करने के लिए तैयार हो गए इसका जवाब किसी के पास नहीं है इस मुकदमे में हिन्दू समाज के लोग प्रतिवादी है क्षेत्रीय विधायक शिखा मील बराला के साथ कस्बे के गणमान्य व्यक्तियों से चर्चा किए बिना सूचना दिए बगेर मात्र कुछ लोगों के कहने के बिना किसी लिखित कानूनी जानकारी के चौमूं पुलिस ने इतना बडा क़दम उठा लिया यह जांच का विषय है क्या पुलिस कमिश्नर पुलिस डी जी सरकार इसकी जांच कराएगी यह भी सवाल जन मानस में घूम रहा है पर जांचकी संभावना कम ही है देश में आज बोने लोगों का शासन है बेशर्मी निर्लज्जता झूट लूट फूट डालो राज करो की नीतियां ही शासन करने का मूल मंत्र जिसका प्रचार प्रसार देश लूटने वाले आर्थिक अपराधीयो के टी वी चेनल बेशर्मी से दिन रात करते हैं
'असल मुद्दा मुस्लिम समाज को टारगेट कर प्रताड़ित करना था जिससे वोटों का धुर्विकरण हों चुनाव में फायदा मिले इसमें किसी हद तक इस खेल को खेलने वाले राजनेता नफरती संगठन कामयाब होते हुए दिखाई दे रहे हैं इतना ही नहीं चौमूं पुलिस प्रभारी छुटभैय्ए मुस्लिम नेताओं को साथ लेकर एक यू ट्यूब चेनल पर इस समझोते की जानकारी देते हुए खुली धमकी देते हुए कह रहे हैं कि इस समझौते के विरुद्ध कोई भी व्यक्ति अपनी जुबान खोलेगा असहमति जताएगा तों संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उस व्यक्ति को जेल भेज दिया जाएगा जमानत नहीं होने दी जाएगी अब सवाल यह है कि प्रजातंत्र लोकतांत्रिक कानून के शासन में समाज में इस प्रकार की धमकी देने का आधिकार इस पुलिस अधिकारी को किसने दिया यह साहस सत्ता संरक्षण के बगेर संभव नहीं है पुलिस अधिकारी के इस कथन से गहरे षड्यंत्र की बू आती है क्या इस प्रकार की धमकीं स्वीकार की जा सकती है यह फासिस्ट वादी तानाशाह प्रवृत्ति की सोच रखने वाला सरकारी नोकर लोक सेवक कहलाने का अधिकारी है इसका भी जवाब प्रदेश की जनता मांग रही है और जवाब देने वाले पुलिस अधिकारियों का मोन होना गहरी साज़िश का परिचायक है जिसका शिकार आज नही तो कल कांग्रेस विधायक शिखा मील बराला की राजनीति को होना जिसके संकेत मिल रहे हैं
प्राप्त जानकारी अनुसार दिनांक 25 दिसंबर की शाम आठ बजे से ही मस्जिद से पत्थर की अस्थाई दीवार हटाने का काम शुरू हो गया था दीवार की जगह लोहे की मजबूत इंगल लगाकर लोहे के सरिए से वेल्डिंग कर सुरक्षा दीवार बनाने पर पुलिस प्रशासन और मुस्लिम समाज में सहमति बनी थी अचानक फिर कहा पुलिस की ओर से की लोहे की इंगल बडी है उसे छोटी करलो इंगल थोडा पीछे सरका लो मोके पर डिप्टी एस पी थाना प्रभारी मोजूद थे भूमी की नाप करने के लिए फीता लिए थाना प्रभारी तस्वीरों में नजर आ रहे हैं रात के समय में डेढ से दो लाख रुपए का सरिया लोहा मुस्लिम समाज लाता है फिर देर रात तीन बजे अचानक पुलिस प्रशासन पर उपर से फ़ोन आते हैं कि तुरन्त रेलिंग लोहे की हटाकर पुरानी यथा स्थिति लाई जाएं पुलिस प्रशासन ने मुस्लिम समाज से कहा कि हटाएं गए पत्थर वापस लाओ वेल्डिंग तोड़ कर लोहे की एंगल तुरंत हटाओ नहीं तो हमारी नोकरी चली जाएगी जो तुरंत आनन फानन में संभव नहीं एक वीडियो फुटेज में थाना प्रभारी मस्जिद परिसर में बेठे यह बात कहते सुने जा रहे हैं कि मुस्लिम समाज ने मेरा बहुत सम्मान किया मेरे कहने से सब काम हुआ मेरा दिल गम से भरा है में अपनी जेब से व्यर्थ हो गये लोहे को का पूरा भुगतान भरपाई करुंगा यह अपराध बोध की स्वीकार्यता का स्पष्ट प्रमाण है फिर भी सारा दोष मुस्लिम समाज ढो रहा है यह बात सुनकर पुलिस अधिकारी भड़क गए भारी पुलिस जाप्ता अधिकारी जयपुर से आ गये मोके पर मुस्लिम समाज को मांगने पर समय ना देकर जैसीबी मशीन से रेलिंग उखाड़ना शुरू कर दिया जब जेसीबी मशीन मस्जिद के प्रांगण में चढ गई तब मुस्लिम समाजने आपत्ति की उनको गालियां दी गई लाठी चार्ज कर दिया इस पर मोजूद लोगों की भीड ने संयम खो दिया! एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि इनको मार कर भगाओ इनकी सहमति लेने की कोई जरूरत नहीं है इसके बाद पुलिस जनता में लाठी भाटा जंग शुरू हो गई! हम किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते पुलिस पर हमला निंदनीय है निश्चित रूप से पुलिस पर हमला करने वालों पर कार्रवाई बल प्रयोग जरुरी है ताकि समाज में शांति और पुलिस का इकबाल बना रहे पर यंहा सवाल यह भी है कि रात के समय में महिलाओं बच्चों को घटनास्थल से एक किलोमीटर दूर जाकर घरों में घुस कर मारपीट कर बंद करना निंदनीय और पूर्ण रूप से गेर कानूनी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की धज्जियां उड़ाना है
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार रात के समय में महिलाओं को बच्चों को पूछताछ के लिए कोई भी जांच एजेंसी अधिकारी नहीं ला सकता बिना महिला पुलिस के पुरुष पुलिस कर्मियों ने सादा वर्दी में घरों में जबरन घुस कर मारा पीटा मोबाइल से फोटो लेने पर मोबाइल फोन छीने गए महिला बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई यह भी विधि विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की घोर अवहेलना है समाज की हिंसा से राज्य की हिंसा बहुत ख़तरनाक होती है क्योंकि व्यक्ति के मुकाबले में राज्य के पास असीम ताकत होती है! यहां सवाल यह भी उठता है कि जिस समय कोर्ट स्टे प्रभावी आदेश के बाद पुलिस प्रशासन ने क्यों पत्थर मोके से हटाएं और फिर न्यायालय के आदेश के नाम पर जेसीबी से रेलिंग हटाकर वापिस पुरानी स्थिति में पत्थर लगाएं गये दोनों ही स्थितियों में कोर्ट आदेश की स्पष्ट अवहेलना हुई क्या भाजपा के नेता इसको समझेंगे जो तोड़-मरोड़ कर अपनी नफरती मानसिकता अनुसार बयान देकर और हवा में तनाव घोल रहे हैं? घटनास्थल पर पुलिस कर्मी पत्थर फेंक रहे है मोके पर नफरती संगठन के उन्मादी लोग भी नारे लगाते पथराव करते वीडियो फुटेज में नजर आ रहे हैं किसका पत्थर किसके लगा सब गढमढ है देश में अल्पसंख्यक वर्गों के साथ होने वाली हिंसा की खबरें पूरी दुनिया में देखी जाती है इससे पूरी दुनिया में देश की छवि को गंभीर खतरा होता है आज विदेश में रहने वाले भारतीय प्रवासी इसके शिकार हो रहे हैं अमरीका से भारतीयों को भगाया जा रहा है मंदिरों पर अमरीका में गोलियां अमरीकी मूल के व्यक्ति चला रहे हैं मूर्तियां तोडी जा रही है दीपावली नही मनाने देने की धमकीया दी गई है कनाडा में दो भारतीयों की हत्या कर दी है आस्ट्रेलिया में भारतीय पिट रहे हैं लंदन में लाखों लोग रेलियां निकाल कर भारतीयों को अपने देश से भगाने की मांग कर रहे हैं सारे योरोप में भारतीय पिट रहे हैं दहशत में हैं सउदी अरब से 12 हजार कामगारों को भारत डिपोर्ट कर दिया एक लाख लोग और भारत भेजने की तेयारी है पूरे गल्फ में भारत विरोधी माहोल बन रहा है पाकिस्तान जेसा दुश्मन देश इस भावना को ओर भडका रहा है बांग्लादेश में पाकिस्तान चीन मिलकर भारत विरोधी अभियान चला रहे हैं जिसके शिकार वंहा के अल्पसंख्यक हिंदू बन रहें हैं प्रतिवर्ष 12 लाख करोड़ रुपए विदेश में कार्यरत भारतीय देश में भेजते हैं जो देश की अर्थव्यवस्था में बडा योगदान है दुनिया के सबसे बड़े अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में संघ मोदी सरकार के काले नफरती कारनामे छप चुके हैं चारों ओर से दुश्मन देश से घिरे हुए हमारे देश की सुरक्षा अर्थव्यवस्था को गंभीर खतरे मुंह बाए खड़े हैं इसकी कीमत देश की आनेवाली हमारी पीढियां तक चुकाएंगी? पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश से अलग करने के लिए पाकिस्तान चीन बांग्लादेश मिलकर काम कर रहे हैं फिर भी गोबर दिमाग में लिए अंधभक्त स्वार्थी राजनेताओं का मोहरा बने देश की एकता अखंडता को पलीता लगा रहें हैं
हरियाणा में जाटों से नफरत सिखों दलितों ईसाईयों मुस्लिम समाज से नफ़रत मेघालय मिजोरम मणिपुर अरुणाचल प्रदेश के निवासियों से नफ़रत हमे किस दिशा में जा रहे हैं देश की सत्ता में बेठे धूर्त नेता और मूर्ख जनता आज समझने को तैयार नहीं है हाथों में हथकड़ी पांवों में बेड़ियां डाल भारतीयों को विदेश से भगाया जा रहा है नफरती भारतीयों के लिए दुनिया तंग होती जा रही है देश की नोकर शाही अधिकारी संविधान की नोकरी के बजाय लंपट सत्ता लोलुप नेताओं के निजी लाभ के आदेशों के गुलाम बने मलाईदार पदों पर नियुक्ति के लिए अपना जमीर आत्मा का सोदा कर चुके हैं इन सुलगते सवालों का जवाब सीधा पुलिस प्रशासन से है चौमूं की घटना में सेकडो लोग घर बार छोड़कर भाग गए हैं दर्जनों लोग गिरफ्तार हो जेल चले गए जनता का जान-माल समय कोर्ट कचहरी मुकदमों में लुट रहा है आत्मा के साथ दिलों पर गहरे ज़ख्म लिए भयभीत जनता न्याय का सवाल करना भूल खतरनाक समझ रही है जन प्रतिनिधि सासंद निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं सामाजिक संगठन न्याय मांग रहे है पर निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासन तेयार नहीं घटना में प्रशासनिक लापरवाही के अधिकारी प्रमोशन पा रहे हैं इसे ही कहते हैं लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकना हमारी चौमूं की जनता से अपील है स्वार्थी राजनेताओं की स्वार्थ पूर्ति के लिए टूल नहीं बनें शांति बनाए रखें अपनों का अपने परिवार का ध्यान रखें आप आपके परिवार के लिए अमुल्य हो आपके जेल जाने से सबसे पहले आपके आपके परिवार के बुरे दिन शुरू होते हैं कोई नेता किसी का सगा नहीं है यही आज की राजनीति राजनेताओं का चरित्र है इसे सभी को समझना चाहिए जय हिन्द जय भारत




