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Ashok Gehlot and Sachin pilot: हाय हाय रे मजबूरी, मौसम और ये दूरी, कब तक नजरें चुराएंगे गहलोत और पायलट

Ashok Gehlot and Sachin pilot: हाय हाय रे मजबूरी, मौसम और ये दूरी, कब तक नजरें चुराएंगे गहलोत और पायलट
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प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राहुल गांधी से पूछताछ के मामले में निश्चित रूप से कांग्रेस एकजुट दिखाई दे रही है । लेकिन संकट की इस घड़ी में अशोक गहलोत और सचिन पायलट अब एक दूसरे से ज़ुदा है । दोनों नेता एकसाथ दिखाई नही दे रहे है । गहलोत को देखकर पायलट कन्नी काट रहे है तो पायलट से गहलोत अभी भी दूरी बनाए हुए है ।

कांग्रेस द्वारा अनेक नेताओ की सामूहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई है । लेकिन दोनों नेताओं ने एकसाथ प्रेस को संबोधित नही किया । अगर कांग्रेस को बीजेपी से लड़ना है तो पार्टी में गुटबाजी समाप्त होंनी चाहिए वरना कांग्रेस कभी भी बीजेपी से लड़ नही पाएगी । पांच राज्यो में हुई दुर्गति से भी पार्टी ने कोई सबक नही लिया । दरअसल पार्टी का नेतृत्व पूरी तरह अक्षम और असहाय है जिसकी वजह से गहलोत और पायलट पिछले साल भर से एक दूसरे को पराजित करने के हथकंडे अपना रहे है ।

सोनिया और राहुल को चाहिए कि दोनों के बीच अविलम्ब सुलह करवाए अन्यथा राजस्थान में पार्टी जीती हुई बाजी हार सकती है । दोनों में सुलह हो जाती है तो निश्चित रूप से पार्टी फिर सत्ता पर काबिज होने के मुकाम पर पहुंच जाएगी । उदयपुर में चिंतन शिविर हुआ, लेकिन पूरी तरह फ्लॉप रहा । जब तक नेता आपस मे लड़ते रहेंगे, तब तक चिंतन शिविर का कोई औचित्य नही है । धन और समय की बर्बादी के अलावा कोई फायदा नही है इन चिंतन शिविर का ।

Shiv Kumar Mishra
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