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राजस्थान में बीजेपी ही नहीं कांग्रेस के लिए भी है करो मरो की लड़ाई!

राजस्थान में बीजेपी ही नहीं कांग्रेस के लिए भी है करो मरो की लड़ाई!
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वजह चाहे कोई भी रही हो, लेकिन अजमेर या अलवर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा ही नहीं बल्कि संसद में अपना प्रतिनिधित्व बचाए रखने का कांग्रेस के पास एक सुनहरा अवसर हाथ जरुर लगा है। क्योंकि, ऐसा नहीं होता है तो आगामी चार अप्रेल यानी ठीक तीन महीने बाद संसद के दोनों सदनों में प्रदेश कांग्रेस का कोई नुमाइंदा नहीं रह जाएगा। इसलिए, राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए और कार्यकर्ताओं में ठंडे जोश में उबाल लाने के लिए जीत की जरूरत बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस को रहेगी।
प्रदेश से लोकसभा में कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि नहीं है। राज्य सभा में भी संख्या धीरे-धीरे घटकर दो पर गई है। इनमें दोनों कांग्रेसी सांसदों का कार्यकाल आगामी तीन अप्रेल को पूरा हो रहा है और संभावना है कि राज्यसभा की इन खाली सीटों पर चुनाव होंगे। जिन पर कांग्रेस का जीतना नामुमकिन हैं। इसलिए, कांग्रेस किसी भी हालत में अलवर और अजमेर संसदीय सीट पर उपचुनाव जीतने के लिए दम लगाने की तैयारी में है। धौलपुर विधानसभा उपचुनाव की तर्ज पर भाजपा ने भी पूरी कमर कस ली है।

बीजेपी ने अजमेर और अलवर से अपने उम्मीदवारों को घोषणा कर दी है। अलवर से अजमेर लोकसभा क्षेत्र से रामस्वरूप लांबा उम्मीदवार होंगे तो अलवर लोकसभा उप चुनाव के उम्मीदवार जसवंत सिंह यादव होंगे. वहीँ मंडलगढ़ विधानसभा उप चुनाव में शक्ति सिंह हाडा उम्मीदवार होंगे।

वहीँ, कांग्रेस ने अलवर लोकसभा से डॉ कर्ण सिंह को उम्मीदवार बनाया ही तो अभी अजमेर से घोषणा नहीं कर पाई है, कारण चाहे जो रहा हो अजमेर से पहले सचिन पायलट सांसद रह चुके है जो अब मौजूदा प्रदेशा अध्यक्ष भी है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी एवं नरेंद्र बुढानिया और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव 4 अप्रैल, 2012 को राज्य सभा सांसद चुने गए थे। इनका कार्यकाल इस साल तीन अप्रेल को पूरा हो रहा है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को कोई सीट हासिल होगी। इसकी संभावना दूर-दूर तक नहीं है। भाजपा आसानी से तीनों सीटें जीतने की स्थिति में होगी। ऐसा होते ही राज्य सभा में प्रदेश से कोई भी सांसद नहीं रह जाएगा।

प्रदेशमें राज्य सभा की 10 सीटें हैं। इनमें सात सीट पर भाजपा और दो पर कांग्रेस के सदस्य काबिज है। केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू के उपराष्ट्रपति चुने जाने से राज्य सभा की एक सीट रिक्त हो गई है। इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा कभी हो सकती है। यह सीट भाजपा की झोली में जाना तय है। निर्वाचित सांसद का कार्यकाल वर्ष 2022 तक रहेगा। इस सीट से हाल में केंद्रीय मंत्री परिषद में शामिल मंत्रियों में से किसी एक को राज्य सभा भेजा जाना लगभग तय है।
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