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राजस्थान में नए सीएम की तलाश: ममता भूपेश पर खेल सकते है गहलोत दांव

कांग्रेस पंजाब की तरह क्या राजस्थान में खेलेगी दलित चेहरे पर खेल?

राजस्थान में नए सीएम की तलाश: ममता भूपेश पर खेल सकते है गहलोत दांव
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अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री पद से हटना लगभग तय होगया है । लेकिन उनकी गद्दी पर कौन काबिज होगा, यह तस्वीर अभी स्पस्ट नही है । उधर गहलोत के समर्थकों ने उनके लिए सिविल लाइंस में बंगला ढूढंना प्रारम्भ कर दिया है । सम्भवतया गहलोत सिविल लाइंस स्थित बंगला नम्बर 48 में शिफ्ट हो सकते है । इस बंगले में फिलहाल खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास निवास कर रहे है । अगर सीपी जोशी मुख्यमंत्री बन जाते है तो गहलोत उस बंगले में जाना पसंद करेंगे । इस बंगले में सीएम बनने से पहले गहलोत यही निवास कर रहे थे ।

उधर राजनीतिक गलियारों में खबर है कि गहलोत कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के लिए तो राजी होगये है । लेकिन उन्होंने स्पस्ट कर दिया है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार रिपीट होगी, इसकी वे कतई गारंटी नही लेते है । यदि उनके पसंद के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो पुनः सरकार बनने की संभावना है । जहां तक नए मुख्यमंत्री का सवाल है, वे ममता भूपेश के नाम को आगे कर सकते है । गहलोत का एकमात्र उद्देश्य होगा कि सचिन पायलट किसी भी हालत में मुख्यमंत्री नही बन पाए । इसलिए ममता भूपेश के नाम को आगे रखकर सचिन की राह में गहलोत कांटे बिछाने की कोशिश करेंगे ।

नए सीएम के लिए सीपी जोशी, बीडी कल्ला, डॉ जितेंद्र सिंह, शांति धारीवाल के अलावा गोविंद सिंह डोटासरा के नामो की चर्चा है । लेकिन ममता भूपेश एक ऐसा नाम है जिस पर आलाकमान को भी कोई उज्र नही हो सकता है । महिला होने के अलावा वे अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती है । जिस तरह पंजाब में चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया गया था, वही प्रयोग राजस्थान में भी किया जा सकता है । चन्नी भी अनुसूचित जाति से है । उन्होंने बेहतर कार्य किया था । लेकिन नवजोतसिंह सिद्धू ने उनकी लुटिया डुबोने में कोई कसर नही रखी । शालीन होने के अलावा ममता भूपेश की परफॉर्मेंस भी ठीक है ।

गहलोत के 50 वर्षीय राजनीतिक जीवन मे यह पहला मौका है जब सचिन पायलट के कारण उनको सीएम की कुर्सी से बेदखल होना पड़ रहा है । यह गहलोत की बहुत बड़ी राजनीतिक पराजय है जिसे वे आजीवन कभी भुला नही पाएंगे । इसलिए उनकी हर सम्भव कोशिश यही रहेगी कि पायलट के स्थान पर किसी को भी सीएम बनाया जाए । उन्हें हर नाम मंजूर होगा, लेकिन सचिन पायलट के नाम पर वे राजी हो जाएंगे, इसकी संभावना कम नजर आती है । ऐसे में गहलोत विधायक दल की बैठक द्वारा भी सीएम चयन का दांव खेल सकते है । अधिकांश विधायको ने उन्होंने पहले से पटा रखा है ।

उधर सचिन भी कमजोर नही है । पिछले ढाई साल से वे इसलिए खमोश बैठे थे कि कभी तो उनके साथ न्याय होगा । उनको कई बार भड़काने या उत्तेजित करने की कोशिश की । लेकिन उन्होंने कभी अपना संयम नही खोया । धैर्य के साथ वे सबकुछ सहते भी रहे और सुनते भी रहे । सोनिया गांधी ने उनसे वादा किया था कि उनके साथ न्याय अवश्य होगा । समय अवश्य लगा है, लेकिन सचिन पायलट पूरी तरह आश्वस्त है कि अंततः उनकी वफादारी और धैर्य का सही मूल्यांकन हो रहा है ।

गहलोत का नामांकन दाखिल करना तय है । वे चुनाव लड़ रहे है तो उनकी जीत भी सुनिश्चित है । अध्यक्ष बनने के बाद वे तुरन्त ही मुख्यमंत्री निवास (8, सिविल लाइंस) खाली करना पसंद करेंगे । सचिन पायलट सीएम बनते है तो उनका बंगला भी खाली हो जाएगा । लेकिन गहलोत इस बंगले में जाना पसंद नही करेंगे । उनकी पहली प्राथमिकता सीपी जोशी वाले बंगले की रहेगी और दूसरी प्राथमिकता होगी प्रताप सिंह खाचरियावास वाले बंगला नम्बर 48 की ।

वैसे बंगला नम्बर 14 भी बहुत आलीशान है । लेकिन इस बंगले पर पिछले 24 साल से विधायक नरपत सिंह राजवी काबिज है । वे यह बंगला खाली करेंगे, इसकी संभावना नजर नही आती है । हालांकि जीएडी द्वारा उन्हें यह बंगला खाली करने के लिए कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है । अदालत ने भी उनकी दरख्वास्त को खारिज कर दिया है । बावजूद इसके वे खाली नही कर रहे है । वरिष्ठता के आधार पर उनको यह बंगला आवंटित किया जा सकता है । लेकिन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी द्वारा उनके प्रार्थना पत्र पर एक साल से कोई निर्णय नही लिया गया है । गहलोत इस बंगले में आएंगे, इसकी संभावना कम है ।

उधर गहलोत के सीएम पद छोड़ने की खबर के बाद सचिवालय में खबरों का बाजार गर्म होगया है । सीएम के नजदीक अफसर अपनी फाइल और कागज, पत्तर समेटने में सक्रिय होगये है । सीएमओ में भी मुर्दनी छा गई है । नया सीएम आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सचिवालय में आएगा । हो सकता है कि मुख्य सचिव उषा शर्मा भी बदल जाए । इसके अलावा कुलदीप रांका, अखिल अरोड़ा, सुबोध अग्रवाल, अभयकुमार की भी वर्तमान पद से छुट्टी हो सकती है । सीएमओ में भी आमूलचूल परिवर्तन होना स्वाभाविक है ।

महेश झालानी
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