
हवा महल के बाहर आत्महत्या की धमकी देते बीएलओ के वायरल वीडियो की खबर नहीं
महाराष्ट्र में भाजपा को सरकार होने का लाभ फिर मिला। इसलिए याद करना जरूरी है कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनी कैसे थी। लेकिन अखबारों ने दूसरे गुण गिनाए हैं। सच यह है कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनवाने में दलबदल कानून, सुप्रीम कोर्ट और विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका, राज्यपाल का इस्तीफा सबको याद करना बनता है। लेकिन अखबारों ने बताया है, हिन्दुत्व में भरोसा, विकास का एजेंडा लेकर आगे बढ़ेंगे (अमर उजाला), 1996 से चल रहा ठाकरे राज खत्म हुआ (देशबन्धु) और जो पहले नहीं हुआ वो इस बार हो गया (नवोदय टाइम्स)। अंग्रेजी अखबारों में पवार और ठाकरे परिवार का गठजोड़ चुनाव में नाकाम रहा (द टेलीग्राफ), ठाकरे भाइयों पर विजय (इंडियन एक्सप्रेस), परिवारों का साथ आना नाकाम रहा (हिन्दुस्तान टाइम्स), ट्रिपल इंजन सरकार मुमकिन है (टाइम्स ऑफ इंडिया) और अंत में प्रधानमंत्री ने कहा है, जनहित वाले हमारे शासन ने मतदाताओं से तालमेल बिठाया था (दि एशियन एज)।
चुनाव चोरी, वोट चोरी के आरोपों के बावजूद मुंबई नगर निकाय चुनाव के नतीजे आज दिल्ली ही नहीं कोलकाता के टेलीग्राफ में भी लीड है। चुनाव आयोग की चुप्पी और एसआईआर के तहत जो हो रहा है उससे संबंधित खबरें बताती हैं कि सब सामान्य नहीं है और नियमानुसार तो नहीं ही है। एक जज के खिलाफ कार्रवाई की जल्दबाजी, दूसरे के खिलाफ सन्नाटा भी व्यवस्था के पक्षपात की शंका पैदा करता है। लेकिन अखबारों की खबरों से ऐसा आम पाठक को नहीं लगेगा। एसआईआर से संबंधित तमाम गड़बड़ियों की खबरों के बीच कल सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल था।
दलबदल, विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच महाराष्ट्र में राज्यपाल का इस्तीफा भी हुआ था। आइए, इस मामले को संक्षेप में याद कर लें। 2019 विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और महाविकास आघाडी सरकार में शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी शामिल थीं। 21 जून 2022 को शिवसेना के कोई 40 विधायकों में से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में करीब 16 विधायक बागी हो गए। उन्होंने भाजपा के सहयोग से सरकार बदलने की कोशिश की। राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को फ्लोर टेस्ट (विश्वास मत) का सामना करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाने से इनकार किया। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट के बगैर इस्तीफा दे दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर उद्धव ठाकरे इस्तीफा नहीं देते और फ्लोर टेस्ट का सामना करते, तो कोर्ट उनकी सरकार को बहाल कर सकता था। हुआ यह कि राज्यपाल का फ्लोर टेस्ट का आदेश कानून के अनुसार नहीं था, सुप्रीम कोर्ट ने स्टे करने से मना कर दिया। उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट में हार का सामना करने की बजाय इस्तीफा दिया बाद में जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इस्तीफा दे दिया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने शिंदे गुट के बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिका दी थी। स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बागी विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराया और शिंदे गुट को पक्ष में रखा। इसके खिलाफ उद्धव गुट सुप्रीम कोर्ट भी ले गया, लेकिन अध्यक्ष ने फैसला लेने में देरी/सख्ती नहीं दिखाई — जिससे मामला लंबित भी रहा।




