जयपुर

तो क्या फिर बर्खास्त होंगे कल्याण सिंह!

Special Coverage News
12 April 2019 4:19 PM IST
तो क्या फिर बर्खास्त होंगे कल्याण सिंह!
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एक बार उत्तर प्रदेश में सरकार के दौरान राममंदिर आंदोलन के चलते भी कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। उस दौरान तीन सरकार बर्खास्त हुई थी। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई और कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी माना है। आयोग का कहना है कि वह इस मामले में राष्ट्रपति को पत्र लिखेगा। कल्याण सिंह एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं और उनके बारे में राष्ट्रपति ही कोई निर्णय ले सकते हैं। तो क्या फिर से बर्खास्त होंगे कल्याण सिंह?

चुनाव आचार संहिता के संबंध में राष्ट्रपति को कई चिट्ठियां लिखे जाने की सूचना औऱ खबर है। इनमें एक तो चुनाव आयोग द्वारा राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के खिलाफ लिखा गया पत्र भी है। इससे संबंधित खबर दो अप्रैल को आई थी। इसकी अभी ना पुष्टि हुई है ना खंडन हुआ है। इन सभी मामलों में क्या कार्रवाई हुई कोई नहीं जानता। पत्र राष्ट्रपति भवन में पहुंच गए इसकी कोई सूचना भी नहीं है।

लेकिन सेना के दिग्गजों ने पत्र लिखा और सेना की कार्रवाई का श्रेय लेने की "राजनीतिकों" की कोशिश की निन्दा की तो राष्ट्रपति भवन का खंडन आ गया कि पत्र नहीं मिला है जबकि खबर है कि यह पत्र कल आधी रात के बाद सार्वजनिक हुआ। खंडन दिन में 12 बजे के करीब का है। वाह रे फुर्ती ... अब राष्ट्रपति भवन भी? पत्र से संबंधित खबर का अंश इस प्रकार है। गनीमत है कि यह खबर एएनआई की नहीं है।

पूर्व नौकरशाहों के बाद अब सेना के दिग्गजों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ में प्रकाशित एक खबर के अनुसार कम से कम आठ पूर्व सेना प्रमुख और कई अन्य दिग्गजों ने सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को पत्र लिखकर मांग की है कि सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया जाए कि वे तत्काल सेना और सेना की किसी कार्रवाई का उपयोग राजनीतिज्ञों उद्देश्यों के लिए न करें। अपनी तरह की यह अनूठी अपील है कल आधी रात के बाद प्रकाश में आई। यह पत्र नहीं पहुंचा इसकी सूचना राष्ट्रपति भवन से आ गई है। इसका मतलब हुआ पहले वाले सब मिल गए हैं। कार्रवाई हो रही है।


23 मार्च को अलीगढ़ में दिया था बयान

कल्याण सिंह ने बीती 23 मार्च को अलीगढ़ में कहा था कि हम सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं। इस नाते से हम चाहेंगे कि भाजपा विजयी हो और केंद्र में मोदी ही प्रधानमंत्री बनें। उनका प्रधानमंत्री बनना देश और समाज के लिए आवश्यक है।

कल्याण सिंह ने अलीगढ़ में भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम को लेकर चल रहे विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं से ये बात कही थी। उनका कहना था कि पार्टी के निर्णय का सम्मान करें और उसे स्वीकार करें।

दरअसल, भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति ने अलीगढ़ के मौजूदा सांसद सतीश गौतम पर फिर से भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन उनका क्षेत्र में विरोध तेजी से हो रहा है। नाराज कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी ने जिसे प्रत्याशी घोषित किया है, वह कभी क्षेत्र में नहीं आए।

गुलशेर अहमद को छोड़ना पड़ा था पद

1990 में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल गुलशेर अहमद ने चुनाव में अपने बेटे के लिए प्रचार किया था। चुनाव आयोग ने उन्हें भी आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी माना था। तब गुलशेर को पद छोड़ना पड़ा था।


बता दें कि एक बार उत्तर प्रदेश में सरकार के दौरान राममंदिर आंदोलन के चलते भी कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। उस दौरान तीन सरकार बर्खास्त हुई थी। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई और कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

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