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Sachin Pilot : सचिन पायलट बन गए है विधायकों की पहली पसंद

गहलोत अंत तक रायता फैलाने की करेंगे कोशिश

Sachin Pilot : सचिन पायलट बन गए है विधायकों की पहली पसंद
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भले ही अशोक गहलोत इस पक्ष में नही है कि सचिन पायलट को उनके उत्तराधिकारी के तौर पर मुख्यमंत्री बनाया जाए । लेकिन कांग्रेस सहित अधिकांश निर्दलीय विधायक अंदरूनी मन से पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के पक्षधर है । बदली हुई परिस्थितियों में यदि गुप्त वोटिंग होती है तो 70 से ज्यादा विधायक पायलट को मुख्यमंत्री बंनाने के पक्ष में अपना समर्थन देंगे ।

जैसा कि मैंने पहले लिखा था कि सचिन पायलट के सामने गहलोत घुटने टेकने को तैयार नही होंगे । इसलिए वे मत विभाजन के आधार पर सीएम बनाने की चाल चल रहे है । उसी के अनुरूप विधायको की नब्ज टटोलने के लिए मुख्यमंत्री निवास पर शाम को बैठक आयोजित की गई है । वरिष्ठ नेता मल्लिकाजुर्न खड़गे और प्रभारी महासचिव अजय माकन विधायकों से बातचीत कर उनके मन की थाह लेकर अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौपेंगे ।

यह सही है कि ज्यादातर विधायक गहलोत के पक्ष में थे । लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में गहलोत समर्थक काफी विधायक पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में है । बसपा से आए 6 विधायको ने साफ तौर पर पायलट को सार्वजनिक रूप से समर्थन देने का ऐलान कर दिया है । पिछले दो दिनों में पायलट के पक्ष में विधायकों का सैलाब उमड़ता दिखाई दे रहा है । चूंकि गहलोत का दिल्ली जाना तय होगया है तो अब विधायकों की पहली पसंद पायलट बन गए है । विधायक बखूबी जानते है कि चुनावो में पायलट के अलावा अन्य किसी की ऐसी हैसियत नही है जो नैया पार करा सके ।

विधायक अपने भविष्य के प्रति चिंतित है । वे जानते है कि बीडी कल्ला, गोविंद सिंह डोटासरा या शान्ति धारीवाल के नाम पर लोगों की भीड़ एकत्रित नही की जा सकती है । यह चमत्कार सीपी जोशी को भी हासिल नही है । पायलट ही एकमात्र ऐसे नेता है जो कांग्रेस को पुनः सत्ता पर काबिज करा सकते है । वरना डोटासरा जैसे लोग बुझे हुए कारतूस है । उनके क्षेत्र शेखावटी में ही कांग्रेसी विधायक कारसेवा करने में लगे हुए है । कल्ला का बीकानेर और धारीवाल का कोटा से बाहर कोई प्रभाव नही है । इसके अलावा जोशी भी कांग्रेस के सर्वग्राह्य नेता नही है ।

यद्यपि अशोक गहलोत की अंतिम क्षणों तक यही कोशिश रहेगी कि पायलट के अलावा किसी भी व्यक्ति को सीएम बना दिया जाए । लेकिन अंततः होगा वही जो आलाकमान चाहेगा । अगर आलाकमान का निर्देश नही मिलता तो गहलोत कभी भी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए राजी नही होते । केरल जाने से पूर्व वे दहाड़कर बोल रहे थे कि वे अध्यक्ष के अलावा सीएम का पद भी संभालेंगे । लेकिन राहुल के निर्देश के बाद उन्होंने गिरगिट को भी मात कर दिया । सुर एकदम बदल गए । जो व्यक्ति दो पद संभालने के लिए दो सम्भालने की पैरवी कर रहा था, राहुल से मिलने के बाद गहलोत ने बयान दिया कि अध्यक्ष के लिए एक साथ दो पद सम्भालना व्यवहारिक नही है ।

विधायकों का सम्मान रखने के लिए विधायक दल की बैठक में उनकी राय जानने का स्वांग रचा जाएगा । लेकिन सीएम का नाम दिल्ली से ही तय हो चुका है । केवल औपचारिक घोषणा होना बाकी है । आज शाम को परम्परा के अनुसार एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर फैसला लेने का अधिकार आलाकमान को सौंपा जाएगा । इसके बाद दिल्ली से किसी भी दिन नए सीएम की घोषणा हो सकती है ।

पता चला है कि आलाकमान की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार पायलट विधायकों की पहली पसंद है । गहलोत जोड़तोड़ में तो माहिर है, लेकिन वे चुनाव जिताने में सक्षम नही है । उनके नेतृत्व में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा था । जहां तक अन्य नेता जैसे डोटासरा, कल्ला या धारीवाल का सवाल है,

इनका कद मुख्यमंत्री लायक नही है । मंत्री थे और मंत्री ही रहेंगे । सीपी जोशी अपनी तुनकमिजाजी के कारण कुख्यात है । जबकि सीएम के लिए ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो विनम्र हो । पायलट इस कसौटी पर खरे उतरते है । इस सर्वे के बाद ही आलाकमान ने मानस बना लिया है कि मुख्यमंत्री किसे बनाना है ।

विधायकों को समझ जाना चाहिए कि यह सारा तमाशा क्यों हो रहा है । दरअसल सोनिया ने पायलट को भरोसा दिया था कि उनके साथ जो अन्याय हुआ है, उसको दुरुस्त किया जाएगा । उस दुरुस्तीकरण के तहत ही गहलोत से सीएम पद छोड़ने को कहा गया है । हालांकि गहलोत आलाकमान के रुख से बखूबी वाकिफ है । लेकिन वे केवल इतना चाहते है कि पायलट को सीएम नही बनाया जाए । हो सकता है कि वे अपने समर्थक विधायकों को दिल्ली भेजकर यह मांग भी कर सकते है । लेकिन सोनिया अपने निर्णय में कोई बदलाव करेगी, इसकी संभावना कम नजर आती है । लेकिन राजनीति में ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, कोई भी इसकी भविष्यवाणी नही कर सकता ।

Shiv Kumar Mishra
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