
राजस्थान में गुर्जरों को आरक्षण देने का बिल पारित, संतुष्ट नही गुर्जर

जयपुर: राजस्थान विधानसभा ने गुरुवार को एक बार फिर गुर्जरों और पांच अन्य पिछड़ी जातियों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने का बिल पारित कर दिया, हालांकि सत्तारू़ढ़ भाजपा के ही कुछ विधायक और खुद गुर्जर समुदाय इस बिल के प्रावधानों से संतुष्ट नहीं है। गुर्जरों का कहना है कि सरकार ने समझौते के अनुरूप विधेयक नहीं बनाया और अब हम फिर एक बार समाज के बीच जाकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
गुर्जरसहित पांच जातियों के लिए शिक्षा नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण के रास्ते खुल गए हैं। गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान पिछड़ा वर्ग (राज्य की शैक्षिक संस्थाओं में सीटों और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों और पदों का आरक्षण) विधेयक 2017 पारित हो गया। अब जल्द ही राज्य सरकार नोटिफिकेशन जारी करके ओबीसी आरक्षण 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत करेगी। हालांकि विधायक प्रहलाद गुंजल, घनश्याम तिवाड़ी, हनुमान बेनीवाल, माणिकचंद सुराणा सहित कई विधायकों ने कहा कि इस तरह से आरक्षण देने के लिए केंद्र में अमेंडमेंट का प्रोसेस राज्य सरकार को पूरा कराना चाहिए था। विधेयक के प्रावधानों में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने इसका वर्गीकरण किया जाना चाहिए था।
सदनमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति तथा पिछड़ा वर्ग आयोग के द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद ही यह विधेयक लाया गया है। सरकार द्वारा नियुक्त जस्टिस गर्ग की समिति एवं राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपने प्रतिवेदनों में निष्कर्ष निकाला है कि इंद्रा साहनी के मामले में परिकल्पित विशेष परिस्थितियां राज्य में विद्यमान है और 50% की सीमा से आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
विधानसभा में जब यह बिल चर्चा के लिए रखा गया तो भाजपा विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि सरकार को सिर्फ अधिसूचना जारी करने की शक्ति लेने के लिए बिल लाने की जरूरत नहीं थी। सरकार ओबीसी का कोटा बढ़ाना चाहती थी तो इसे विधेयक में शामिल करना चाहिए था। असंतुष्ट विधायक घनश्ययाम तिवाड़ी ने कहा कि सरकार जब भी अधिसूचना जारी करेगी तो वह कोर्ट में टिक नहीं पाएगी, क्योंकि अधिसूचना के कारण राज्य में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से ज्यादा हो जाएगा। फूलचंद भिंडा ने कहा कि सरकार इतना ध्यान रखे कि इस आरक्षण के कारण ओबीसी में पहले से शामिल जातियों पर कोई प्रभाव न पड़े।
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा कि हमारा सरकार से जो समझौता हुआ था, उसमें साफ कहा गया था कि सरकार जब विधेयक लाएगी तो उसमें साफ तौर पर लिखा जाएगा कि ओबीसी का कोटा 21 से बढ़ाकर 26 प्रतिशत किया जाता है और इसमें गुर्जर सहित पांच अति पिछड़ी जातियों को अति पिछड़ा वर्ग में अलग से पांच प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। लेकिन सरकार ने मूल विधेयक में इसका उल्लेख ही नहीं किया। सरकार अधिसूचना के जरिए आरक्षण देना चाहती है जो कोर्ट में टिक ही नहीं पाएगी और गुर्जरों को फिर निराश होना पड़ेगा। सरकार ने वादा खिलाफी की है। यह कहा सरकार ने सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अण चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार यह बिल सामाजिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर लाई है और कोर्ट ने जो कमियां बताई थीं, उन्हें दूर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट अपने कई निर्णयों में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक करने की बात कह चुका है, इसलिए जो आशंकाएं बताई जा रही है, वे निर्मूल हैं।




