

भारत में कृषि, सिंधु घाटी की सभ्यता के दौर से की जाती रही हैं, 1960 के बाद कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के साथ नया दौर आया।
हमारा देश भारत कभी कृषि प्रधान देश हुआ करता था, और किसान भी अपनी फसल को सही तरीके से उपजाऊ बनाने व फसल को लेकर अत्यधिक मेहनत करते थे, परन्तु कुछ समय से भारत में किसानों की स्थिति बहुत ही ज्यादा निंदनीय होती जा रही हैं, आय दिन आत्महत्या,गरीबी,कर्ज, बीमारियों से किसान बुरी तरह से पीड़ित हो जा रहा हैं।
परंतु परिस्थितियों ने किसानों को कृषि न करने को मजबूर कर दिया क्योंकि न तो सरकार द्वारा उनकी फसल की लागत सही से मिल पाती और न ही सही दाम लग पाता है, जिससे उनको ऐसी स्थितियों का सामना करना पड रहा है, आज प्रत्येक राज्य के किसान की स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हैं। और सरकार भी आज के समय में किसानों को सिर्फ और सिर्फ मूर्ख और राजनीति के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ बहुत बड़ा मजाक सरकार ने उनके खातो में चंद पैसे, 1-2 रूपया आदि डालकर किया, दूसरा मध्य प्रदेश के किसानों का भी मुद्दा अभी पिछले दिनों गंभीर रूप लिए हुए था, हाल ही में एक घटना उत्तर प्रदेश राज्य के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना कस्बे में एक चीनी मिल द्वारा उनका बकाया नहीं दिया जा रहा था, जिसको लेकर वहाँ के किसानों की स्थिति बहुत गंभीर थी, उनकी आवाज भी एक किसान नेता द्वारा उठाई गयी, धरना प्रदर्शन किये गये।
सत्ताधारी पार्टी को छोडकर सभी राजनैतिक,सामाजिक व कृषिक पार्टी व उन लोगों ने मिलकर इन किसानों के भुगतान कराने में मदद की और लगभग लगभग वहाँ के किसानों का भुगतान हुआ। इस तरह की घटनाएं हमारे देश में हमारे अन्नदाता के साथ हो रही हैं जो कि एक चिंता का विषय है। हमारे समाज के कुछ लोगों की स्थिति इतनी बुरी हैं कि वो सही गलत की पहचान ढंग से नहीं कर पाते हैं और गलत दिशा में अग्रसर हो जाते हैं।
आय दिन पक्ष-विपक्ष में बैठे नेतागण लोग जो कि जनता द्वारा बनाये गये हैं और फिर किसानों के ऊपर अभद्र टिप्पणी करते हैं, और फिर किसानों को लेकर राजनीति शुरू हो जाती हैं और राजनीति का शिकार होकर पिसता रहता है बेचारा किसान। और जो नेता वास्तव में किसानों के हक के लिए कार्य करता है उनकी मदद करने का कार्य करता है फिर उनको भी लोग गलत नजरिये से देखते हैं। आज वास्तव में हमारे समाज की स्थिति इतनी बुरी हो गयी है कि उनको यह ही नहीं पता कि कौन सही है और कौन गलत?
आज गलत चीज सर्वोपरि हैं और जो सही है उसको कोई सुनने या देखने को तैयार नहीं हैं। मेरे सर्वे के दौरान मैं कई किसानों से मिला और रूबरू हुआ और उनकी स्थिति जानी। वास्तव में किसान की स्थिति और जिंदगी आज के समय में बहुत बरतर बन चुकी हैं, कुछ किसानों की स्थिति यह है कि अगर सुबह की रोटी नसीब हुई तो शाम का भरोसा नहीं कि कुछ मिलेगा भी या नहीं।
भारत आज कृषि प्रधान देश सिर्फ बातो में ही रह गया है अर्थात आज भारत आज कृषि प्रधान देश नहीं रहा बल्कि आज उधोगों के क्षेत्र में वृद्धि कर रहा है और उधोग प्रधान देश हो गया। अगर देश में यही हाल किसान का रहा तो एक दिन कृषि और किसान का वर्चस्व ही खत्म हो जाएगा और हमारा देश दूसरो पर आश्रित हो जाएगा। महात्मा गांधी जी द्वारा एक अभियान चलाया गया था, स्वदेशी अपनाओ, परंतु अगर देश के किसान की यही हालत रही तो यह कथन सिर्फ इतिहास के पन्नों पर ही लिखा रह जाएगा और छात्रों को शिक्षा के दौरान यह सब बस पढाने मात्र होगा।
ऐ भोले किसान!
एक तू बोलना सीख,
दूसरा अपने दुश्मनों को पहचानना सीख।।
अगर किसान खेती नहीं करेगा तो करेगा क्या? यह बहुत बड़ा व चिंता का अहम सवाल खडा होता है, जिस पर चिंतन-मनन करना देश के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य हैं।
Chaudhary Rajat Fore
BSW from Delhi university.
MSW student
Udaipur school of social work,
Udaipur(Rajasthan)




