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राजस्थान विधानसभा में विवादित बिल पर मचा हंगामा, BJP विधायक भी आए विरोध में

आनंद शुक्ल
23 Oct 2017 2:27 PM IST
राजस्थान विधानसभा में विवादित बिल पर मचा हंगामा, BJP विधायक भी आए विरोध में
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राजस्थान में विधानसभा सत्र सोमवार को विपक्ष के हंगामे से शुरू हुआ। कांग्रेस ने लोकसेवकों (Public Servant) के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार से मंजूरी लेने संबंधी बिल में अमेंडमेंट (संधोशन) का मुद्दा उठाया।

जयपुर: राजस्थान में विधानसभा सत्र सोमवार को विपक्ष के हंगामे से शुरू हुआ। कांग्रेस ने लोकसेवकों (Public Servant) के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार से मंजूरी लेने संबंधी बिल में अमेंडमेंट (संधोशन) का मुद्दा उठाया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कार्यवाही में बाधा नहीं पहुंचाने को कहा। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि वे सदन की कार्यवाही ठीक से चलने दें, लेकिन कांग्रेसी विधायक नहीं माने और नारेबाजी करने लगे। बता दें कि इस बिल के दायरे में अफसर ही नहीं, भ्रष्ट नेता भी आएंगे। लॉ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बिल के कई प्रोविजंस असंवैधानिक (Unconstitutional) हैं। वसुंधरा सरकार इस सत्र में CRPC में संशोधन विधेयक समेत 6 बिल पेश करना चाहती है। उधर, इस बिल के खिलाफ हाईकोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है।

बिल के दायरे में अफसरों के साथ ही नेता भी हैं। सरकार ने इस बिल से पहले जारी किए अध्यादेश में लोकसेवक का दायरा बढ़ा दिया। इसके तहत किसी भी कानून के तहत लोकसेवक कहलाने वाले इसमें शामिल कर दिए। यानी कि पंच-सरपंच से लेकर विधायक तक पर सरकार की मंजूरी के बिना केस दर्ज नहीं हो पाएगा।

भाजपा के विधायक घनश्याम तिवारी व माणकचंद सुराणा ने सदन के अंदर इसका विरोध किया और कहा कि सरकार ने आपातकाल जैसी स्थिति ला दी है। तिवारी इस विधेयक का विरोध करते हुए सदन से बाहर चले गये। सदन शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने बोलना शुरू कर दिया और विधेयक का विरोध किया। सदन में आज हंगामा भी हुआ।

इस विधेयक का विरोध जताने के लिए कांग्रेस के विधायक आज मुंह पर काली पट्टी बांध कर एवं गले में तख्ती लटका कर विधानसभा पहुंचे। वे पश्चिम द्वार से विधायक आवास से पदयात्रा करते हुए विधानसभा पहुंचे थे। इस विधेयक के विरोध में कांग्रेस के विधायक राज्यपाल कल्याण सिंह से मिल कर उन्हें ज्ञापन भी देंगे।

राजभवन तक कांग्रेस निकालेगी मार्च

बिल को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस सोमवार को विधानसभा से राजभवन तक मार्च भी निकालेगी। राज्यपाल के जरिये राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा जाएगा। जरूरत हुई तो पार्टी इसे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में चुनौती देगी। बता दें कि राहुल गांधी ने रविवार को सीएम वसुंधरा राजे पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा था, 'मैडम चीफ मिनिस्टर, हम 21वीं सदी में रहते हैं, यह 2017 है, 1817 नहीं।' राहुल ने बिल से संबंधित खबर भी टैग की थी। उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि राज्य की जनता ने बीजेपी को मनमानी करने के लिए प्रचंड बहुमत नहीं दिया है। यह बिल भ्रष्टों को बचाने के लिए लाया जा रहा है।
क्या कहना है सरकार का?
गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति पर कायम रहते हुए सरकार ने कहीं भी भ्रष्ट पब्लिक सर्वेंट्स को प्रोटेक्शन देने की बात नहीं कही है। सरकार कि मंशा इतनी ही है कि कोई शख्स कानून का गलत इस्तेमाल कर ईमानदार और काम करने वाले पब्लिक सर्वेंट की इमेज खराब न कर सके।"
पीआईएल दायर हाईकोर्ट में
इस बिल के खिलाफ हाइकोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि सरकार कानून बनाकर करप्शन करने वालों को बचाने की कोशिश कर रही है। राजस्थान हाइकोर्ट के सीनियर एडवोकेट ऐके जैन ने सोशल वर्कर भगवत कॉर की तरफ से ये पिटीशन दायर की।
सत्र से पहले सीएम ने बुलाई थी बैठक
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधानसभा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व भाजपा विधायक दल की बैठक ली है। जिसमें उन्होंने कहा है कि विपक्ष के हमलों का जोरदार जवाब दिया जाए। इससे पहले विधानसभा पहुंचे सरकार के कई मंत्रियों ने पुन: दोहराया कि यह बिल भ्रष्ट लोकसेवकों को बचाने के लिए नहीं बल्कि ईमानदार लोकसेवकों को झूठे मुकदमों में फंसने से रोकने के लिए है।

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