धर्म-कर्म

आषाढ़ मास का है विशेष महत्व, जानिए हिंदू पंचांग के इस मास में कब कौन सा है व्रत-त्योहार

आषाढ़ मास का है विशेष महत्व, जानिए हिंदू पंचांग के इस मास में कब कौन सा है व्रत-त्योहार
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हिंदू वर्ष के सभी महीनों के नाम चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं। चंद्रमा जिस नक्षत्र में मौजूद होता है उस नक्षत्र के नाम से हिंदू वर्ष के महीनों का नाम रखा जाता है।

हिंदू धर्म शास्त्रों में, हर एक महीने का अपना-अपना और विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास वर्ष का चौथा महीना होता है जो ज्येष्ठ मास के पश्चात प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास कई मायनों में बेहद खास माना जाता है। आषाढ़ के महीने में कई प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं तथा इस माह में देवशयनी एकादशी जैसे कई शुभ पर्व भी पड़ते हैं। आषाढ़ मास में विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना होती है। इस महीने में प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा सहित विभिन्न व्रत और त्योहार पड़ते हैं। आषाढ़ की समाप्ति 24 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा के दिन होगी।

आषाढ़ मास के व्रत एवं त्योहार

27 जून - गणेश चतुर्थी

28 जून - पंचक काल प्रारंभ

02 जुलाई - शीतलाष्टमी

05 जुलाई - योगिनी एकादशी

07 जुलाई - प्रदोष व्रत

08 जुलाई - मासिक शिवरात्रि

09 जुलाई - अमावस्या

11 जुलाई - गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ

12 जुलाई - जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ

13 जुलाई - विनायक चतुर्दशी व्रत

16 जुलाई - कर्क संक्रांति

18 जुलाई - गुप्त नवरात्रि का पारण

20 जुलाई - ईद-उल-अजहा या बकरीद

20 जुलाई - देवशयनी एकादशी, चतुर्मास या चौमासा प्रारंभ

21 जुलाई - प्रदोष व्रत, वामन द्वादशी

22 जुलाई - विजया पार्वती व्रत व मंगला तेरस

24 जुलाई - आषाढ़ पूर्णिमा।

हिंदू वर्ष के सभी महीनों के नाम चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं। चंद्रमा जिस नक्षत्र में मौजूद होता है उस नक्षत्र के नाम से हिंदू वर्ष के महीनों का नाम रखा जाता है। ज्योतिष बताते हैं कि, आषाढ़ के महीने में चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मौजूद होता है, इसलिए इस महीने का नाम आषाढ़ रखा गया है। अगर इस महीने की पूर्णिमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में पड़ती है तो यह एकादशी तिथि अत्यंत कल्याणकारी होती है। यह योग सर्वोत्तम माना जाता है और इस नक्षत्र में 10 विश्वदेवों की उपासना का विधान है।

यह महीना स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है क्योंकि आषाढ़ महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है। जानकार बताते हैं कि वर्षा ऋतु में रोगों का संक्रमण बढ़ जाता है इसीलिए लोगों को आषाढ़ के महीने में मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू जैसे कई रोगों से सतर्क रहना चाहिए।

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