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ऐसे है बाबा नींव करोरी महाराज

ऐसे है बाबा नींव करोरी महाराज
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नींव करोरी महाराज , कैंची धाम , नीवं करोरी धाम , नैनीताल , बाबा जी की क्रपा , गुरु क्रपा

बाबा नींव करोरी महाराज की द्रवित होने की आपने कई बातें सुनने को मिलती रही है, बाबा के चमत्कार की बातें हमेशा सुनने को मिलती रहती है. एसी ही एक बात सुनकर आप बाबा के चमत्कार से फिर प्रभावित हो जायेगें.


बाबा जी की एक भक्त श्रीमती रमा जोशी जी के अनुसार ," एक बार वृन्दावन में मैं माँ के साथ बैठी थी । तभी एक वृद्ध महिला आ गई माँ के दर्शनों को । माँ के पास आ गई । माँ ने मूँझे कहा इससे पूछ बाबा के बारे मे । वह वृद्धा अकबरपूर की निकली । बोली ," का बताँऊ बाबा की ? मौसा लगे थे हमारे । सुख दूख की सुन लेंवे थे । एक दिन हम दूर के कुआँ से पानी लाय रही थी। सो पूछ बैठे ," का करेगी पानी को ?" हमने कहीं उपर छत पै डारूँगी , ठंडा करिबे को , फिर बिछौना डारूँगी वापै सोइबे को ।" बोल पड़े , " अरे का करैगी पानी डारिके - अभी मेह बरस जावैगो ।" मैं बोली कहाँ को बरसेगो मेह - आसमान तो बिल्कूल सफ़ा है - धूप चमक रही हैगी । उप्र से बोले , " तु तो बावरी है - हमारी नाँय मानेगी । और उठकर चले गये । हमने छत पर ख़ूब पानी डारो , बिछौना बिछायो और चली आयी नीचे कू। थोड़ी देर में वो आँधी चली , और वो मेह बरसों कि कहीं नाँ जाये । दौड़ी दौड़ी गयी बिछौना हटायोऔर नीचे आयी । ऐसे हते बाबा जी सब कूछजानने वारे ।

मैंने पूछा और कूछ ? तो वे बोली ," और का बताँऊ दिसा- मैदान से आये रही थी लौटा पकड़े । हाथ भी नाँय धोऔ हतो । कई दिन से हाथ में पीर हती- ठीक से उठतो भी नाँय रहो । मिल गये दिवार पर बैठे। बोले, " का बात है दूखी दिख रई है । हमने कहीं बहूत पीर है हाथ में कई दिना से । बोले ," ईहाँ आ । मैं पास चली गयी - तो मैरो हाथ लै के उल्टी हथेली पे चार पाँच दफे चूम के छौड दओ। बस ! हम तो दर्द से तबै छुट्टी पाये गये और आज तक कोई तकलीफ नाँय भई हाथन मे ।"
क्या महत्व था उस साधारण बूडिया का बाबा जी की इतनी बड़ी स्रष्टि मे ? कोई विशेष भक्त नही - केवल एक नगण्य प्राणि-मात्र । पर बाबा जी के सम्पर्क मे आ गई और दया पा गई उनकी - सब मम प्रिय सब मम उपजाये !!"

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