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देशभर में राम नवमी की धूम, श्रीराम के इन 5 गुणों से सीखें कठिन समय में कैसे पाएं सफलता

Arun Mishra
25 March 2018 10:02 AM IST
देशभर में राम नवमी की धूम, श्रीराम के इन 5 गुणों से सीखें कठिन समय में कैसे पाएं सफलता
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राम नवमी की शुभकामनाएं
सनातन धर्म के मुताबिक चैत्र नवरात्रि के नवमी के दिन ही भगवान राम का जन्म हुआ था।
नई दिल्ली : आज राम नवमी है। इस मौके पर भगवान राम भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। देशभर के तमाम मंदिरों में पूजा की खास व्यवस्था की गई है और लोग अपने-अपने तरीके से अपने आराध्य की अराधना में जुटे हैं। इस दिन मां दुर्गा के नवरात्र का समापन भी किया जाता है।

सनातन धर्म के मुताबिक चैत्र नवरात्रि के नवमी के दिन ही भगवान राम का जन्म हुआ था। इसलिए इसे राम नवमी भी कहते हैं। भगवान राम को विष्णु जी का अवतार माना जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त कर और पुन: धर्म की स्थापना हेतु भगवान विष्णु ने धरती पर मनुष्य के रूप में राम अवतार लिया था। यह त्योहार आमतौर पर मार्च-अप्रैल के दौरान मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार राम नवमी चैत्र माह का नौवें दिन है, जो नवरात्रि का आखिरी दिन भी होता है। इसलिए भी हिंदू त्योहारों में राम नवमी का विशेष महत्त्व है,पूरे देश में रामनवमी के पर्व को उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन उत्तर भारत में विशेष रूप से अयोध्या में इस दिन भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है जोकि भगवान राम की जन्मभूमि है।

इस चैत्र नवरात्र में ऐसा संयोग बना है कि देवी मां के 8वें और 9वें रूप की पूजा एक ही दिन हो रही है। दरअसल इस दिन सूर्योदय अष्टमी तिथि में होगा और नवमी तिथि 8 बजकर 2 मिनट पर लगेगी। अगले दिन यानी कल सूर्योदय से पहले नवमी समाप्त हो जाएगी और दशमी तिथि में सूर्योदय होगा। ऐसे में नवमी तिथि का क्षय माना गया है। यही वजह है कि रामनवमी भी अष्टमी तिथि में मनाई जाएगी। आज के दिन 9 कुवांरी कन्याओं को भोजन खिलाकर व्रती अपना व्रत सम्पन्न करते हैं।

पूजा बिधि -
- अष्टमी की तिथि सुबह 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगी
- 8 बजकर 15 मिनट बाद नवमी की तिथि लग जाएगी
- नवमी की तिथि लगने के बाद कन्याओं को भोजन कराया जाएगा
- 2 से 10 साल की 9 कन्याओं को भोज खिलाया जाता है

सफलता के लिए जरूरी भगवान राम के 5 गुणों के बारे में-

धैर्य और सहनशील
भगवान श्रीराम काफी सहनशील थे। इसके अलावा धैर्यतापूर्वक ही जीवन जीते थे। कैकेयी के कहने पर श्रीराम को वनवास में 14 साल बिताने पड़े। इसके बावजूद उन्होंने सहनशीलता दिखाई और वन में 14 साल बिताए।

सकारात्मक सोच
भगवान राम को सकारात्मक सोच वाला माना जाता है। इसी वजह से उन्होंने रावण के खिलाफ युद्ध में जीत दर्ज की। वे न सिर्फ सकारात्मक सोच वाले थे, बल्कि अन्य को प्रेरित भी करते थे। भगवान राम की प्रेरणा की वजह से ही वानरों की सेना ने असंभव सा दिखने वाला पुल बनाने का कार्य पूरा कर दिया।

दयालु स्वाभाव के थे भगवान राम
लोगों को अपने जीवन में दयालु भी होना चाहिए। भगवान राम ने दयालु होने के कारण सभी को अपनी छत्रछाया में रखा। उन्होंने सभी को नेतृत्व करने को पूरा अवसर व अधिकार दिए।

मिलनसार होने कारण हुई सुग्रीव से दोस्ती
भगवान राम बहुत ही मिलनसार स्वभाव के थे। किसी भी मित्रता करने के लिए वे यह नहीं सोचते थे सामने वाला व्यक्ति उनसे छोटा है या बड़ा। चाहे उन्हें नदी पार करने वाला केवट हो या ऋष्यमूक पर्वत सुग्रीव से दोस्ती करने का उदाहरण हो। भगवान राम ने अपने मृदु स्वभाव से सभी को अपना बना लेते थे।

सभी को साथ लेकर चलना
भगवान राम सभी को साथ लेकर चलते थे। वे एक कुशल प्रबंधक भी थे। उन्हें संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग करने वाला भी माना जाता था। इसके अलावा श्रीराम का लक्ष्य था सत्य और न्याय का शासन स्थापित करना, जिसे उन्होंने पूरा भी किया।
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