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तो इस कारण आता है पृथ्वी पर भूकंप, जानिये पूरी बात और रहें सुरक्षित

तो इस कारण आता है पृथ्वी पर भूकंप, जानिये पूरी बात और रहें सुरक्षित
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हमारे हिन्दू धर्म में पृथ्वी को माता की उपाधि दी गई है तथा उनको धरती माता के रूप में पूजा जाता है. पुराणों में पृथ्वी को उसके स्थान से हटा कर समुन्द्र के गहरे तल में पंहुचा दिया था.

हमारे हिन्दू धर्म में पृथ्वी को माता की उपाधि दी गई है तथा उनको धरती माता के रूप में पूजा जाता है. पुराणों में पृथ्वी को उसके स्थान से हटा कर समुन्द्र के गहरे तल में पंहुचा दिया था. तब भगवान विष्णु ने पृथवी को मुक्त करने के लिए वराह अवतार लिया. समुद्र में जाकर वराह रूपी भगवन विष्णु ने दुष्ट हिरण्यकशयप का बध किया तथा माता पृथवी को उस असुर के कैद से मुक्त किया.


इसके बाद वराह भगवान, ने पृथ्वी को ऐसे स्थान पर स्थापित किया जहाँ पर पृथ्वी में जीवन का बिकास हो सके. पृथ्वी के अनुरोध पर वराह भगवान,ने कुछ वर्षो तक पृथ्वी के साथ समय बिताया तथा पृथवी को वराह भगवान से एक पुत्र की प्राप्ति हुई जो आगे चलकर मंगल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध हुए. मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र और अन्य धार्मिक ग्रंथो में भहुत ही क्रोधी तथा विनाशकारी ग्रह बताया गया है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मंगल ग्रह का क्रोधी स्वभाव ही पृथवी में भूकंप और अन्य आपदाओं का कारण है. यानि जब वे गुस्से में होते है तो भूकम्प ,सुनामी व भूस्खलन आदि जैसी आपदाओं का पृथ्वी को सामना करना परता है.


वही पुराणों में बताई गई एक अन्य कथा के अनुसार पृथवी में भूकम्प आने का कारन मंगल ग्रह नहीं ब्लिक शेषनाग है. शेषनाग समस्त नागों के राजा है तथा भगवान विष्णु उनको अपनी शैया बनाकर उनके ऊपर आराम करते है. धार्मिक कथाओं के अनुसार शेषनाग ने पूरी पृथवी का भार अपने ऊपर उठाया हुआ है. यानि पृथ्वी शेषनाग के सर पर टिकी हुई है. जब कभी भी शेषनाग करवट लेने के लिए हिलते है तो उनके हिलने के कारन ही पृथ्वी में भूकम्प आता. जब पृथ्वी पर अत्यधिक पाप होने लगता है तो पृथ्वी में से पाप का बोझ कम करने के लिए व लोग को चेतावनी देने के लिए शेषनाग को करवट लेना परता है. ताकि लोग अधर्म का मार्ग छोड़ कर धर्म का मार्ग चुने.




वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी का भार शेषनाग और भगवान विष्णु के कश्यप अवतार( कछुआ रूप ) के ऊपर टिका हुआ है यही कारन है की जब नए घर का निर्माण किया जाता है, तो उसके नीव रखने के समय कछुआ या शेषनाग की चांदी की आकृति जमीन में राखी जाती है कि घर लम्बे समय तक अडिग रह सके. चीन में भी भूकंप को लेकर एक अलग ही मान्यता है. परन्तु ये भी हिन्दू धर्म से कुछ मिलती -जुलती है. चीन में भूकम्प को लेकर यह मान्यता है कि पृथ्वी को एक भहुत ही विशाल मकड़े ने अपने पीठ के ऊपर उठाया हुआ है. जब यह मकड़ा हिलता है तो पृथ्वी में भूकम्प आ जाता है. इसी प्रकार जापान में भूकम्प को लेकर यह मान्यता है कि धरती में जमीन के नीचे एक नामुज नाम कि मछली रहती है. जब कभी नामुज कशिमा नाम के देवता पर हमला करती है तो पृथ्वी में भूकम्प आता है.


यूनान में भूकम्प से सम्बंधित मान्यता काशी विश्वनाथ से मिलती जुलती है. काशी में कहा जाता है की यह पूरी पृथ्वी भगवान शिव के त्रिशूल के ऊपर टिकी हुई है तथा यूनान में यह मान्यता है की समुद्र के देवता पोजेडन ने अपने हाथ में पकड़े त्रिशूल के ऊपर पूरी पृथ्वी को उठाया है तथा जब किसी बात से वे पृथ्वीवासियों से नाराज होते है. तो अपने त्रिशूल को जमीन में पटक देते है. जिस कारण पृथ्वी में भूकम्प आता है.

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