

शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा की जाती है. शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि शनिदेव अच्छे कर्म करने वालों को अच्छा और बुरे कर्म करने वालों को बुरा फल देते हैं इसलिए शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. ऐसा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है.
शनिवार को शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और यह दीपक उनकी मूर्ति के आगे नहीं बल्कि मंदिर में रखी उनकी शिला के सामने रखें.
अगर घर के आसपास शनि मंदिर ना हो तो पीपल के पेड़ के आगे भी सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं. आप चाहें तो शनिदेव की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर भी कर सकते हैं.
शनिवार के दिन शनिदेव को तेल के साथ ही काला तिल, काली उड़द या कोई और काली वस्तु भी चढ़ा सकते हैं.
शनिदेव को तेल चढ़ाने और दीपक जलाने के बाद इस शनि मंत्र का जाप करें- ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:. आप चाहें तो शनि चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं.
शनिदेव की पूजा के बाद हनुमान जी की भी पूजा करें.
शनिदेव की पूजा करते वक्त आप जिस आसन पर बैठे हों वह काले या नीले रंग का होना चाहिए.
शनिदेव की पूजा में हमेशा सरसों का तेल या तिल के तेल का दीपक ही जलाएं.




