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भीष्म नारायण सिंह : व्यक्तित्व विशेष

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भीष्म नारायण सिंह 1967 में पहली बार हुसैनाबाद के विधायक चुने गए और बिहार के शिक्षा मंत्री

भीष्म नारायण सिंह मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले थे। वह आजीवन कांग्रेस से जुड़े रहे। 30 वर्ष तक वह अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे। 13 जुलाई, 1933 को पलामू जनपद के उदयगढ़ गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए सिंह की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हुई। छात्र जीवन में नारायण सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में यूथ कांग्रेस का गठन किया । वह 1967 में पहली बार बिहार...

भीष्म नारायण सिंह मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले थे। वह आजीवन कांग्रेस से जुड़े रहे। 30 वर्ष तक वह अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे। 13 जुलाई, 1933 को पलामू जनपद के उदयगढ़ गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए सिंह की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हुई। छात्र जीवन में नारायण सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में यूथ कांग्रेस का गठन किया । वह 1967 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए।

भीष्म नारायण सिंह 1985 से 1996 तक असम, मेघालय सहित सात राज्यों के राज्यपाल रहे थे। 1985 में मद्रास के गवर्नर रहते हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को मद्रास यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर बनाया था।

भीष्म नारायण सिंह 1967 में पहली बार हुसैनाबाद के विधायक चुने गए और बिहार के शिक्षा मंत्री बने। 1972 में दुबारा विधायक बने और बिहार में खान मंत्री बने। 1976 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए और 1980 में इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में संसदीय कार्य मंत्री रहे फिर 1983 खाद आपूर्ति मंत्री बने।

1970 में भीष्म नारायण सिंह कांग्रेस पारलीमेंट्री पार्टी के उपर सचेतक बने। 1980 में वे संसदीय मामलों के राज्य मंत्री बने और नारायण सिंह को 1980 से 1983 तक संचार श्रम और गृह निर्माण विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार मिला। भीष्म नारायण सिंह को जनवरी-फरवरी 1982 में नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री भी रहे। उन्होने 15 वर्षों तक बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य रहे हैं। 1967 में BISCOMAUNके डायरेक्टर हैं। 1973 और 75 में बिहार राज्य को ऑपरेटिव गृह निर्माण विद परिषद के चेयरमैन रहे हैं। और वे मेघालय और तमिलनाडु के राज्यपाल रहे हैं।

भीष्म नारायण सिंह ने करीब चार दशक तक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभायी। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे। उन्हें 2009 में रूसी परिसंघ का सर्वोच्च नागरिक सम्मान आर्डर आफ फ्रेंडशिप अवार्ड प्रदान किया गया।

सिंह अंतिम समय तक भी राजनीति व सामाजिक सरोकार के कार्यों से जुड़े रहे। वह नोएडा के कई सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय थे।

  • अप्रैल, 2005 में भीष्म नारायण सिंह को अल्जीरिया की सरकार द्वारा 'मेडल ऑफ मेरिट' और 'सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर' से नवाजा गया।
  • 2005 में रूस ने भीष्म नारायण सिंह को आर्डर ऑफ फ्रेंडशिप के सम्मान से भी नवाजा था।

प्रत्यक्ष मिश्रा
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