Top
Begin typing your search...

प्रत्येक वर्ष ही 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनायें : डॉ विनय कुमार श्रीवास्तव

प्रत्येक वर्ष ही विश्व जनसंख्या दिवस मनायें : डॉ विनय कुमार श्रीवास्तव
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
प्रत्येक वर्ष ही 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनायें।11 जुलाई को हर वर्ष ये जागरूकता फैलायें।हो गया काम नियंत्रित होगयी अपनी आबादी।वर्षो फ्री हैं सब बच्चे पैदा कर बढ़ाएं आबादी।क्या यही योगदान है सच्चा जिससे है विकास।भारत में आबादी बढ़ती रहे अपने आस पास।यूएन जनरल एसेम्बली 1989में की है घोषणा।जन्म वृद्धि पर रोक लगे हर देश हेतु ये घोषणा।कैसे यह पालन है हर सेकण्ड जन्म लेते 4बच्चे।पालन पोषण सही ना होता कुपोषण...

प्रत्येक वर्ष ही 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनायें।

11 जुलाई को हर वर्ष ये जागरूकता फैलायें।

हो गया काम नियंत्रित होगयी अपनी आबादी।

वर्षो फ्री हैं सब बच्चे पैदा कर बढ़ाएं आबादी।

क्या यही योगदान है सच्चा जिससे है विकास।

भारत में आबादी बढ़ती रहे अपने आस पास।

यूएन जनरल एसेम्बली 1989में की है घोषणा।

जन्म वृद्धि पर रोक लगे हर देश हेतु ये घोषणा।

कैसे यह पालन है हर सेकण्ड जन्म लेते 4बच्चे।

पालन पोषण सही ना होता कुपोषण में हैं बच्चे।

आबादी के मामले में प्रथम नं.पे चीन 1.3अरब।

भारत है दूसरे नं.पे जिसकी आबादी 1.2 अरब।

2030 तक भारत से पीछे हो जायेगा यह चीन।

सोचें जरा अभीहै ये भारी आगे क्या होगा सीन।

देश में 50% से अधिक आबादी 25वर्ष से कम।

4 में से 1व्यक्ति की उम्र है 10से25 वर्ष से कम।

यही हाल यदि रहा देश का तो पहुंचेगा ये अरब।

जुलाई2017 में विश्व की जनसंख्या 7.5अरब।

कठिन समस्या है यह जनसंख्या की रोकें वृद्धि।

देश तभी खुशहाल बनेगा सब की होगी संवृद्धि।

बढ़ती जनसंख्या कारण है ये बढ़ती बेरोजगारी।

खाने पीने रहने की तंगी है व बढ़ती भी बीमारी।

अकेला कोई कमाये तो बड़ा परिवार कैसे पाले।

छोटा हो परिवार अगर तो अच्छे से उसे संभाले।

जनसंख्या विस्फोट बना है हर विकास में काल।

सरकारें कैसे कर पायें ऐसे में सबका देख भाल।

कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी कोरोना फैला।

जीवन की भीख सभी मांगें कोई रोटी का थैला।

शिक्षा स्वास्थ्य सभी चाहिए रोटी कपड़ा मकान।

परिवार रहेगा सिमित तब ही तो होगा समाधान।

इसके लिए जरुरी है कोई कड़ा कदम उठाने की।

ऐसे बात नहीं बननी है जरुरत कानून बनाने की।

जनसंख्या कानून बने भारत में परिवार व्यवस्था।

कड़ाई से लागू भी हो तब सुधरेगी यहाँ व्यवस्था।

जाति धर्म मजहब हो कोई सब को पालन करना।

सुखमय तब हर घर आसान पालन पोषण करना।

स्वयं करें संकल्प रखेंगे हम अपना छोटा परिवार।

शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार सब तब ही होगा भरमार।

शासन और प्रशासन करना भी होगा तब आसान।

रोजगार व्यापार प्रोफेशन सर्विस की भी हो शान।

छीना झपटी मार काट चोरी बेईमानी से बुरा हाल।

देशप्रदेश के ये सभी नागरिक रह सकेंगें खुशहाल।


रचयिता :

*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*

वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़,सिटी,उ.प्र.

(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक एवं समाजसेवी)

इंटरनेशनल चीफ एग्जीक्यूटिव कोऑर्डिनेटर

2021-22,एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,प.बंगाल

प्रत्यक्ष मिश्रा
Next Story
Share it