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दिल सहमा हुआ सा है तो फिर तुम कम ही याद आओ : जौन एलिया

Desk Editor
24 July 2021 5:00 PM IST
दिल सहमा हुआ सा है    तो फिर तुम कम ही याद आओ : जौन एलिया
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जज़्बों के बैरी वक़्त की साज़िश न हो कोई तुम्हारे इस तरह हर लम्हा याद आने से...

शायद...

मैं शायद तुम को यकसर भूलने वाला हूँ

शायद जान-ए-जाँ शायद

कि अब तुम मुझ को पहले से ज़ियादा याद आती हो

है दिल ग़मगीं बहुत ग़मगीं

कि अब तुम याद दिलदाराना आती हो

शमीम-ए-दूर-माँदा हो

बहुत रंजीदा हो मुझ से

मगर फिर भी

मशाम-ए-जाँ में मेरे आश्ती-मंदाना आती हो

जुदाई में बला का इल्तिफ़ात-ए-मेहरमाना है

क़यामत की ख़बर-गीरी है

बेहद नाज़-बरदारी का आलम है

तुम्हारे रंग मुझ में और गहरे होते जाते हैं

मैं डरता हूँ

मिरे एहसास के इस ख़्वाब का अंजाम क्या होगा

ये मेरे अंदरून-ए-ज़ात के ताराज-गर

जज़्बों के बैरी वक़्त की साज़िश न हो कोई

तुम्हारे इस तरह हर लम्हा याद आने से

दिल सहमा हुआ सा है

तो फिर तुम कम ही याद आओ

मता-ए-दिल मता-ए-जाँ तो फिर तुम कम ही याद आओ

बहुत कुछ बह गया है सैल-ए-माह-ओ-साल में अब तक

सभी कुछ तो न बह जाए

कि मेरे पास रह भी क्या गया है

कुछ तो रह जाए

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