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इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में : गोपालदास नीरज

इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में : गोपालदास नीरज
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न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर, ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने में॥

- शायरीतमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा । सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा ।वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में, हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा । तू ढूँढ़ता था जिसे जा के बृज के गोकुल में, वो श्याम तो किसी मीरा की चश्मे-तर में रहा । वो और ही थे जिन्हें थी ख़बर सितारों की, मेरा ये देश तो रोटी की ही ख़बर में रहा । हज़ारों रत्न थे उस जौहरी की झोली में, उसे कुछ भी न मिला जो अगर-मगर में ...

- शायरी


तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।

सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा ।

वो जिस्म ही था जो भटका किया ज़माने में,

हृदय तो मेरा हमेशा तेरी डगर में रहा ।

तू ढूँढ़ता था जिसे जा के बृज के गोकुल में,

वो श्याम तो किसी मीरा की चश्मे-तर में रहा ।

वो और ही थे जिन्हें थी ख़बर सितारों की,

मेरा ये देश तो रोटी की ही ख़बर में रहा ।

हज़ारों रत्न थे उस जौहरी की झोली में,

उसे कुछ भी न मिला जो अगर-मगर में रहा ।

...............

दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था

दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था|

तुम्हारे घर का सफ़र इस क़दर सख्त न था।

इतने मसरूफ़ थे हम जाने के तैयारी में,

खड़े थे तुम और तुम्हें देखने का वक्त न था।

मैं जिस की खोज में ख़ुद खो गया था मेले में,

कहीं वो मेरा ही एहसास तो कमबख्त न था।

जो ज़ुल्म सह के भी चुप रह गया न ख़ौल उठा,

वो और कुछ हो मगर आदमी का रक्त न था।

उन्हीं फ़क़ीरों ने इतिहास बनाया है यहाँ,

जिन पे इतिहास को लिखने के लिए वक्त न था।

शराब कर के पिया उस ने ज़हर जीवन भर,

हमारे शहर में 'नीरज' सा कोई मस्त न था।

............

है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए

जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए

रोज़ जो चेहरे बदलते है लिबासों की तरह

अब जनाज़ा ज़ोर से उनका निकलना चाहिए

अब भी कुछ लोगो ने बेची है न अपनी आत्मा

ये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिए

फूल बन कर जो जिया वो यहाँ मसला गया

जीस्त को फ़ौलाद के साँचे में ढलना चाहिए

छिनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो

आँख से आँसू नहीं शोला निकलना चाहिए

दिल जवां, सपने जवाँ, मौसम जवाँ, शब् भी जवाँ

तुझको मुझसे इस समय सूने में मिलना चाहिए

..............

-प्रेम गीत

आदमी को आदमी बनाने के लिए

जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए

और कहने के लिए कहानी प्यार की

स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए।

जो भी कुछ लुटा रहे हो तुम यहाँ

वो ही बस तुम्हारे साथ जाएगा,

जो छुपाके रखा है तिजोरी में

वो तो धन न कोई काम आएगा,

सोने का ये रंग छूट जाना है

हर किसी का संग छूट जाना है

आखिरी सफर के इंतजाम के लिए

जेब भी कफन में इक लगानी चाहिए।

आदमी को आदमी बनाने के लिए

जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए

रागिनी है एक प्यार की

जिंदगी कि जिसका नाम है

गाके गर कटे तो है सुबह

रोके गर कटे तो शाम है

शब्द और ज्ञान व्यर्थ है

पूजा-पाठ ध्यान व्यर्थ है

आँसुओं को गीतों में बदलने के लिए,

लौ किसी यार से लगानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए

जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए

जो दु:खों में मुस्कुरा दिया

वो तो इक गुलाब बन गया

दूसरों के हक में जो मिटा

प्यार की किताब बन गया,

आग और अँगारा भूल जा

तेग और दुधारा भूल जा

दर्द को मशाल में बदलने के लिए

अपनी सब जवानी खुद जलानी चाहिए।

आदमी को आदमी बनाने के लिए

जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए

दर्द गर किसी का तेरे पास है

वो खुदा तेरे बहुत करीब है

प्यार का जो रस नहीं है आँखों में

कैसा हो अमीर तू गरीब है

खाता और बही तो रे बहाना है

चैक और सही तो रे बहाना है

सच्ची साख मंडी में कमाने के लिए

दिल की कोई हुंडी भी भुनानी चाहिए।

दोहे

1.

मौसम कैसा भी रहे कैसी चले बयार

बड़ा कठिन है भूलना पहला-पहला प्यार

2.

भारत माँ के नयन दो हिन्दू-मुस्लिम जान

नहीं एक के बिना हो दूजे की पहचान

3. बिना दबाये रस न दें ज्यों नींबू और आम

दबे बिना पूरे न हों त्यों सरकारी काम

4.

अमरीका में मिल गया जब से उन्हें प्रवेश

उनको भाता है नहीं अपना भारत देश

5.

जब तक कुर्सी जमे खालू और दुखराम

तब तक भ्रष्टाचार को कैसे मिले विराम

6.

पहले चारा चर गये अब खायेंगे देश

कुर्सी पर डाकू जमे धर नेता का भेष

7.

कवियों की और चोर की गति है एक समान

दिल की चोरी कवि करे लूटे चोर मकान

8.

गो मैं हूँ मँझधार में आज बिना पतवार

लेकिन कितनों को किया मैंने सागर पार

9.

जब हो चारों ही तरफ घोर घना अँधियार

ऐसे में खद्योत भी पाते हैं सत्कार

10.

जिनको जाना था यहाँ पढ़ने को स्कूल

जूतों पर पालिश करें वे भविष्य के फूल

11.

भूखा पेट न जानता क्या है धर्म-अधर्म

बेच देय संतान तक, भूख न जाने शर्म

12.

दोहा वर है और है कविता वधू कुलीन

जब इसकी भाँवर पड़ी जन्मे अर्थ नवीन

13.

गागर में सागर भरे मुँदरी में नवरत्न

अगर न ये दोहा करे, है सब व्यर्थ प्रयत्न

14.

जहाँ मरण जिसका लिखा वो बानक बन आए

मृत्यु नहीं जाये कहीं, व्यक्ति वहाँ खुद जाए

15.

टी.वी.ने हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार

संस्कृति सब घायल हुई बिना तीर-तलवार

16.

दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार

तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार

17.

आँखों का पानी मरा हम सबका यूँ आज

सूख गये जल स्रोत सब इतनी आयी लाज

18.

करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार

जब कि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार

19.

रुके नहीं कोई यहाँ नामी हो कि अनाम

कोई जाये सुबह् को कोई जाये शाम

20.

ज्ञानी हो फिर भी न कर दुर्जन संग निवास

सर्प सर्प है, भले ही मणि हो उसके पास

प्रत्यक्ष मिश्रा
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