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मायावती जी अरूण माहौर हत्या पर आप और विपक्ष खामोश क्यों?

नई दिल्ली
यूपी से बीजेपी के कोशाम्बी से सांसद विनोद सोनकर ने दलित रोहित वेमुला की मौत पर चिल्ला रहे दलित सरंक्षकों से पूंछा है कि यूपी में दलित मौतों पर खमोशी क्यों धर लेते है। यूपी के नेता दलित की मौत पर हैदराबाद जाते है पर जिस प्रदेश की रहनुमाई करते है उस जगह दलित की हत्या होती है तो पर्दे से गायब क्यों हो जाते है।
क्या यूपी का दलित दलित नहीं
आगरा में एक दलित की मां की कोख सूनी हो गयी औऱ अपने को दलितो का रहनुमा बताने वाले अचानक गायब हो गये है। उत्तर प्रदेश के आगरा में दलित नेता अरूण माहौर की हत्या ने पूरे देश को रूला कर रख दिया है। रोहित बेमुला की आत्महत्या पर लगातार तांडव करने वाले विपक्षीयों का प्रदर्शन सड़क से लेकर संसद तक कही भी अछूता नही रहा और यहा तक कि विपक्ष बेमुला को जबरजस्ती दलित साबित करने के प्रयासों के साथ लगातार केंद्र सरकार पर आक्रामक रूख अपनाती रही है, लेकिन लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि यूपी में अरूण माहौर (दलित) की हत्या पर अपने आप को दलितो का रहनुमा मानने वाली कांग्रेस, बसपा व अखिलेश सरकार चुप क्यों है।
राष्ट्र विरोधी तत्वों का समर्थन कर दलित के नाम पर प्रोपोगंडा फौलाने वाले विपक्षी माहौर की हत्या पर चुप रहकर यह साबित कर चुके है कि वो दलित नही बल्कि अपने निजि स्वार्थ की राजनीति में लगे हुए है औऱ केंद्र सरकार पर झूठा बयानबाजी करके बदनाम कर रहे है।
आखिर क्यों चुप है बसपा
दलित नेता माहौर के मामलें को दबाने के लिए केंद्रीय मंत्री के वयान को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है, आज एक दलित की सरेआम हत्या हो जाती है औऱ विपक्ष इस पर चुप रहता है इससे उत्तर प्रदेश सरकार की दलितो के प्रति मंशा साफ तौर पर जाहिर हो चुकी है साथ ही अपनें आप को दलितों का रहनुमा बताने वाली बसपा सरकार के भी गले में फास अटक गया है। में दलित हितैषियों से पूंछ रहा हूँ कि आगरा में अरूण माहौर लखनऊ के अंशू रावत सहारनपुर में संत रविदास जंयती पर हुई दलित की हत्या और बरेली की दलित किशोरी के साथ र्निभया जैसे काण्ड पर उनकी चुप्पी का राज क्या है ?
सपा और बसपा की इस दोहरी राजनीति से आज पूरा उत्तर प्रदेश त्रस्त हो चुका है साथ ही प्रदेश सरकार के इस रवैये से आज दलित अपने आप को डरा हुआ और असुरक्षित महसूस कर रहा है, प्रदेश सरकार में लगातार हुए दंगों, हत्याओं, बलात्कारों की घटनाओं से राज्य में पूरी तरह जंगलराज कायम हो चुका है।
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