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Arvind Kejriwal Big Disclosure: केजरीवाल के करोड़पति अपराधी प्रेम की राजनीति, जानिए बड़ा खुलासा

Shiv Kumar Mishra
30 March 2022 4:58 PM IST
Arvind Kejriwal Big Disclosure: केजरीवाल के करोड़पति अपराधी प्रेम की राजनीति, जानिए बड़ा खुलासा
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जनता से अरविन्द केजरीवाल का एक और वायदा खिलाफी, आम जनता से एक और झूठ का पर्दाफाश

आचार्य श्री विष्णुगुप्त

जनता से अरविन्द केजरीवाल का एक और वायदा खिलाफी, आम जनता से एक और झूठ का पर्दाफाश। अब केजरीवाल आम आदमी के पैरवीकार नहीं रहे, अब वे खास और पैसे वाले के पैरवीकार हो गये हैं। आम आदमी पार्टी में गरीब और फटेहाल तथा संघर्षशील व्यक्ति की अब जगह शायद नहीं होगी। अगर आपको विश्वास नहीं होता तो फिर पंजाब का करोड़पति और अपराधी मानसिकता के विधायकों की सूची देख लीजिये, आम जनता का प्रतिनिधितव करने का दावा करने वाले अरविन्द केजरीवाल के करोड़पति और अपराधी प्रेम के तथ्य देख लीजिये। पंजाब में आम आदमी के 92 विधायकों में से 63 विधायक करोड़पति हैं। आम आदमी पार्टी का एक विधायक कुलवंत सिंह घोषित तौर पर 238 करोड़ का स्वामी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित 11 में से 9 मंत्री भी करोड़पति हैं। इसके साथ ही साथ पंजाब के आम आदमी के 50 प्रतिशत विधायकों पर किसी न किसी तरह का मुकदमा जरूर दर्ज है।

पंजाब में हुआ सत्ता परिवर्तन और आम आदमी पार्टी की मिली सफलता के शोर में अरविन्द कजेरीवाल के करोड़पति और अपराधी प्रेम की कहानी दब गयी, इस पर कोई गभीर बहस नहीं हुई। जबकि निश्चित तौर पर करोड़पति और अपराधी प्रेम पर गंभीर बहस होनी चाहिए थी। अरविन्द केजरीवाल भी अन्य पार्टियों की तरह ही राजनीति शुरू कर दी है, वैकल्पिक राजनीति, ईमानदार और नैतिक राजनीति देने का उनका वायदा अब छलावा साबित हुआ है। झूठ के बल पर सत्ता हासिल करना और मु््फ्त में कुछ रियायतें बांट कर सत्ता हासिल करने के मामले केजरीवाल चैम्पियन साबित हो रहे हैं।

करोडपति और अपराधी मानसिकता के राजनीतिज्ञ कभी भी जनपक्षीय नहीं होते हैं, ऐसे किस्म के राजनीतिज्ञों का सीधा मतलब अपनी तिजोरी को और भी भरना तथा राजनीति को समाज सेवा की जगह पैसे कमान का हथकंडा बना देना होता है। पंजाब सीमावर्ती प्रदेश है, पंजाब पाकिस्तान के निशाने पर है, पंजाब में पाकिस्तान की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। खालिस्तानी आतंकवाद लौटने की कोशिश में है। पंजाब एक बार फिर से आतंकवाद और हिंसा की ज्वालामुखी पर बैठा हुआ प्रतीत हो रहा है। पंजाब कर्ज में भी डूबा हुआ है। पंजाब के किसानों की समस्याएं भी बहुत गंभीर है, इसके अलावा पंजाब नशे के व्यापार में भी डूबा हुआ है, नशे में पंजाब के युवकों की जवानी समाप्त हो रही है, नशे पर उड़ता पंजाब नामक फिल्मी बनी थी और यह फिल्म बहुत ही धमाल मचायी थी। पंजाब को निश्चित तौर पर एक ईमानदार राजनीतिक सरकार चाहिए जो पंजाब को विकास और उन्नति के मार्ग पर ले जाये।

सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि लोग करोड़पति कैसे बनते हैं? क्या खून और पसीने की कमाई से करोड़ति बनते हैं? क्या कोई ईमानदारी से करोड़ति बनते हैं? क्या कोई नैतिकता से करोड़पति बनते हैं? क्या कोई करोड़पति राजनीति में आने के बाद अपनी तिजोरी और भी भरने का हथकंडा नहीं अपनाता है? सच कौन नहीं जानता है। सच यह है कि कोई खून और पसीने की कमाई से करोड़पति नहीं बनता है, कोई नैतिकता और ईमानदारी से करोड़पति नहीं बनता है? करोड़पति और अरबपति बनने वाले निश्चित तौर पर भ्रष्टचार का सहारा लेते हैं, सरकारी राजस्व चोरी करने का अपराध करते हैं, नैतिकता और ईमानदारी को हाशिये पर रखकर करोडपति बनते हैं। अपराध के जरिये भी करोड़पति बनते हैं। अपराधों में सिर्फ लूट-डकैती ही शामिल नहीं होती है बल्कि हत्या और अपहरण भी शामिल है। शराब की तस्करी और शराब का अवैध कारोबार से भी लोग करोड़पति बनते हैं। सरकारी बैंकों की लूट से भी करोड़पति बनते हैं। बहुत सारे लोग सरकारी बैंको के कर्ज लेकर बैठ जाते हैं और बैकों के कर्ज को दूसरे कारोबार में ट्रान्सफर कर मालोमाल बन जाते हैं। देश में बड़े पैसे वाले जैसे अडानी और अंबानी पर भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। विजय माल्या सरकारी बैंकों का अरबों रूपये डकार गया। विजय मल्या पैसे के दम पर विधायकों को खरीदकर राज्य सभा में पहुंच गया। राज्य सभा में पहुच कर विजय मल्या अपनी संपत्ति को बढ़ाने और सरकारी धन के लूट से बचने के लिए केन्द्रीय सरकार से जुगाड़ भिड़ाने का काम किया।

एक प्रश्न यह है कि करोड़पति और अपराधी मानसिकता के लोग राजनीतिक पार्टियों से चुनाव लड़ने का टिकट कैसे प्राप्त कर लेते हैं? आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव लड़ने का टिकट उसी कार्यकर्ता को मिलता है जिसकी संघर्ष की कहानी प्रेरक होती है, जिसने जनता के लिए संघर्ष कर अपना और अपने परिवार की जिंदगी आग में फंूक देता है। पर ऐसी परम्परा का अब अवसान हो चुका है। करोड़पति और अपराधी मानसिकता के लोगों के पास इतना समय ही नहीं होता है कि वे जनपक्षीय राजनीति का हिस्सा बन सके, जनता के लिए संघर्ष करें। सीधे तौर पर अपराधी और करोड़पति मानसिकता के लोग राजनीतिक पार्टियों से टिकट खरीद लेते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ही आम आदमी पार्टी पर टिकट बेचने का आरोप लगा था, हंगामा भी हुआ था। आम आदमी पार्टी के प्रभारी राघव चड्डा की पिटाई भी हुई थी।

केजरीवाल वैकल्पिक राजनीति के चेहरे थे। भ्रष्टाचार विरोधी चेहरे थे। इन्होंने देश के युवाओं को ईमानदार और नैतिक राजनीति का एक सपना दिखाया था। राजनीति को आम आदमी के करीब लाने का सपना दिखाया था। इसीलिए उन्होंने अपनी पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी रखा था। ईमानदारी और नैतिकता के नाम पर ही इन्हें दिल्ली में सत्ता मिली थी। प्रारंभिक दौर में दिल्ली में आम आदमी इनकी प्राथमिकता में थे। आम आदमी की इनकी पार्टी पर आधिपत्य था। पर दिल्ली में सरकार बनने के साथ ही साथ अरविन्द केजरीवाल ने गिरगिट की तरह रंग बदला। सबसे पहले तो उन्होंने उस अन्ना को भूला दिया, जिस अन्ना के बल पर इन्होंने सत्ता हासिल की थी। फिर अपने संघर्ष के साथियों जैसे कुमार विश्वास और योगेन्द्र यादव जैसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुमार विश्वास और योगेन्द्र यादव जैसे नेता केजरीवाल पर लोकतांत्रिक ढंग से काम करने के लिए दबाव डालने का काम करते थे। दो ऐसे लोगों को इन्होने राज्यसभा में भेज दिया जो आम आदमी पार्टी के कैडर कभी नहीं थे, जिनकी गिनती साधारण और आम आदमी में नहीं होती थी, ये खास आदमी थे, धनपशु थे। इस पर बवाल खड़ा हुआ था और राज्यसभा का टिकट बेचने का आरोप भी लगा था। जब किसी धनपशु को राज्य सभा में भेजा जाता है तो यह मान लिया जाता है कि इसमें पैसे का खेल हुआ होगा।

अरविन्द केजरीवाल ने जितनी वादाखिलाफी की है, जिस तरह के रंग बदले हुए हैं उसकी मिसाल भारतीय राजनीति में मिलनी मुश्किल है। बिना प्रमाण के इन्होंने नितिन गडकरी पर आरोप लगाये,अरूण जेटली पर आरोप लगाये। शीला दीक्षित पर आरोप लगाये। उस समय अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि शीला दीक्षित के खिलाफ उसके पास सैकड़ों पन्ने के भ्रष्टाचार के आरोप है। पर उन्होंने शीला दीक्षित के तथाकथित भ्रष्टचार के तथ्य कभी जाहिर नहीं किये। जब मामला अदालत में गया और तथ्य प्रस्तुत करने की बात सामने आयी तो फिर अरविन्द केजरीवाल ने बेशर्म की तरह माफी मांगने की फेहरिस्त अपनायी। उसने नितिन गडकरी से माफी मांगी, अरूण जेटली से भी माफी मांगी। उसने नशे के व्यापार संबंधित आरोपों पर भी माफी मांगी। इसलिए राजनीति में केजरीवाल द्वारा आम आदमी के दमन और करोड़पति-अपराधी प्रेम को केई आश्चर्य नहीं मानना चाहिए।

करोड़पति और अपराधी प्रेम के सहारे पंजाब का विकास नहीं हो सकता है। दिल्ली की तरह पंजाब की राजनीति आसान नहीं है। दिल्ली का अधिकतर खर्च केन्द्र सरकार वहन करती है। दिल्ली कोई राज्य नहीं है। राज्य का दर्जा है। इसके अलावा चुनावी घोषनाओं के अनुसार अतिरिक्त राजस्व की जरूरत होगी? अतिरिक्त राजस्व कहां से जुटायेंगे? सरकारी राजस्व का भी बंदरबांट हो सकता है। करोड़पति और अपराधी मानसिकता के विधायक सरकारी राजस्व का बंदरबांट करेंगे, लूटमार करेंगे, गैर कानूनी धंधों को बढ़ावा देंगे। जिन करोड़पति विधायकों का कारोबार है वे करोड़पति विधायक अपने कारोबार का संरक्षण देने के लिए सरकारी कानूनों को उल्लंघन करेंगे।

लेखक आचार्य श्री विष्णुगुप्त पत्रकार है। यह लेख उनकी निजी राय है।

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