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आजम खां को इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिला बेल, लेकिन जेल से बाहर आना नामुकिन, जानें क्यों?

आजम खां को इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिला बेल, लेकिन जेल से बाहर आना नामुकिन, जानें क्यों?
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सपा के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री आजम खां को बड़ी राहत मिली है। आजम खां को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। वक्फ बोर्ड की जमीन मामले में पांच मई को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने खुली अदालत में फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक लाख रूपये मुचलके व दो प्रतिभूति पर जमानत दी है। हालांकि आजम के जेल से बाहर आने पर संशय बरकरार है। तीन दिन पहले ही आजम खां के खिलाफ दर्ज स्कूलों की मान्यता से संबंधित एक मामले में जेल में नोटिस तामिला कराया गया है।

कोर्ट ने आजम खान से शत्रु संपत्ति को पैरा मिलिट्री फोर्स को सौंपने का आदेश दिया है। विधायक आजम खां को 89 में से 88 आपराधिक मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसी दौरान राज्य सरकार ने एक दर्जन मामलो में जमानत निरस्त करने की अर्जी दाखिल की है। जो इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आजम खां जमानत पर रिहा हों, इससे पहले ही एक और नई एफआइआर भी दर्ज की गई है।

माना जा रहा था कि यदि इस केस में जमानत मंजूर हुई तो आजम खां जेल से बाहर निकल आयेंगे। नया केस दर्ज होने से दर्ज आखिरी मामले में अब जमानत मिलने के बावजूद रिहाई नहीं हो सकेगी। इस मामले के अनुसार, आजम खां पर आरोप है कि उन्होंने अजीमनगर थाना क्षेत्र में शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा कर उसको बाउंड्री वॉल से घेरा है। जिसे बाद में रामपुर के मौलाना जौहर अली ट्रस्ट रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय में शामिल किया गया है।

पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है और कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया है। इस मामले में चार दिसम्बर 21 को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी और कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया था। 29 अप्रैल को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल कर कुछ और नये तथ्य दिए। जिसपर पांच को सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।

उधर सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां की जमानत पर फैसला सुनाने में देरी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट पर तल्ख टिप्पणी की थी। जिसके बाद आज आजम खां की याचिका पर फैसला सुनाया गया। कोर्ट में आजम खां के अधिवक्ता इमरानुल्लाह खान, कमरूल हसन, सफदर काजमी, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी, शासकीय अधिवक्ता एस के पाल अपर शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र कोर्ट में मौजूद थे।


सुजीत गुप्ता
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