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गौ भक्त शिवराज का "सांड नसबन्दी"अभियान बीच में रोका गया

गौ भक्त शिवराज का सांड नसबन्दीअभियान बीच में रोका गया
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भोपाल।मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार एक बार फिर चर्चा में है!प्रदेश में हर काम को अभियान की तरह करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रदेश में बढ़ रहे गोवंश को रोकने के लिए सांडों की नसबंदी करने का अभियान चलाया।लेकिन 20 दिन चलने वाला यह अभियान अचानक नौ दिन बाद ही बंद कर दिया गया।माना जा रहा है कि भोपाल की भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर द्वारा इस संबंध में सवाल उठाए जाने के बाद सरकार ने अपना आदेश वापस लिया है।बताया यह भी गया है कि सरकार ने करीब 12 लाख सांडों की नसबन्दी कराने का लक्ष्य रखा है।इस पर वह 12 करोड़ खर्च करने वाली है।

यह सब जानते हैं कि आवारा जानवर पूरे उत्तर भारत में बड़ी समस्या बन गए हैं। देश में भाजपा सरकार बनने के बाद यह समस्या बिकराल हो गयी है।खासतौर पर भाजपा शासित राज्यों में गायें और सांड बड़ी संख्या में सड़कों पर घूमते रहते हैं।हालांकि सरकारें गौसेवा के लिए बहुत कुछ करने का दावा करती हैं लेकिन असलियत यह है कि गायों की स्थिति जस की तस है।हालत यह है कि राजधानी भोपाल सहित सभी प्रमुख नगरों में गायें और साँड वीआईपी इलाकों में भी भ्रमण करते मिल जाएंगे।वैसे कई मंत्रियों और आला अफसरों ने अपने सरकारी घरों में भी गाय पाल रखी हैं।

हर साल गौसेवा पर मोटी रकम खर्च करने वाली शिवराज सरकार ने गौ सेवा आयोग भी बना रखा है।बड़े बड़े दावे भी सरकार करती रहती है।वैसे इस काम में कांग्रेस भी पीछे नही है।उसका भी दावा है कि 15 महीने की अपनी सरकार में कमलनाथ ने प्रदेश में 1 हजार आधुनिक गौशालाएं बनबाई थीं।

गौ सेवा के दावों के बीच शिवराज सरकार ने अचानक आवारा सांडों को गायों की बढ़ती संख्या की बजह मान लिया।अब चूंकि गौ वंश का वध किया नही जा सकता इसलिए उनके बधियाकरण का फैसला किया गया।

सरकार के पशुपालन विभाग ने गत 22 सितम्बर को एक आदेश निकाला।इस आदेश में सभी जिलों में सांडों की नसबंदी का अभियान 4 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलाने के निर्देश थे।सांडों की नसबन्दी पशुपालन विभाग को "निशुल्क" करनी थी।इस काम में सभी कलेक्टरों को मदद करनी थी।हालांकि आदेश में यह साफ नही था कि आवारा सांडों की नसबंदी का "शुल्क" आखिर भरेगा कौन? वैसे पैसा तो सरकार के खजाने से ही निकलना था।

22 सितम्बर के सरकारी आदेश में यह भी कहा गया था कि नसबन्दी "निकृष्ट" सांडों की ही की जाएगी। इससे पहले सांडों का ऐसा वर्गीकरण सरकार ने नही किया था।

प्रदेश भर में यह "नसबन्दीकरण" अभियान चल ही रहा था कि कांग्रेस ने आज इस पर सवाल उठा दिया। माना जा रहा है कि इसके बाद सरकार चेती।तत्काल पशुपालन विभाग के डायरेक्टर डाक्टर आर के मेहिया ने आदेश निकाल दिया कि सांडों की नसबन्दी का अभियान अगले आदेश तक तात्कालिक प्रभाव से स्थगित किया जाता है।

सरकार के इस अभियान के बारे में कोई अधिकृत बयान अभी तक नही आया है।न गौभक्त मुख्यमंत्री कुछ बोले हैं और न ही कुछ पशुपालन मंत्री ने कहा है।हां पशुपालन विभाग का दायित्व संभाल रहे प्रमुख सचिव ने यह जरूर कहा है कि यह कार्यक्रम पिछले कई सालों से चल रहा है। उधर कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट करके यह पूछा है कि पिछले 9 दिन में सरकार ने कितने सांडों की नसबन्दी कराई।इस काम पर सरकारी खजाने से कितना रुपया खर्च किया गया।सरकार यह तो बता ही सकती है।

कांग्रेस ने कुत्ते बिल्लियों के लिए परेशान रहने वाली पशुप्रेमी भाजपा नेता मेनका गांधी का ध्यान भी इन "निकृष्ट" सांडों की ओर आकर्षित कराया है।

उल्लेखनीय है कि इस समय प्रदेश में उपचुनाव चल रहे हैं।कल से "निक्कर"अहम मुद्दा बना हुआ था।लेकिन कल "निकृष्ट सांड" भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं।वैसे साध्वी सांसद प्रज्ञा इस तरह के सवाल उठाकर अपनी ही पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा करती रहती हैं।लेकिन इस बार उन्होंने एक बड़ा मुद्दा विपक्ष को दे दिया है।

वैसे कुछ भी हो! हमेशा कुछ अलग करने का दावा करने वाली शिवराज सरकार ने देशव्यापी "गाय" समस्या का अनोखा समाधान निकाला है।देखना यह होगा कि और कितने मुख्यमंत्री उनका अनुसरण करते हैं।

अरुण दीक्षित
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