Begin typing your search...

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाटक विभाग के प्रशाल में नाटक सती बिहुला का मंचन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाटक विभाग के प्रशाल में नाटक सती बिहुला का मंचन
X
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo

दरभंगा। आज रंग ग्राम जन सांस्कृतिक मंच एवं कलासागर सांस्कृतिक संगठन भागलपुर द्वारा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाटक विभाग के प्रशाल में आयोजित हुंकार बेगूसराय द्वारा अंगिका लोक पर्व सह मिथिला लोक पर्व के मौके पर अंगिका भाषा में अंगिका लोक नाटक कपिल देव रंग के निर्देशन में सती बिहुला का मंचन किया गया।


सती बिहुला का मंचन नाटक की शुरुआत बिहुला विषहरी के बंदनी से किया गया और फिर आगे के कथा क्रम में पांचों बहन विषहरी का जन्म फिर धरती पर चांदो सौदागर द्वारा पूजा का मांगना इस क्रम में चांदो सौदागर के छह पुत्रों को नदी में डुबो देना बाला लखेंद्र को सांप के द्वारा डलवा देना और सती बिहुला द्वारा अपने तप और संघर्ष के बल पर स्वर्ग तक पहुंचने की संघर्ष यात्रा और पुणे पति को जीवित कर खुशी खुशी धरती पर जीवन यापन एवं विषहरी पूजा के अंग प्रदेश में श्री गणेश की कथा को मंचित किया गया।


लोक शैली में रचे बसे इस संगीतमय प्रस्तुति में हारमोनियम पर कौशल किशोर मंडल नाल पर दीनानाथ दिनकर नगाड़ा पर राजकुमार और ऑर्गन पर पंकज कुमार ने संगत किया। मैना बिसहरी की भूमिका विनोद बिहारी दो तिला भवानी की रंजीत मंडल माया बिसहरी की विश रंजन कुमार बाला लखेंद्र का श्रवण कुमार जया विसर का सोनी भारती सोनिका का सीता राम भारती चांदो सौदागर का हीरालाल विद्यार्थी सूत्रधार का कपिल देव रंग एवं नौकर का राजकुमार ने भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में संगीत नाटक विभाग की विभागाध्यक्ष द्वारा कपिल देव रंग को अंग वस्त्र प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया मौके पर रंग ग्राम जन सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष दीपक कुमार नृत्य निर्देशक राम जी मुजाहिद खुशबू सहित अन्य लोग उपस्थित थे l

सुजीत गुप्ता
Next Story
Share it