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मार्गदर्शक मंडल से "नालायक मंडल" तक...

बताइये मित्रों.. है कोई ऐसी पार्टी! नही न !तो फिर मान लीजिये की "पार्टी विद डिफरेंस" का भाजपा का दावा पूरी तरह सही है।

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भारतीय जनता पार्टी के नेता जब अपनी पार्टी की खूबियां गिनाते हैं तो उनका पहला डायलॉग होता है-पार्टी विद डिफरेंस! पिछले सात-आठ सालों में इस पार्टी ने जो चाल-चरित्र-चेहरा दिखाया है,उसके बाद देश और दुनियां में यह आम धारणा बनी है कि- हमाम में सब नंगे हैं - वाली कहावत को चरितार्थ करते हुये भाजपा ने कांग्रेस सहित सभी अन्य दलों के चरित्र को आत्मसात कर लिया है।इसलिए अब वह पार्टी विद डिफरेंस सिर्फ इसलिये है क्योंकि वह देश की ऐसी इकलौती पार्टी है जिसमें हर पार्टी का "अंश" मौजूद है।

लेकिन मेरा मानना है कि भाजपा सच में पार्टी विद डिफरेंस है।करीब 40 साल की उम्र में इस पार्टी ने लम्बा सफर तय किया है।संसद में दो सदस्यों से चलकर वह 300 के ऊपर जा पहुंची है।सच में यह उपलव्धि उल्लेखनीय है।एक ओर जब सारे दल विघटित और क्षरित रहे हैं वहीं भाजपा पुष्पित और पल्लवित हो रही है।यह भी सच है कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उसने हर विरोधी दल का "घास-कूड़ा" उठाया है।सत्ता में आने और बने रहने के लिए उसका इस्तेमाल किया है।

लेकिन अगर आप जरा गौर से देखेंगे तो आपको यह अहसास होगा कि भाजपा का पिछले 7-8 साल का सफर बहुत ही उल्लेखनीय रहा है।

अब आप यह मत सोचिएगा कि मैं भी गोदी मीडिया के पिंजरे में घुस गया हूँ!पहले मेरी बात सुन लीजिये!फिर फैसला करिएगा।

आपको याद होगा कि 2014 में जब श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की कमान संभाली थी तब उन्होंने सबसे पहले पार्टी के बुजुर्ग और वरिष्ठ नेताओं को अपने रास्ते से हटाया था।इन नेताओं में मोदी जी के महागुरु लालकृष्ण अडवाणी का नाम सबसे ऊपर था।उसके बाद मुरलीमनोहर जोशी और अन्य नेताओं के नाम आए।उस समय यह कहा गया कि ये नेता अब मार्गदर्शन करेंगे।तब एक "मार्गदर्शक मंडल" भी अस्तित्व में आया था।

उसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने उन सभी नेताओं को रास्ते से हटाया जो पार्टी में उनसे वरिष्ठ थे।या यूं कहें कि उनकी राजनीतिक योग्यता सर्वविदित थी।

इनमें से ज्यादातर को मार्गदर्शक मंडल में भेजा गया।कुछ को बुढापा काटने के लिए राजभवनों में पहुंचा दिया।यह क्रम आज तक जारी है।

लेकिन गुरुवार को भोपाल में भाजपा के युवा नेता मुरलीधर राव ने एक और "मंडल" का खुलासा किया।मुरलीधर राव स्वदेशी जागरण मंच के जरिये भाजपा में आये हैं। वे आजकल मध्यप्रदेश के प्रभारी हैं।गुरुवार को वे पार्टी के आरक्षित वर्ग के नेताओं के साथ थे।दरअसल वे यह जानना चाहते थे कि पार्टी इन वर्गों के लिए इतना कुछ करती है।राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचा दिया है।फिर भी वे भाजपा से पूरी तरह जुड़ क्यों नही रहे हैं।

जब नेता इकट्ठे होते हैं तो भाषण अपने आप होने लगते हैं। राव ने भी भाषण दिया!पार्टी के युवा नेताओं में शुमार राव ने पार्टी के उन नेताओं पर सवाल उठाया जो वरिष्ठता के बाद भी मुख्यधारा में नही हैं।यूं भी कह सकते हैं कि जिन्हें सरकार और संगठन में कोई पद नही दिया गया है।अपने इन नेताओं के रवैये से नाखुश राव ने कहा-कई कई बार सांसद और विधायक रह चुके नेता जब यह यह कहते हैं कि उन्हें पार्टी ने मौका नही दिया तो इन नेताओं से बड़ा "नालायक" कोई नही है। इन्हें तो कुछ भी नही दिया जाना चाहिए।

राव के इस ऐलान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में खलबली मच गई।खासतौर से उन नेताओं में जो हर तरह से "योग्य" होते हुए भी न सरकार में हैं और न ही संगठन में।

इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि पार्टी ने सात साल में "मार्गदर्शक मंडल" से "नालायक मंडल" तक का सफर तय कर लिया है।

मजे की बात यह है कि मध्यप्रदेश में तो उन नेताओं की सूची भी बन गयी जो आजकल मुरलीधर राव द्वारा घोषित नालायक मंडल में जबरन शामिल किए गए हैं।देश के स्तर पर यदि ऐसी सूची बनाई जाएगी तो बहुत से नाम हर राज्य से जुड़ जाएंगे।

इन मंडलों पर यदि गौर किया जाए तो यह भी समझ में आएगा कि 2014 के मार्गदर्शक मंडल में उन नेताओं को भेजा गया था जो 75 पार कर गए थे।लेकिन नए बने नालायक मंडल में तो उन नेताओं को भी भेजा जा रहा है जो अभी 50-55 के ही हैं।

मोदी-शाह के निर्देशन में बने इन मंडलों में पहुंचाए गए ज्यादातर नेता मौन ही हैं।सिर्फ यशवंत सिन्हा एक ऐसे नेता थे जो मार्गदर्शक मंडल में नही गए।उन्होंने डंके की चोट पर मोदी को आइना दिखाया।वे अब भाजपा में नही हैं।लेकिन ज्यादातर नेताओं ने इसे अपनी नियति मान कर मौन धारण कर लिया है।

अब बताइये कि सिर्फ सात साल में मार्गदर्शक मंडल से नालायक मंडल तक सफर तय करने वाली पार्टी आपकी नजर में कोई और है।है कोई ऐसी पार्टी जो दूसरी पार्टी के बुजुर्गों को अपमानित करने की मुहिम चलाते चलाते अपने बुजुर्गों को ही "नालायक" घोषित कर दे!

बताइये मित्रों.. है कोई ऐसी पार्टी! नही न !तो फिर मान लीजिये की "पार्टी विद डिफरेंस" का भाजपा का दावा पूरी तरह सही है।

एक बात और!जिन मुरलीधर राव ने इस मंडल की जानकारी दी है वे अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा में राष्ट्रीय महासचिव थे।फिलहाल उनके पास संगठन में कोई पद नही है।लेकिन वे मध्यप्रदेश के प्रभारी हैं।

अरुण दीक्षित
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