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आईएएस बनकर जागृति ने फ़तेहपुर का बढ़ाया मान, गांव आकर बोली जागृति, इस मिट्टी को बारम्बार प्रणाम

अपनी आईएएस बेटी से मिलने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा| यही नहीं अपने गांव पहुंचकर जागृति ने बताया कि आखिर कैसे उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया|

आईएएस बनकर जागृति ने फ़तेहपुर का बढ़ाया मान, गांव आकर बोली जागृति, इस मिट्टी को बारम्बार प्रणाम
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फ़तेहपुर । देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक यूपीएससी (Union Public Service Commission) क्लीयर करना लगभग हर युवा का सपना होता है| हालांकि, इसमें सफलता चंद छात्रों को ही मिल पाती है| यूपीएससी 2020 में उत्तरप्रदेश के जनपद फतेहपुर के तहसील बिंदकी के अमौली ब्लॉक के नसेनियां गांव की बेटी जागृति अवस्थी ने ये अद्भुत कारनामा कर दिखाया| यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया में द्वितीय स्थान और महिला वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर जागृति ने जनपद का नाम रोशन कर दिया| अपने दूसरे प्रयास में महज 24 साल की उम्र में मिली इस सफलता के बाद जागृति पहली बार अपने पैतृक गांव नसेनियां विजयादशमी पर्व पर पहुँची तो ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों द्रारा उनका भव्य स्वागत किया गया| अपनी आईएएस बेटी से मिलने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा| यही नहीं अपने गांव पहुंचकर जागृति ने बताया कि आखिर कैसे उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया|

जागृति ने मंच में पहुँचते ही सभी जनपदवासियों का अभिवादन किया और फतेहपुरिया अंदाज़ में बोलते हुए कहा आज हम अपने गाँव आकर बहुत खुश हन| बचपन से हम हिन आती जाती रही हन| जब छोटी राहन तो हिन्ही खिलती राहन| मिट्टी म लुटती राहन| अब बड़ी हुई गइन है तो मिट्टी म तो नही खिलती हन मगर हम येई माटी से निकली हन| हमार पूरा परिवार हिन्ही पैदा भा है हिन्ही बड़ा भा है| आज अपनो के बीच आई हूँ, मुझे अपनो के बीच मे आकर बेहद खुशी और अपनेपन का अहसास हो रहा है| गाँव से मेरा बहुत लगाव है| गाँव की खुशबू से गांव की संस्कृति से आज भी मेरा जुड़ाव है|

जागृति ने कहा कि आज भी अगर कोई पूछता है आप कहाँ से हो तो मेरा जवाब आज भी यही रहता है नसेनियां फतेहपुर से हूँ| मुझे गर्व महसूस होता है कि नसेनियां गाँव साक्षरता के प्रति बेहद जागरूक है| क्योंकि नसेनियां गांव की साक्षरता दर भारत की साक्षरता दर से अधिक है| ये बात मैंने इंटरब्यू देने से पहले पढ़ी हुई थी| 2 साल पहले मैं इंजीनियर थी, लोग पूछते है कि आपको प्रेरणा कहाँ से प्राप्त हुई तो मैं बताना चाहूँगी कि मेरे चाचा और चाची 3 पंचवर्षीय प्रधान (सरपंच) रहे है| उनको काम करते हुए मैंने देखा है|मुझे उन्ही से प्रेरणा मिली हुई है| मैं इलेक्शन तो नही लड़ सकती हूँ| मगर सिविल सेवा में आकर लोगो को सेवा जरूर कर सकती हूँ|

जागृति ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि मुझे उत्तरप्रदेश कैडर ही मिलेगा तो उत्तरप्रदेश आकर काम करने की सम्भावना अधिक है| मैं गाँव हमेशा आती जाती रहूँगी| गाँव से मेरा हमेशा जुड़ाव बना रहेगा| आज मैं जो कुछ हूँ,अपने पूर्वजो के आशीर्वाद से हूँ| मुझे आज बच्चो से और उनके अभिवावको से कुछ कहना है| आप लोगो के बीच से ही निकलकर मैंने ये मुकाम हासिल किया अगर मैं ये मुकाम हासिल कर सकती हूँ, तो आप लोग भी हासिल कर सकते है| बस मेहनत और सच्ची लगन होनी चाहिए| मेहनत करिए आंगे बढ़िए और किसी से खुद को कम मत समझिए| और बेटियों के प्रति सशक्तीकरण की शुरुआत घर से होती है|घर मे उनकी शिक्षा को लेकर के उनके स्वास्थ्य को लेकर के उनकी नौकरी को लेकर के पूरा ध्यान दीजिए| और अपनी महिलाओं पर पूरा ध्यान दीजिए जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ देवी और देवता भी निवास करते है|

जागृति ने कहा कि मेरा मानना है हमेशा मिट्टी से जुड़े रहना चाहिए पाँव हमेशा जमीन पर रहना चाहिए| अपने लोगो से अपनी संस्कृति से हमेशा जुड़े रहे| आज आप सभी जनपदवासी और ग्रामवासी मेरे लिए यहाँ उपस्थित हुए इतना प्यार और स्नेह दिया जिसके लिए मैं आप सभी को हदय से आभार एवं धन्यवाद देती हूँ|

तदुपरांत अतिप्राचीन एवं प्रसिद्ध श्री बाँके बिहारी मन्दिर डिघरुवा में श्री बाँके बिहारी जी के दर्शन किए| जागृति अवस्थी का वहाँ उपस्थित ग्रामवासियों व गणमान्य नागरिको ने भव्य स्वागत किया| स्वागत कार्यक्रम में प्रमोद शुक्ला, पवन अवस्थी (एडवोकेट), शुभम शुक्ला, अंकित शुक्ला, इत्यादि लोग उपस्थित रहे|

Vivek Mishra
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