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संघ और संगठन की कड़ी निगरानी में मध्यप्रदेश!

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भोपाल।एक जमाने संघ और भाजपा की नर्सरी रहा मध्यप्रदेश इन दिनों इन दोनों की "कड़ी निगरानी" में है।संघ और भाजपा ने जिस तरह अपने वरिष्ठ पदाधिकारी भोपाल में बैठाए हैं उनसे यह सवाल उठ रहा है कि क्या मध्यप्रदेश में कोई बड़ा बदलाव संभावित है।या फिर संघ और भाजपा मिलकर कोई नया प्रयोग करने जा रहे हैं।सवाल कई और भी हैं!जिनके जवाब के लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फैसला किया है कि राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश अब दिल्ली के बजाय भोपाल में ही बैठेंगे।शिवप्रकाश अभी तक दिल्ली से ही मध्यप्रदेश का दायित्व संभाल रहे थे।

शिवप्रकाश के साथ मुरलीधर राव मध्यप्रदेश के प्रभारी हैं।

यह फैसला होने के करीब 6 महीने पहले ही संघ ने यह फैसला किया था कि उसके सह सरकार्यवाह डाक्टर मनमोहन वैद्य का मुख्यालय नागपुर या दिल्ली में न होकर भोपाल में होगा।नए सर कार्यवाह दत्तात्रेय हौंसबोले के करीबी मनमोहन वैद्य भोपाल में संघ के संवाद केंद्र में बैठते हैं।

ऐसा पहले कभी नही हुआ।भोपाल संघ और भाजपा दोनों की ही नजर में बहुत महत्वपूर्ण रहा है।लेकिन इस स्तर के पदाधिकारी भोपाल में पहले कभी तैनात नही किये गए।

संघ और भाजपा दोनों ही इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नही हैं।शिवप्रकाश को दिल्ली से भोपाल भेजे जाने से जुड़े सवाल पर एक बड़े भाजपा नेता ने सिर्फ इतना कहा कि यह फैसला दिल्ली का है।इसकी बजह भी दिल्ली ही बताएगी।साथ ही वह यह कहना भी नही भूले कि आप पुरानी बातें भूल जाइए!आजकल भाजपा में वह सब हो रहा है जो पहले नही हुआ।

उधर सूत्र कहते हैं कि मध्यप्रदेश को लेकर संघ और भाजपा दोनों में गहन मंथन चल रहा है।इन सूत्रों के मुताविक 2018 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने जिस तरह सत्ता हासिल की है,उसकी बजह से कई सवाल उठे हैं।कांग्रेस का साफ आरोप है कि उसके विधायकों को खरीदा गया है।इस बजह से भाजपा की छवि को भारी धक्का मध्यप्रदेश में लगा है।

इसके अलावा करीब डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय की सरकार के साथ जो बुराइयां पार्टी में आईं हैं वे भी चिंता का विषय हैं।इसी बजह से मध्यप्रदेश पर नजर है।

सूत्रों की माने तो प्रदेश में संगठन के स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है।संघ की तर्ज पर भाजपा को भी विकेन्द्रित किया जाएगा।जिस तरह संघ ने मध्यप्रदेश को तीन प्रान्तों में विभाजित कर रखा है उसी तरह भाजपा को भी किया जाएगा।भाजपा के संभागीय अध्यक्ष नियुक्त किये जायेंगे। प्रदेश अध्यक्ष मुख्य तौर पर समन्वयक की भूमिका में रहेगा।

इससे न केवल ज्यादा कार्यकर्ताओं को पद मिल सकेंगे बल्कि पार्टी की जमीनी पकड़ भी मजबूत होगी।सूत्रों के मुताविक 6 संभागीय संगठन मंत्रियों को हटाया जाना इसी तैयारी का हिस्सा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बारे में संघ के एक वरिष्ठ स्वंयसेवक का कहना है-भाजपा के हर काम का ठीकरा संघ के सिर पर फोड़ा जाता है।पिछले सालों में सरकार की जो कमजोरियां रही हैं वह सब जानते हैं।इनकी बजह से बहुत बदनामी हुई है।इसलिए संघ सीधी नजर रख रहा है।

जहाँ तक भाजपा के संचालन की बात है तो वह तो पुरानी व्यवस्था है।संघ के प्रचारक पूरे प्रदेश में हैं।पार्टी में संगठन महामंत्री,सह संगठन महामंत्री, कार्यालय मंत्री सभी तो संघ से ही हैं।इसलिए आप अलग करके देखने की कोशिश मत करिए।

कहा यह भी जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से भाजपा में आये कांग्रेसियों पर नजर रखने और उनका पुनर्वास करने के लिए शिवप्रकाश जी को दिल्ली से भोपाल भेजा जा रहा है।पार्टी की बिगड़ी छवि सुधारना भी एक काम रहेगा।

फिलहाल एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रही ,खाली खजाने वाली शिवराज सरकार के सामने यह भी एक नई चुनौती ही है।संघ और भाजपा के दिग्गजों की मौजूदगी में शिवराज का राजकाज कैसा चलेगा यह देखना होगा।क्योंकि अभी तक का शिवराज का यह रिकॉर्ड है कि उन्होंने संघ को "साध" कर रखा है।लेकिन अब जिस स्तर के पदाधिकारियों को भोपाल में तैनात किया गया उसे देखते हुए तो यह साफ दिख रहा है कि शिवराज की राह अब आसान नही रहने वाली।

अरुण दीक्षित
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