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लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- इतने चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस के अहंकार में बदलाव नहीं आया

लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- इतने चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस के अहंकार में बदलाव नहीं आया
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं अपनी बात बताने से पहले कल जो घटना घटी उसके लिए दो शब्द जरूर कहना चाहूंगा। देश ने आदरणीय लता दीदी को खो दिया। इतने लंबे कालखंड में जिनकी आवाज ने देश को मोहित किया। देश को प्रेरित किया, देश को भावनाओं से भर दिया। सांस्कृतिक धरोहर और एकता को मजबूत किया। उन्होंने 36 भाषाओं में गाया। ये भारत के लिए एकता और अखंडता के लिए एक प्रेरक उदाहरण है। मैं लता दीदी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं।

पीएम मोदी की कोरोना को लेकर टिप्पणी पर कांग्रेस ने जब विरोध किया तो पीएम मोदी ने कहा कि मैंने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन अब नाम लेकर कहता हूं कि कांग्रेस ने तो हद कर दी। पहली लहर के दौरान जब देश लॉकडाउन का पालन कर रहा था और दुनिया कह रही थी कि जो जहां है वहीं रुकें। तब कांग्रेस के लोगों ने मुंबई के रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे शहर से निकलें। लोगों को प्रेरित किया गया कि महाराष्ट्र में हमारे ऊपर जो बोझ है, वह थोड़ा कम हो। आप जहां के भी हैं, वहां जाकर कोरोना फैलाओ।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मानवता 100 साल का सबसे बड़ा संकट झेल रही है। जिन लोगों ने अतीत के आधार पर ही भारत का आकलन किया, उन्हें लगता था कि भारत यह लड़ाई लड़ पाएगा। भारत खुद को बचा नहीं पाएगा, लेकिन आज स्थिति क्या है। मेड इन इंडिया कोविड टीके दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावी हैं। आज भारत शत-प्रतिशत पहली डोज के निकट पहुंच रहा है। लगभग 80 फीसदी सेकेंड डोज का भी पड़ाव पूरा कर लिया है। कोरोना एक वैश्विक महामारी थी, लेकिन उसे भी दलगत राजनीति के लिए उपयोग में लाया जाए तो क्या यह मानवता के लिए सही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष में आज देश अमृत महोत्सव मना रहा है। आजादी की इस लड़ाई में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया, वे किसी दल से थे या नहीं। उन सबसे परे उठकर देश के लिए जीने वाले और जवानी खपाने वाले लोगों को स्मरण करने का यह अवसर है। उनके सपनों को याद करते हुए कुछ संकल्प लेने का अवसर है। हम सभी संस्कार, स्वभाव और व्यवस्था से लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध लोग हैं। यह सही है कि आलोचना जीवंत लोकतंत्र का एक आभूषण है, लेकिन अंध विरोध लोकतंत्र का अनादर है।

सुजीत गुप्ता
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