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नहीं चली हिन्दू-मुस्लिम तुष्टिकरण राजनीति, सलीम बने प्रधान, बीजेपी अमरोहा जिलाध्यक्ष के भाई ग्राम पंचायत चुनाव हारे

अमरोहा में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है .

नहीं चली हिन्दू-मुस्लिम तुष्टिकरण राजनीति, सलीम बने प्रधान, बीजेपी अमरोहा जिलाध्यक्ष के भाई ग्राम पंचायत चुनाव हारे
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अमरोहा : ग्राम पंचायत बांसली में करीब 25 साल बाद फिर इतिहास रचा गया । यहां 25 साल पहले एक मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव लड़े थे नाम था- मेहदी। जिन्हे अप्रत्याशित जीत हासिल हुई थी।

एक वो समय था और आज का समय है जब गाँव वालो ने हिन्दू-मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वालो के मुँह पर लांछन लपेटी है। बांसली ग्राम पंचायत में इस बार ओबीसी में सीट निर्धारित थी, जिसके लिए एक तरफ जाट नेता और भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह के भाई सतेंद्र सिंह ने पर्चा दाखिल किया था, वही एक मध्यमवर्गीय परिवार के प्रत्याशी सलीम सैफी अपनी नेक ,ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ मैदान में आए थे।

पचदेवला गाँव के साथ मिलकर बांसली ग्राम पंचायत में कुल मतो की संख्या 816 है। जिसमें 125 वोट मुस्लिमो के और अन्य सब हिन्दू वोट हैं, गौरतलब बात है कि स्थानीय लोगों ने हिन्दू-मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वालो को आइना दिखा दिया। 19 अप्रैल को 695 वोट डले थे। जिसमें सलीम सैफी को 393 और सतेंद्र सिंह को 303 मत प्राप्त हुए। परिणाम स्वरूप सलीम सैफी 88 मतो से विजयी हुए, जबकि 20 वोट कैंसिल हुए। चुनाव प्रचार के दौरान सतेंद्र सिंह ने मुस्लिम प्रत्याशी होने के नाते खूब नफरत फैलायी थी, लेकिन आखिरकार धर्म विजयी हुआ।

प्रत्यक्ष मिश्रा ( स्वतंत्र पत्रकार )

Shiv Kumar Mishra
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