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आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, जाने इसके पीछे की क्या है कहानी

आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, जाने इसके पीछे की क्या है कहानी
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बहराइच। आखिरकार वो तेंदुआ वन विभाग की पिजड़े में फंस ही गया जिसकी कई दिनों से तलाश जारी थी। क्योंकि इसके खौफ से गांव वाले दहशत में अपनी जिंदगी जी रहे थे बहराइच में चंदनपुर के दो गांवों में तीन दिन के अंतराल पर दो बच्चों की जान लेने वाली मादा तेंदुआ सोमवार रात कलंदरपुर में लगाए गए पिंजरे में कैदहो गई। उसकी चिग्घाड़ से इसकी जानकारी हुई। मंगलवार सुबह वन महकमे के पशु चिकित्सक को बुलाकर उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। उसे कतर्निया के ट्रांस गेरूआ में छोड़ने की तैयारी की जा रही है।

नानपारा कोतवाली के मोतीपुर रेंज के जंगल से सटे चंदनपुर के खाले बढ़ैया में 30 जुलाई की रात निजी क्लीनिक से राम मनोरथ अपने छह वर्षीय बेटे अभिनंदन के साथ घर आ रहे थे। गन्ने के खेत में छिपे तेदुंए ने अभिनंदन पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ कहीं छिप गया था। घायल अभिनंदन को मोतीपुर सीएचसी ले जाया जा रहा था, किन्तु रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी।

डीएफओ आकाश दीप बधावन ने खाले बढ़ैया में ट्रेपिंग केज लगाया था। वन महकमे की टीम तेंदुए की तलाश कर रही थी। ठीक दो दिन बाद चंदनपुर के ही मजरे कलंदरपुर में रविवार रात में तेंदुआ घर में घुसकर देवतादीन की छह वर्षीय बेटी राधिका उर्फ अंशिका को उठा ले गया था। पूरी रात बेटी की तलाश होती रही। अगले दिन बालिका का कटा हुआ सिर घर से तीन सौ मीटर दूर गन्ने के खेत में मिला।

डीएफओ ने अफसरों को अवगत करा कर एक और ट्रेपिंग केज कलंदरपुर में लगाया गया। दोनों पिंजरे में शिकार बांधा गया। सोमवार रात लगभग एक बजे कलंदरपुर स्थित पिंजरे में शिकार के फिराक में आने पर तेंदुआ फंस गया। पिंजरे में फंसने पर उसकी चिग्घाड़ से वन महकमे की टीम को उसके फंसने की पुष्टि हुई। डीएफओ के निर्देश पर महकमे के पशु चिकित्सक डा. वीरेन्द्र कुमार वर्मा से तेदुंए का मेडिकोलीगल कराया गया।

सुजीत गुप्ता
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