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एडीजी प्रेम प्रकाश ने अलग अंदाज से मनाई बापू, शास्त्री की जंयती

ऑफिस स्टॉप को तोहफ़े में दिए कपड़े और गांधी ज्ञान

एडीजी प्रेम प्रकाश ने अलग अंदाज से मनाई बापू, शास्त्री की जंयती
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प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट

बरेली। विश्व भर में 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जाती है। इसी जयंती को एडीजी प्रेम प्रकाश ने 2 अक्टूबर को अपने ऑफिस स्टॉफ के लोगों को कपड़े और गांधी ज्ञान देकर मनाया जोकि एक अनोखा और बुद्धिजीवी पहल है।


एडीजी प्रेम प्रकाश ने सुबह ही अपने दफ्तर पहुँचकर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री की तस्वीरों पर फूल-माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर एडीजी ने अपने दफ्तर में तैनात समस्त स्टॉफ तोहफे में कपड़े भेंट किये और साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के बलिदान के महत्व को साझा किया। बरेली जोन के एक बड़े अधिकारी द्वारा किये इस कार्य की सभी ने सराहना कर बधाइयां दी।


एडीजी प्रेम प्रकाश की तरफ से बांटे तोहफों को लेकर समस्त स्टाफ़ के चहरे खिल उठे, बोले पहले कभी नही मनाई गई इस तरह से गांधी जयंती।

क्यो मानते है 2 अक्टूबर को जयंती

विश्व भर में दो अक्टूबर को राष्ट्र पिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री महान नेताओं की जयंती मनाई जाती है। 2 अक्टूबर को ही राष्ट्रपिता गांधीजी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। देश की आजादी में राष्ट्रपिता व शास्त्री जी के योगदान को देखते हुए हर साल उनके सम्मान में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है। 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सरकारी अवकाश होता है। इस मौके पर स्कूलों और सरकारी संस्थानों में तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है। स्कूलों में निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। सरकारी कार्यक्रमों में गांधीजी को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके शिक्षाओं एवं आदर्शों के महत्व को बताया जाता है।

इसी दिन यानी 2 अक्टूबर को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता, क्रांतिकारी व्यक्तित्व और जन कल्याणी विचारों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को आज के उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। वह अपने देश और देशवासियों के सम्मान और रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार थे, जो कि उनके व्यक्तित्व को महान बनाता है। आपको बता दें कि इसी के चलते उन्होंने देश को मुसीबत से निकालने के लिए भोजन करना भी छोड़ दिया था और साथ ही वेतन लेने से भी मना कर दिया था।

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