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फातिमा का चिराग चौदह सौ साल से रोशन है

फातिमा का चिराग चौदह सौ साल से रोशन है
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बरेली।(शार्जिल ज़ैदी)सेथंल मोहल्ला हाकिम टोला के छोटे इमामबाड़े मे इदारा-ए-फरोगे-ए-विलायत सेथंल की ओर से ६ नवंबर से खमसा-ए-मजालिस का आयोजन किया गया। खमसे की पांच रोज़ा मजालिस का उन्वान(पहलू) यादे जैनब के साथ जिक्रे एहलेबैत रहा वही पहली मजलिस मगरिब की नमाज के बाद शिरु हुई। जिसको लखनऊ से आये हुऐ मौलवी गुलाम हुसैन सदफ जौनपुरी ने खिताब किया।


उन्होने कहा हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाहे अलैहा का जन्म वर्ष पांच हिजरी १ शाबान को मदीना नगर में हुआ। उनके जन्म पर इमाम हुसैन अ०स्० को ख़ुशी सबसे ज़्यादा थी।इमाम हुसैन अ०स्० हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पास पहुंचे और उत्साह से कहा कि अल्लाह ने मुझे एक बहन दी है। मां हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा ने अपने पति हज़रत अली अलैहिस्सलाम से कहा कि हे अली! हम अपनी बेटी का क्या नाम रखें? हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने उत्तर दिया कि हमारी बेटी का नाम पैग़म्बरे इस्लाम रखेंगे। उधर पैग़म्बरे इस्लाम को जब अपनी नवासी की खबर मिली तो सीधे अपनी बेटी हज़रत फ़ातेमा के घर पहुंचे।


पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि बेटी फ़ातेमा बच्ची को मेरे पास लाओ मैं उसे देखना चाहता हूं।बच्ची पैग़म्बरे इस्लाम की गोद में थी और उनके होटों पर मुसकुराहट थी उन्होंने कहा कि इस बच्ची का नाम अल्लाह रखेगा इसी बीच अल्लाह की ओर से एक फरिश्ता हज़रत जिबरईल आए और पैग़म्बरे इस्लाम को बताया कि इस बच्ची का नाम ज़ैनब रखे फातिमा का चिराग चौदह सौ साल से रोशन है। जनाबे फातिमा ने अपने बेटों हसन और हुसैन तथा बेटी जनाबे जैनब की परवरिश ऐसी की जिसे दुनिया आज भी याद करती है। बेटे जन्नत के सरदार हैं तो मां खातूने जन्नत। मौलाना सदफ ने महिलाओं का आह्वान किया कि वह अपने बच्चों की परवरिश भी इसी तरह करें जैसे बीबी फातिमा ने की थी। ताकि उनमें एक अच्छा संस्कार पैदा हो और धर्म प्रति लगाव भी।। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद याजिदी लश्कर ने इमाम के खेमो में आग लगा दी थी।


औरतों को बेपर्दा कर दिया। इतना ही नहीं इमाम हुसैन के बड़े बेटे सय्यद सज्जाद के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेडीयां डालकर हुसैन की चार वर्षीय पुत्री सकीना की कानों से बालिया खिंच ली गई थी। इस दौरान बच्ची तड़प कर रोई तो जालिमों ने उसे और तमाचे जड़ दिए। वह रोती रही जालिम कहर बरपाते रहें, बाद में औरतों और बच्चों को रस्सियों में जकड दिया गया। यह सुनकर लोग ज़ारो कतार रोते रहे वही इदारा-ए-फरोगे-ए-विलायत के मेंबर मोहिब ज़ैदी और असहाब हैदर ने जानकारी देते हुऐ बताया कि खम्से का समापन १० नवंबर को होगा वही मजालिस में शिवील ज़ैदी,शबाहत,मोनिस,शाज़ू,फुज़ैल्,असद ज़ैदी,ऐनब,यासम,फैज़ुल,राजू,हैदर्,ज़मीर,आदि लोग मौजूद रहे।

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