बिजनौर

बिजनौर में स्कूटी की बस से टक्कर, स्कूटी सवार दो लोगो की मोत

Special Coverage News
30 Sept 2018 4:14 PM IST
बिजनौर में स्कूटी की बस से टक्कर, स्कूटी सवार दो लोगो की मोत
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फैसल खानबिजनौर के नुरपूर में एक रोडवेज की बस ने स्कूटी सवार दो लोगो को सामने से टक्कर मार दी जिससे स्कूटी पर सवार दोनों युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। बिजनौर रोडवेज से सुबह 5 बजे बस सं0 यू0पी0 20 टी 6652 जिसको चालक सरदार दर्शन सिंह चला रहा था बरेली जाने के लिए निकली जैसे ही बस नुरपूर पहुंची सामने से स्कूटी पर आ रहे दो युवकों से सामने से टकरा गई।


टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी बस के नीचे घुस गई और उसके परखच्चे उड गये। स्कूटी सवारदोनों युवको को बस 2 मीटर तक घसीटती हुई ले गई जिससे दोनों युवकों के हाथ पैर बुरी तरह टूट गये और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। तस्वीरे इतनी वीभत्स है कि हम आपको दिखा नहीं सकते। मैं मौके पर ही मौजूद थामैंने ये पूरा मंजर अपनी आंखो से देखा। अचानक हुए इस हादसे को देखकर मैं ये समझ नहीं पाया कि आखिर ये हुआ क्या है। जब समझ में आया तो मेरी आंखो के सामने अधंेरा छा गया क्योंकि दो नवयुवकों की लाशें मेरी आंखो के सामने पड़ी हुई थीं और सडक पर खून का दरिया सा बह गया था।





मगर इससे भी ज्यादा अफसोस मुझे तब हुआ जब मैंने देखाकि बस के ड्राइवर और कन्डक्टर तो भाग ही गये थे बस से सवारियां भी उतर कर आगे की ओर जाने लगी। किसी ने भीये देखने की कोशिश नहीं की, कि जिन दो युवको को बस ने कुचला है उनका क्या हाल हुआ होगा। क्या पता उनमें सेकोई जिन्दा होता और उसको समय से अस्पताल पहुंचा कर उसकी जान बचाई जा सकती। मगर मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि बस में जितनी भी सवारियां थी या तो उनमें कोई इंसान नहीं था या फिर उनमें से किसी में भी इंसानियत बाकीनहीं थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे बस के नीचे कोई इंसान न आकर कोई जानवर आ गया हो जिसकी किसी कोकोई परवाह कोई फिक्र नहीं थी।


मैंने दोनों की लाशों को काफी हिला डुला कर देखा कि हो सकता है किसी में कोई जानबाकी हो मगर शायद उनको भी पता नहीं चला होगा कि उनके साथ आखिर हुआ क्या है। संभवतः उनका सिर या तो बससे टकराया या फिर सडक से मगर मौत ने उन्हें सोचने समझने का कोई मौका नहीं दिया। तुरंत मौके पर पुलिस की गाडियादौड पड़ी थोडी ही देर बाद मौके पर एम्बूलेंस पहुंची और दोनों युवकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दियागया। थोडी ही देर बाद सब कुछ सामान्य सा हो गया सभी लोग जो मौके पर दौड कर आये थे अपने कामों में व्यस्त होगये। कोई किसी के लिये क्यों रोये, किसी के मरने पर क्यों अफसोस करे। और लोगो के लिये तो ये सिर्फ एक हादसा था जो हुआ और खत्म हो गया। रोना तो उनको है जिन्होंने अपने कलेजे के टुकडो को खोया है।

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