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बिजनौर: सरकार की नीतियों को घटिया सामग्री से लगा रहे हैं चूना

जहां पर सरकारी स्कूल की मरम्मत और निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया जिससे वहां के ग्रामीणों में इस कार्य से काफी रोष है और कह रहे हैं कि सरकार के पैसा देने के बावजूद भी यहां के सरकारी लोग सरकारी काम में भी ठीक पैसा नहीं लगा रहे हैं और घटिया निर्माण कर रहे हैं

बिजनौर: सरकार की नीतियों को घटिया सामग्री से लगा रहे हैं चूना
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(फैसल खान)

बिजनौर। एक तरफ जहां केंद्र सरकार अपने तमाम नीतियों से और कड़ी मेहनत से जनता को और देश के लोगों को आगे ले जाने के लिए कटिबद्ध है वहीं पर सरकार के नुमाइंदे अपने गलत नीति और गलत सोच से सरकार की महत्वकांछा नीतियों को बर्बाद करने में आमादा हैं, ताजा मामला बिजनौर का है जहां पर सरकारी स्कूल की मरम्मत और निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया जिससे वहां के ग्रामीणों में इस कार्य से काफी रोष है और कह रहे हैं कि सरकार के पैसा देने के बावजूद भी यहां के सरकारी लोग सरकारी काम में भी ठीक पैसा नहीं लगा रहे हैं और घटिया निर्माण कर रहे हैं l

जबसे केंद्र में मोदी सरकार आई है तबसे तमाम हुक्मरान और तमाम सरकारी लोगों की नींद हराम हो चुकी है l लेकिन मोदी सरकार दिन-रात जी तोड़ मेहनत करने के बावजूद भी अभी भी विफल दिखाई देती है, क्योंकि उन्हीं के लोग सरकारी नीतियों को चूना लगा रहे हैं, बल्कि सरकार की तमाम नीतियों को जनता के प्रति गलत साबित करने में आमादा भी हैं, ताजा मामला बिजनौर का है यहां पर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्कूल चले के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बनाये जा रहें हैं, और इसी योजना में प्राथमिक विद्यालयों को सही करने के लिए और बच्चों को पढ़ाई लिखाई में आगे ले जाने के लिए सरकार की जो पहल की गई है।

आखिरकार उस नीतियों को सरकारी नुमाइंदे चूना लगाने में आमादा है l आप देख सकते हैं वीडियो में कि जिस सरकारी बिल्डिंग का निर्माण सरकारी पैसे से स्कूल के लिए हो रहा है आखिर उसका प्लास्टर कितने जल्दी जर्जर अवस्था में आ गया है लोगों ने बताया कि प्लास्टर कितना जल्दी गिर करके बेकार हो जाएगा तो आखिर इसका मतलब क्या निकाला जाए कि जब सरकार पूरी तरीके से पैसा दे रही है किसी ने मरम्मत को पूर्ण करने के लिए बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए यह कार्य कराया जा रहा हैं तो यह सरकारी कर्मचारी आखिर सरकार की नीतियों को गलत साबित करने में क्यों अमादा हैं, क्या उनका पेट सरकार के दिए हुए पैसे से नहीं भरता है कि इसमें भी वह बेईमानी करने में आगे है।


आखिर वह स्कूल की बिल्डिंग एक ना एक दिन जर्जर अवस्था में गिर जाएगी और उसके नीचे दबकर बच्चे मर सकते हैं यह एक बहुत बड़ा हादसा भी हो सकता है पर साहब को इसकी क्या पड़ी है जितने पैसे आए उतने पैसे में काम नहीं करने को आमादा है चाहे कोई जिए या मरे सरकार की इज्जत बने या ना बिगड़े, इससे साहब को कोई मतलब नहीं है मतलब है तो सिर्फ अपनी जेब गर्म करने से और उन ठेकेदारों की जेब भरने से, फिलहाल बिजनौर के आला अधिकारी अभी इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है कि स्कूल चलो और आगे बढ़ो लेकिन फिलहाल अभी भी यहां पर घूसखोरी और बंदरबांट का खेल बदस्तूर जारी है ल

अब देखना यह है कि इस खबर के बाद सरकार के नुमाइंदे इस कार्यशैली पर और किए गए घटिया कार्य पर आखिर क्या एक्शन लेते हैं क्योंकि जिस तरीके से सरकार की नीतियों को चूना लगाया जा रहा है जनता में काफी आक्रोश व्याप्त है और यही वजह है कि केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद भी अभी भी हमारा देश एक कदम विकास से दूर है क्योंकि यह सरकारी लोग जिस तरीके से सरकार की नीतियों को गलत साबित करते हैं आखिर उससे देश का विकास कैसे होगा ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए और तुरंत इन पर वैद्यानिक कार्रवाई करना चाहिएl बिजनौर से फैसल खान की रिपोर्ट l

Sujeet Kumar Gupta
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